फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   WMO warns 2024 on track to become hottest year ever

Report: 2024 अब तक का सबसे गर्म साल बनने की राह पर, डब्ल्यूएमओ ने जारी की चेतावनी

Tue, 12 Nov 2024 02:30 AM IST
दीपक कुमार शर्मा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बाकू
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बाकू Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Tue, 12 Nov 2024 02:30 AM IST
सार

संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (कॉप-29) के उद्घाटन दिवस पर विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ ने एक रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट के जरिये डब्ल्यूएमओ ने चेतावनी जारी की है कि साल 2024 अब तक का सबसे गर्म वर्ष बनने की राह पर है। इस दौरान वैश्विक तापमान एक अभूतपूर्व स्तर तक बढ़ सकता है। 

विज्ञापन
WMO warns 2024 on track to become hottest year ever
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

विस्तार

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने चेतावनी जारी की है कि साल 2024 अब तक का सबसे गर्म वर्ष बनने जा रहा है। इस दौरान वैश्विक तापमान एक अभूतपूर्व स्तर तक बढ़ सकता है। यह चेतावनी संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (कॉप-29) के उद्घाटन दिवस पर जारी एक रिपोर्ट के जरिये दी गई।

विज्ञापन


रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से सितंबर तक वैश्विक औसत सतह तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.54 डिग्री सेल्सियस अधिक था। यह तापमान वृद्धि अल नीनो घटना और बढ़ते ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के कारण हो रही है, जो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को और भी गंभीर बना रहे हैं। 
विज्ञापन


'जलवायु की स्थिति 2024' शीर्षक वाली रिपोर्ट, ग्लोबल वार्मिंग से उत्पन्न बढ़ते खतरों पर प्रकाश डालती है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि 'जलवायु आपदाएं स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रही हैं, असमानताएं बढ़ा रही हैं, विकास को नुकसान पहुंचा रही हैं, और शांति के लिए खतरा पैदा कर रही हैं।' उन्होंने इन बदलावों से प्रभावित लोगों की सुरक्षा के लिए तुरंत जलवायु कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


रिपोर्ट की एक प्रमुख खोज अभूतपूर्व तापमान वृद्धि को दर्शाती है। 2024 के पहले नौ महीनों में वैश्विक औसत तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.54 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था, जो अस्थायी रूप से पेरिस समझौते में निर्धारित 1.5 डिग्री सेल्सियस के लक्ष्य को पार कर गया। हालांकि, लंबे समय में तापमान वृद्धि 1.3 डिग्री सेल्सियस के आसपास बनी हुई है, विशेषज्ञों ने चेतावनी जारी कि है कि डिग्री का प्रत्येक अंश चरम मौसम की घटनाओं की तीव्रता और जलवायु जोखिमों को बढ़ाता है। 

समुद्री जीवन और तटीय समुदायों पर पड़ेगा दीर्घकालिक प्रभाव
रिपोर्ट के अनुसार, समुद्र की गर्मी भी बढ़ी है, जो 2023 में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंची और 2024 में भी कम होने का कोई संकेत नहीं दिखा रहा है। महासागरों ने ग्लोबल वार्मिंग से उत्पन्न 90 फीसदी अतिरिक्त ऊर्जा को अवशोषित कर लिया है, जिससे समुद्री जीवन और तटीय समुदायों पर दीर्घकालिक असर पड़ेगा। साथ ही, समुद्र का बढ़ता तापमान चरम मौसम की घटनाओं को और भी बढ़ा रहा है।  

ग्लेशियरों के पिघलने से समुद्र का स्तर भी दोगुना तेजी से बढ़ रहा है। डब्ल्यूएमओ की रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में ग्लेशियरों ने रिकॉर्ड 1.2 मीटर पानी खो दिया। स्विट्जरलैंड में, केवल दो सालों में ग्लेशियरों ने अपनी शेष मात्रा का लगभग 10 फीसदी पानी खो दिया। ये बदलाव पर्वतीय और ध्रुवीय क्षेत्रों पर असर डाल रहे हैं, जिनमें जलवायु अनुकूलन की तत्काल जरूरत है।  

चरम मौसम की घटनाओं से सतत विकास में आ रही बाधाएं  
डब्ल्यूएमओ ने जलवायु परिवर्तन को घातक हीटवेव, गंभीर बाढ़, उष्णकटिबंधीय तूफान और लगातार सूखा जैसी चरम मौसम घटनाओं के लिए जिम्मेदार ठहराया है। इन घटनाओं के कारण आर्थिक नुकसान, खाद्य असुरक्षा और जबरन प्रवासन हो रहा है, जिससे मानव पीड़ा और सतत विकास में बाधाएं आ रही हैं।  

ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन से वायुमंडलीय तापमान में हो सकती है वृद्धि
ग्रीनहाउस गैस की सांद्रता 2023 में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई, जिसमें CO2 की मात्रा 420 भाग प्रति मिलियन तक पहुंच गई, जो पूर्व-औद्योगिक स्तर से 51 फीसदी अधिक है। यह प्रवृत्ति 2024 तक बने रहने की संभावना है, जिससे वायुमंडलीय तापमान में और वृद्धि हो सकती है।  

ध्रुवीय क्षेत्रों में परिवर्तन से बर्फ की मात्रा में गिरावट
ध्रुवीय बर्फ की मात्रा में भी गिरावट आई है। 2024 में, अंटार्कटिक समुद्री बर्फ की मात्रा रिकॉर्ड के बाद से दूसरी सबसे कम थी, जबकि आर्कटिक क्षेत्र में भी बर्फ की मात्रा में गिरावट देखी गई। यह ध्रुवीय बर्फ का नुकसान जलवायु परिवर्तन के फीडबैक लूप को तेज कर रहा है, जिससे मौसम पैटर्न और पारिस्थितिकी तंत्र पर व्यापक असर पड़ता है। 


जलवायु अनुकूलन की आवश्यकता पर जोर  
डब्ल्यूएमओ के महासचिव सेलेस्टे सौलो ने जलवायु अनुकूलन की जरूरत पर जोर दिया, खासकर उन समुदायों के लिए जो जलवायु आपदाओं से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। इसके लिए (ईडब्ल्यू4ऑल) जैसी पहल शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य उन समुदायों को चरम मौसम की घटनाओं से बचाने के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली उपलब्ध कराना है। इस पहल के हिस्से के रूप में, अब तक 108 देशों ने मल्टी-हैज़र्ड अर्ली वार्निंग सिस्टम अपनाया है, जिससे कमजोर समुदायों में लचीलापन बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। 


 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed