भारतीय महिला हॉकी टीम की मिडफील्डर नेहा गोयल शुक्रवार को अपने ससुराल पहुंचीं तो उनका ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य स्वागत किया गया। एशियाई खेलों में भारतीय टीम को स्वर्ण पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाली नेहा की सफलता के पीछे गरीबी, अभाव और वर्षों के संघर्ष की कहानी छिपी है। कभी परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने और मुफ्त जूते व खेल के कपड़े पाने के लिए हॉकी शुरू करने वाली नेहा आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।नेहा ने बताया कि बचपन में उनकी एक सहेली ने उन्हें हॉकी खेलने के लिए प्रेरित किया था। उन्हें पता चला कि मैदान में खेलने वाली लड़कियों को संस्थाओं और प्रशिक्षकों की ओर से मुफ्त जूते और खेल के कपड़े मिलते हैं। उस समय परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे अपनी जरूरतों के लिए नए कपड़े और जूते खरीद सकें। इसी वजह से उन्होंने पहली बार हॉकी स्टिक थामी थी।