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ओपन डेज में वैक्सीन लेने के बाद युवती की मौत से इटली में बड़ा विवाद, द्राघी सरकार पर निशाना

Thu, 24 Jun 2021 03:05 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, रोम
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, रोम Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 24 Jun 2021 03:05 PM IST
सार

कैमिला की मौत दिमाग की नस फटने (ब्रेन हैमरेज) के कारण हुई। उससे पहले 16 दिन तक वह बीमार रही। यह भी सामने आया कि कैमिला ऑटो-इम्यून नाम की बीमारी से पीड़ित थी। ऐसे लोगों को टीका लगाना सुरक्षित नहीं माना जाता है...

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young woman died after taking AstraZeneca corona vaccine has turned into a major political controversy in Italy
प्रधानमंत्री मारियो द्राघी - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

इटली में एस्ट्राजेनेका की कोरोना वैक्सीन लेने के बाद एक युवती की मौत एक बड़े सियासी विवाद में तब्दील हो गई है। देश की दक्षिणपंथियों पार्टियों ने इस घटना को लेकर प्रधानमंत्री मारियो द्राघी की सरकार पर हमला बोल दिया है। इटली में वैक्सीन के जो डोज पहले से तय कार्यक्रम के मुताबिक नहीं लगाए जाते हैं, उनका उपयोग करने के लिए अधिकारी अलग कैंप लगाते हैं। उस दौरान आए हर किसी व्यक्ति को टीका लगा दिया जाता है। हालांकि संघीय सरकार ने ये चलन बंद करने की सलाह दी थी, लेकिन कई राज्यों में इसे अभी भी चलाया जा रहा है। इसे ओपन डेज कहा जाता है।

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कैमिला कनेपा नाम की एक 18 वर्षीय युवती को ऐसे ही ओपन डेज में टीका लगाया गया था। लिगुरिया क्षेत्र में टीका लेने के तुरंत बाद वह बीमार हो गई। बीते नौ जून को उसकी मृत्यु हो गई। कैमिला की पोस्ट मॉर्टम रिपोर्ट मृत्यु के लगभग दो हफ्तों के बाद जारी की गई है। उससे पता चला कि कैमिला की मौत दिमाग की नस फटने (ब्रेन हैमरेज) के कारण हुई। उससे पहले 16 दिन तक वह बीमार रही। यह भी सामने आया कि कैमिला ऑटो-इम्यून नाम की बीमारी से पीड़ित थी। ऐसे लोगों को टीका लगाना सुरक्षित नहीं माना जाता है। टीका लगाने वाले अधिकारियों ने बाद में सफाई दी कि उन्हें कैमिला की स्वास्थ्य संबंधी स्थिति के बारे में पहले से जानकारी नहीं थी।
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अब विपक्ष ने मुद्दा यह बनाया है कि टीकाकरण बिना स्पष्ट दिशा-निर्देशों के हो रहा है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि कैमिला की मौत की खबर से इटली की जनता में भारी गुस्सा पैदा हुआ। उसे देशभर में श्रद्धांजलि दी जा रही है। दक्षिणपंथी पार्टियां इसी जन भावना का लाभ उठाने की कोशिश कर रही हैँ।
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जानकारों का कहना है कि एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन को लेकर यूरोप में कई तरह की चर्चाएं रही हैं। अब टीका से एक युवती की मौत ने इस वैक्सीन को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। धुर दक्षिणपंथी लीग पार्टी के नेता मातियो सालविनी ने आरोप लगाया है कि देश में 12 साल की उम्र तक के बच्चों पर इस वैक्सीन के प्रयोग किए जा रहे हैं। उन्होंने एक टीवी डिबेट के दौरान पूछा कि आखिर इस तरह टीका लगाने की इजाजत किसने दी है। सालविनी ने इल्जाम लगाया कि द्राघी सरकार महामारी को संभालने और टीकाकरण अभियान चलाने में अक्षम साबित हुई है।

वेबसाइट पॉलिटिको.कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक एस्ट्राजेनेका के वैक्सीन को लेकर इटली में शुरुआत से विवाद रहा है। आरंभ में सरकार ने इसे सिर्फ 55 साल से ऊपर के लोगों को लगाने की इजाजत दी थी। फिर ऐसी खबरें फैलीं कि ये टीका लगने के बाद खून के थक्के जम जाते हैं, जिससे मौतें हो रही हैं। ऐसी खबरें दूसरे यूरोपीय देशों से भी आई थीं, जहां कुछ समय के लिए इस टीके पर रोक लगाई गई। बाद में यूरोपियन मेडिकल एजेंसी ने इसे हरी झंडी दी।


इटली में एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की सप्लाई पर्याप्त रही है। जानकारों का कहना है कि इसीलिए कुछ क्षेत्रीय प्रशासन ओपन डेज स्कीम चला रहे हैं। अब कैमिला की मौत ने ऐसे योजनाओं को कठघरे में खड़ा कर दिया है। साथ ही एस्ट्राजेनेका के टीके को लेकर पहले से जारी विवाद में एक नया पहलू जोड़ दिया है।

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