कैंट की मोहड़ा अनाज मंडी में रविवार को हुई बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। मंडी प्रशासन के पुख्ता दावों की पोल उस समय खुल गई जब खुले आसमान के नीचे पड़ा किसानों का धान पानी में भीग गया। अचानक शुरू हुई बारिश से बचने के लिए किसानों ने अपनी उपज बचाने की भरपूर जद्दोजहद की। कई किसानों ने खुद के तिरपाल से धान को ढंकने की कोशिश की, तो कुछ ने शेड के नीचे बची-खुची जगह में बोरियां बचाने की भागदौड़ की। इसके बावजूद, अधिकांश किसानों का धान खुले में ही लावारिस हालत में पड़ा रहा। बोरियों के मुंह खुले होने के कारण धान के ढेर पूरी तरह भीग गए। किसानों का कहना है कि उनकी सूखी हुई फसल अब बारिश के पानी में भीग चुकी है। मौसम साफ होने के बाद उन्हें एक बार फिर से धान सुखाने और फटकने की मशक्कत करनी होगी। इस प्रकार धान के भीगने से उसमें नमी की मात्रा बढ़ेगी, जिससे सरकारी खरीद के दौरान उन्हें नुकसान और परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। किसानों ने मंडी प्रशासन से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है।