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...तो एक बार फिर रौद्र रूप दिखाएगी गंगा
Badaun
Updated Wed, 03 Jul 2013 05:31 AM IST
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जुलाई, अगस्त, सितंबर में मचती है तबाही
फिलहाल स्थिति शांत पर कायम है खतरा
बदायूं। फिलहाल शांत दिख रही गंगा फिर से रौद्र रूप में दिखाई देगी। बाढ़ खंड का रिकॉर्ड इस बात की तस्दीक करता है कि गंगा और रामगंगा ने जिले में तबाही मचाने के लिए अगस्त और सितंबर के महीनों को ही चुना है। फिलहाल नरौरा बैराज से वाटर डिस्चार्ज कम होने से गंगा का जलस्तर घटा जरूर है लेकिन बाढ़ खंड का रिकॉर्ड देखकर यह कहना मुश्किल है कि हालात सामान्य ही रहेंगे। 2010, 11 और 2012 में गंगा का रौद्र रूप जुलाई, अगस्त और सितंबर के महीनों में ही दिखा है। इन महीनों में गंगा का जलस्तर मीटर गेज पर खतरे के निशान को छूता रहा है। जिले की सदर सहित दातागंज और सहसवान तहसीलों के सैकड़ों गांव हर साल बाढ़ का दंश झेलते हैं। पिछले पांच साल में यह पहला मौका है कि जून के पहले सप्ताह में ही गंगा ने तबाही मचा दी। करीब एक सप्ताह तक उफान पर रहने के बाद गंगा शांत जरूर हो गई लेकिन बाढ़ खंड के रिकॉर्ड पर गौर करें तो खतरा अभी कायम है। गंगा ने सबसे ज्यादा कहर अगस्त और सितंबर के महीनों में ही बरपाया है। 2010 के सितंबर महीने में गंगा के उफान ने 30 साल पुराने रिकॉर्ड को तोड़ दिया था। बाढ़ खंड का रिकॉर्ड इसकी तस्दीक करता है कि सितंबर 2010 में नरौरा बैराज से गंगा में रोजाना औसतन 2.50 लाख क्यूसेक वाटर डिस्चार्ज हुआ था। इस दौरान 21 से 26 सितंबर तक रोजाना चार से पांच लाख क्यूसेक पानी नरौरा बैराज से गंगा में छोड़ा गया था। उस समय जिले में बाढ़ से भारी तबाही हुई थी।
वर्ष 2011 के जून और जुलाई में गंगा लगातार शांत रही। अगस्त महीने में करीब 25 और सितंबर के दस दिन नरौरा बैराज से वाटर डिस्चार्ज एक लाख क्यूसेक से ऊपर पहुंचा था। अगस्त में ही पांच दिन ऐसे आए जब नरौरा से छोड़े जाने वाला पानी तीन लाख क्यूसेक के पार हो गया। हालांकि 2012 में गंगा ने ज्यादा तबाही नहीं मचाई। कई साल के बाद यह पहला मौका है जब जून महीने के पहले सप्ताह गंगा में उफान आया और फिर गंगा शांत हो गईं।
इंसेट-
नरौरा से 1.50 लाख क्यूसेक वाटर डिस्चार्ज
नरौरा बैराज से गंगा में पानी डिस्चार्ज कम होने से स्थिति लगातार सामान्य हो रही है। बाढ़ ग्रस्त गांवों में पानी उतरने से अब लोग घर वापसी की तैयारी में हैं। मंगलवार को नरौरा बैराज से गंगा में 1.50 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। कछला में गंगा का मीटर गेज 163.20 के आस-पास बना हुआ है। हालांकि तीन दिन पहले तक मीटर गेज के 163.50 के आस पास गंगा बह रही थीं। अब जल स्तर कम होने से कटान का कतरा और बाढ़ग्रस्त गांवों में संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
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फिलहाल स्थिति शांत पर कायम है खतरा
बदायूं। फिलहाल शांत दिख रही गंगा फिर से रौद्र रूप में दिखाई देगी। बाढ़ खंड का रिकॉर्ड इस बात की तस्दीक करता है कि गंगा और रामगंगा ने जिले में तबाही मचाने के लिए अगस्त और सितंबर के महीनों को ही चुना है। फिलहाल नरौरा बैराज से वाटर डिस्चार्ज कम होने से गंगा का जलस्तर घटा जरूर है लेकिन बाढ़ खंड का रिकॉर्ड देखकर यह कहना मुश्किल है कि हालात सामान्य ही रहेंगे। 2010, 11 और 2012 में गंगा का रौद्र रूप जुलाई, अगस्त और सितंबर के महीनों में ही दिखा है। इन महीनों में गंगा का जलस्तर मीटर गेज पर खतरे के निशान को छूता रहा है। जिले की सदर सहित दातागंज और सहसवान तहसीलों के सैकड़ों गांव हर साल बाढ़ का दंश झेलते हैं। पिछले पांच साल में यह पहला मौका है कि जून के पहले सप्ताह में ही गंगा ने तबाही मचा दी। करीब एक सप्ताह तक उफान पर रहने के बाद गंगा शांत जरूर हो गई लेकिन बाढ़ खंड के रिकॉर्ड पर गौर करें तो खतरा अभी कायम है। गंगा ने सबसे ज्यादा कहर अगस्त और सितंबर के महीनों में ही बरपाया है। 2010 के सितंबर महीने में गंगा के उफान ने 30 साल पुराने रिकॉर्ड को तोड़ दिया था। बाढ़ खंड का रिकॉर्ड इसकी तस्दीक करता है कि सितंबर 2010 में नरौरा बैराज से गंगा में रोजाना औसतन 2.50 लाख क्यूसेक वाटर डिस्चार्ज हुआ था। इस दौरान 21 से 26 सितंबर तक रोजाना चार से पांच लाख क्यूसेक पानी नरौरा बैराज से गंगा में छोड़ा गया था। उस समय जिले में बाढ़ से भारी तबाही हुई थी।
वर्ष 2011 के जून और जुलाई में गंगा लगातार शांत रही। अगस्त महीने में करीब 25 और सितंबर के दस दिन नरौरा बैराज से वाटर डिस्चार्ज एक लाख क्यूसेक से ऊपर पहुंचा था। अगस्त में ही पांच दिन ऐसे आए जब नरौरा से छोड़े जाने वाला पानी तीन लाख क्यूसेक के पार हो गया। हालांकि 2012 में गंगा ने ज्यादा तबाही नहीं मचाई। कई साल के बाद यह पहला मौका है जब जून महीने के पहले सप्ताह गंगा में उफान आया और फिर गंगा शांत हो गईं।
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नरौरा से 1.50 लाख क्यूसेक वाटर डिस्चार्ज
नरौरा बैराज से गंगा में पानी डिस्चार्ज कम होने से स्थिति लगातार सामान्य हो रही है। बाढ़ ग्रस्त गांवों में पानी उतरने से अब लोग घर वापसी की तैयारी में हैं। मंगलवार को नरौरा बैराज से गंगा में 1.50 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। कछला में गंगा का मीटर गेज 163.20 के आस-पास बना हुआ है। हालांकि तीन दिन पहले तक मीटर गेज के 163.50 के आस पास गंगा बह रही थीं। अब जल स्तर कम होने से कटान का कतरा और बाढ़ग्रस्त गांवों में संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
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