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Haryana: ई-नेम पर आढ़ती और सरकार आमने-सामने, बने टकराव के हालात, आज से आढ़ती अनिश्चितकालीन हड़ताल पर

Mon, 19 Sep 2022 11:31 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Mon, 19 Sep 2022 11:31 AM IST
सार

इस बार हरियाणा सरकार ने धान के सीजन से उन फसलों की खरीद भी ई-नेम पोर्टल के माध्यम से तय करना सुनिश्चत किया है, जिन फसलों का एमएसपी तय नहीं है। इनमें धान की बासमती किस्म के साथ बागवानी और दालें भी शामिल हैं।

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Haryana govt & agent face to face on E-Name Portal
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल। - फोटो : एएनआई

विस्तार

हरियाणा की मंडियों में धान की फसल आने से पहले ही ई- नेम पोर्टल के माध्यम से खरीद का विरोध होने लगा है। प्रदेश भर के आढ़तियों ने सोमवार से अन्श्चितकालीन हड़ताल पर जाने का ऐलान कर दिया है। वहीं दूसरी ओर हरियाणा के कृषि मंत्री जेपी दलाल ने साफ कर दिया है कि प्रदेश सरकार किसानों के साथ खड़ी है और हर हाल में ई-नेम पोर्टल से ही खरीद की जाएगी। ऐसे में किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें होना स्वाभावित है एक ओर धान की फसल पक कर तैयार है और जल्द ही मंडियों में आनी शुरू हो जाएगी। एक तो अभी सरकारी खरीद शुरू नहीं हुई है, दूसरी ओर यदि आढ़ती भी फसल नहीं खरीदेगें तो किसानों के की परेशानी बढ़नी तय है। 

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इस बार हरियाणा सरकार ने धान के सीजन से उन फसलों की खरीद भी ई-नेम पोर्टल के माध्यम से तय करना सुनिश्चत किया है, जिन फसलों का एमएसपी तय नहीं है। इनमें धान की बासमती किस्म के साथ बागवानी और दालें भी शामिल हैं। इन सभी फसलों की खरीद के लिए गेट पास भी मैनुवली के बजाय ई-नेम पोर्टल से ही काटा जाएगा। इसके अलावा, मंडियों में बासमती धान की खरीद भी ई-ऑक्शन के माध्यम से ई-नेम से की जाएगी। अगर कोई मिलर्स मंडियों में बिना ई-ऑक्शन के खरीद करते पाया गया तो उनके खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। प्रदेशभर के मंडी आढ़ती इसका विरोध कर रहे हैं। हरियाणा आढ़ती एसोसिशन के चेयरमैन रजनीश चौधरी का कहना है कि सरकार ई-नेम पोर्टल के माध्यम से आढ़तियों व किसानों के हितों का हनन कर रही है। ई-नेम पोर्टल के माध्यम से जब किसान अनाज लेकर मंडी में पहुंचेगा तो पहले मार्केट कमेटी उस अनाज की लैब करेगी और उसके बाद पोर्टल पर चढ़ाएगी। इसके बाद पोर्टल से जो भी आढ़ती चाहे वह खरीद सकता है। इससे अनाज उठान में देरी होगी और किसानों को समय पर भुगतान भी नहीं मिल पाएगा। आढ़तियों की मांग है कि ई-नेम के बजाय पहले की तरह मैनुवली फसलों की खरीद की जाए।

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धान पककर तैयार, बढ़ी किसानों की चिंता

धान की फसल लगभग पककर तैयार है। यहां तक की अगेती किस्में तो मंडियों में भी आने लगी है। सरकारी खरीद शुरू नहीं होने के चलते किसानों को कम भाव मिल रहें हैं। भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष रतन मान का कहना है कि प्रदेश सरकार तुरंत प्रभाव से सरकारी खरीद शुरू कराए। साथ ही बोली प्रक्रिया में और पारदर्शिता लाए, ताकि किसानों के साथ गड़बड़ी न हो सके। बता दें कि धान की फसल मुख्य रूप से करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल, पानीपत, अंबाला, फतेहाबाद, सिरसा, जींद आदि जिलों में होती है। 

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हरियाणा सरकार ने किसानों के हितों में फैसले लिए हैं। पहले किसानों के सीधे खाते में पैसे डालने का फैसला लिया और अब ई-नेम से खरीद का फैसला भी किसानों के हित में हैं। इस पोर्टल के माध्यम से खरीद होने से मंडियों में और पारदर्शिता आएगी और किसानों को इसका लाभ मिलेगा। आढ़तियों को हड़ताल नहीं बल्कि बातचीत करनी चाहिए, ताकि खरीद सुचारू हो सके।

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