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हांसी ढाणा कलां में 10 एकड़ जमीन की दोबारा निशानदेही, कोर्ट के आदेश पर पहुंची प्रशासनिक टीम

हांसी के ढाणा कलां गांव में राजा हरिंदर सिंह फरीदकोट की करीब 10 एकड़ जमीन को लेकर चल रहे विवाद में बुधवार को हांसी प्रशासन की टीम कोर्ट के आदेश पर दोबारा निशानदेही करने पहुंची। ड्यूटी मजिस्ट्रेट एवं नायब तहसीलदार सुरेश कुमार की मौजूदगी में प्रशासनिक अमले ने जमीन की पैमाइश शुरू की। इस दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा ओर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जमीन की पैमाइश की गई। आपको बता दे कि इससे पहले प्रशासन की टीम जब जमीन की निशानदेही करने पहुंची थी तो ग्रामीणों ने कार्रवाई का विरोध किया था। विरोध के चलते उस समय निशानदेही नहीं हो सकी थी। आज प्रशासन ने कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए दोबारा प्रक्रिया शुरू की। इस बार ग्रामीण मौके पर मौजूद रहे, लेकिन किसी प्रकार का विरोध नहीं किया। हांसी सदर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर सदानंद वत्स भी भारी पुलिस टीम के साथ मौके पर मौजूद रहे। ग्रामीणों का दावा है कि संबंधित जमीन पर कई लोग करीब 40 साल से कब्जे में हैं। ग्रामीण राजमल राघव ने बताया कि राजा हरिंदर सिंह फरीदकोट के परिवार और जमीन को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद चल रहा है। उनके अनुसार राजा की एक बेटी अमृत कौर सहित परिवार के वारिसों ने संपत्ति पर अपना हक जताते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। ग्रामीण के मुताबिक, वर्ष 1981 में राजा के बेटे राहुल की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। इसके बाद वर्ष 1982 में संपत्ति को लेकर एक ट्रस्ट बनाया गया। ग्रामीण का आरोप है कि बाद में ट्रस्ट से जुड़े लोगों ने संपत्ति पर मालिकाना हक जताते हुए जमीन की बिक्री शुरू कर दी। ग्रामीण राजमल राघव के अनुसार इस मामले में राजा की बेटियों ने अदालत में केस दायर किया। लंबे समय तक चले मामले में जिला अदालत के बाद हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक मामला पहुंचा। ग्रामीण का दावा है कि अदालतों के फैसलों के बाद ट्रस्ट का अधिकार समाप्त कर दिया गया और संपत्ति में राजा के परिवार के वारिसों का हक माना गया। ग्रामीणों के अनुसार, ढाणा कलां में विवादित जमीन करीब 80 कनाल 17 मरले, यानी लगभग 10 किल्ले बताई जा रही है। ग्रामीण का कहना है कि जमीन के एक बड़े हिस्से पर मकान भी बने हुए हैं और कुछ लोगों के पास जमीन की रजिस्ट्री होने का दावा है। ग्रामीण राजमल राघव ने कहा कि प्रशासन कोर्ट के आदेश पर निशानदेही करने आया है, इसलिए उन्हें प्रशासन की कार्रवाई पर आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले भी प्रशासन की टीम निशानदेही के लिए आई थी, लेकिन विरोध के कारण वापस लौटना पड़ा था। ड्यूटी मजिस्ट्रेट एवं नायब तहसीलदार सुरेश कुमार ने कहा कि प्रशासन की टीम कोर्ट के आदेश पर केवल निशानदेही करने के लिए मौके पर पहुंची है। उन्होंने बताया कि पहले ग्रामीणों ने विवाद किया था, इसलिए लोगों को समझाया गया है कि प्रशासन की कार्रवाई का उद्देश्य फिलहाल सिर्फ जमीन की सीमा निर्धारित करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निशानदेही के दौरान किसी प्रकार की तोड़फोड़ की कार्रवाई नहीं की जाएगी। फिलहाल प्रशासन की ओर से जमीन की पैमाइश और निशानदेही की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जमीन के मालिकाना हक को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद के बीच प्रशासन की यह कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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