कभी खारे पानी से प्रभावित होने के कारण जिस जमीन पर खेती करना मुश्किल था, आज वही जमीन गांव कुतानी निवासी किसान श्यामपाल चौहान व उनकी पत्नी मीना चौहान के परिवार की खुशहाली का आधार बन गई है। नई सोच, मेहनत और सही मार्गदर्शन के साथ उन्होंने इस जमीन पर झींगा पालन शुरू किया और देखते ही देखते उनकी मेहनत रंग लाने लगी। आज झींगा पालन से उन्हें सालाना लाखों रुपये की शुद्ध आय हो रही है और उनका परिवार आर्थिक रूप से पहले से अधिक मजबूत हुआ है। श्यामपाल चौहान ने बताया कि खारे पानी से प्रभावित होने के कारण उनकी जमीन का उपयोग पारंपरिक खेती के लिए आसानी से नहीं हो पा रहा था। ऐसे में उन्होंने जमीन को बेकार छोड़ने के बजाय इसका वैकल्पिक उपयोग करने के बारे में सोचा। इसी दौरान उन्हें खारे पानी वाले क्षेत्र में झींगा पालन की संभावना के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने झज्जर के मत्स्य विभाग से संपर्क किया। विभाग की ओर से उन्हें झींगा पालन के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया तथा तालाब तैयार करने, झींगा के बीज डालने, पानी की गुणवत्ता बनाए रखने और पालन के दौरान जरूरी सावधानियों के बारे में जानकारी दी गई। प्रशिक्षण और विभागीय मार्गदर्शन प्राप्त करने के बाद श्यामपाल चौहान ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के दिशा-निर्देशों के अनुरूप अपनी जमीन पर झींगा पालन के लिए तालाब तैयार करवाया। उन्होंने शुरुआत में करीब 40 लाख रुपये का निवेश किया और भाटेरा क्षेत्र में लगभग 2 हेक्टेयर भूमि पर झींगा पालन शुरू किया। नई गतिविधि होने के कारण शुरुआत में उनके सामने कई चुनौतियां भी आईं, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी। मत्स्य विभाग की सलाह के अनुसार तालाब और पानी का प्रबंधन करते हुए उन्होंने झींगा पालन को आगे बढ़ाया। मेहनत और सही प्रबंधन का परिणाम उत्पादन में दिखाई दिया। वर्ष 2024-25 में श्यामपाल चौहान ने लगभग 18 टन झींगा का उत्पादन किया। वर्ष 2025-26 में उत्पादन बढ़कर करीब 20 टन हो गया। झींगा की बिक्री उन्हें लगभग 380 रुपये से 480 रुपये प्रति किलोग्राम तक के भाव पर प्राप्त होती है। इस प्रकार झींगा पालन उनके लिए आय का एक मजबूत साधन बन गया है। सालाना 15.90 से 17 लाख रुपये तक की आय श्यामपाल चौहान ने बताया कि झींगा पालन से उन्हें सालाना करीब 15.90 लाख रुपये से 17 लाख रुपये तक की आय प्राप्त हो रही है। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है और जीवन स्तर भी बेहतर हुआ है। उन्होंने बताया कि जिस जमीन को लेकर पहले चिंता रहती थी, वही आज उनके लिए आर्थिक मजबूती का आधार बन चुकी है।