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अध्ययन: धूम्रपान का असर सिर्फ पीने वाले तक सीमित नहीं, आसपास के लोगों पर भी पड़ता है असर

Thu, 24 Sep 2026 07:34 PM IST
Media Solutions Initiative Published by: मार्केटिंग डेस्क Updated Thu, 24 Sep 2026 07:34 PM IST
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Study: impact of smoking is not limited to smoker alone; it also affects those nearby
धूम्रपान। - फोटो : अमर उजाला

सिगरेट का धुआं केवल धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के स्वास्थ्य को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि उसके आसपास मौजूद लोगों पर भी इसका असर पड़ सकता है। गोवा स्थित महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय की ओर से किए गए एक प्रयोग में धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के संपर्क में आने वाले गैर-धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के आध्यात्मिक ऊर्जा स्तर और प्रभामंडल में बदलाव का दावा किया गया है। यह जानकारी 26 सितंबर को मनाए जाने वाले विश्व पर्यावरण स्वास्थ्य दिवस के संदर्भ में साझा की गई है।

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विश्वविद्यालय के वरिष्ठ शोध दल की सदस्य डॉ. (श्रीमती) नंदिनी सामंत के अनुसार, प्रयोग का उद्देश्य यह अध्ययन करना था कि धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के पास रहने से गैर-धूम्रपान करने वाले व्यक्ति पर क्या प्रभाव पड़ता है। इसके लिए एक गैर-धूम्रपान करने वाले व्यक्ति को सिगरेट पी रहे व्यक्ति से करीब 1 से 1.5 फीट की दूरी पर खड़ा किया गया। धूम्रपान करने वाले व्यक्ति ने इस दौरान सिगरेट के आठ कश लिए।
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प्रयोग से पहले और बाद में 'बायो-वेल' उपकरण तथा 'ऑरा और ऊर्जा मापक यंत्र' की मदद से गैर-धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के सात कुंडलिनी चक्रों और प्रभामंडल की रीडिंग ली गई। विश्वविद्यालय के अनुसार, प्रयोग शुरू होने से पहले आज्ञा, विशुद्ध, मणिपुर, स्वाधिष्ठान और मूलाधार चक्र मध्य रेखा पर स्थित थे, जिसे अध्ययन में आध्यात्मिक दृष्टि से अनुकूल स्थिति माना गया।
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शोधकर्ताओं के मुताबिक, धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के संपर्क में आने के करीब 10 मिनट बाद सातों चक्रों के आकार में वृद्धि और उनके मध्य रेखा से दूर होने का बदलाव दर्ज किया गया। 20 और 35 मिनट बाद की रीडिंग में भी ऐसे बदलाव बने रहने का दावा किया गया।

अध्ययन में यह भी कहा गया है कि धूम्रपान के संपर्क के बाद गैर-धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के नकारात्मक ऊर्जा वाले प्रभामंडल में लगातार वृद्धि दर्ज की गई। शोधकर्ताओं के अनुसार, व्यक्ति के कुछ समय बाद उस स्थान से चले जाने के बावजूद ये बदलाव कुछ समय तक दिखाई दिए।


विश्वविद्यालय ने कहा कि पर्यावरणीय स्वास्थ्य का संबंध केवल बाहरी प्रदूषण से नहीं है, बल्कि घर, कार्यस्थल और सार्वजनिक स्थानों पर हवा की गुणवत्ता से भी है। संगठन ने धूम्रपान छोड़ने और आसपास के लोगों को धुएं से बचाने की अपील की है। हालांकि, इस प्रयोग में बताए गए 'ऊर्जा' और 'प्रभामंडल' संबंधी निष्कर्षों को पारंपरिक चिकित्सा विज्ञान के स्थापित प्रमाणों से अलग संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

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