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क्या भूकंप से टूटा ग्लेशियर?: नेपाल में आई विनाशकारी त्रासदी की वजह पर उठने लगे सवाल, जानें किसने क्या कहा

Thu, 27 Aug 2026 12:40 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Thu, 27 Aug 2026 12:40 PM IST
सार

नेपाल बाढ़ ने हर किसी को हैरान कर दिया है। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) ने दावा किया है कि जिस भूकंपीय हलचल को पहले भूकंप माना गया था, वह असल में ग्लेशियर के टूटने और मलबे के बहाव से पैदा हुई थी। आखिर नेपाल में तबाही की असली वजह क्या थी? इसे लेकर किसने क्या कहा? पढ़ें पूरी खबर
 

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Did earthquake cause glacier break Questions  regarding devastating tragedy Nepal different people have said
नेपाल बाढ़ की वजह क्या? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

नेपाल में बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।  शुरुआत में नेपाल की ओर से दावा किया गया कि भूकंप के झटकों से ग्लेशियर टूटा और फिर बाढ़ ने तबाही मचा दी।वहीं, अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) की नई रिपोर्ट ने दावा किया कि बाढ़ ग्लेशियर के ढहने के कारण आई थी, ना कि 4.4 तीव्रता के भूकंप के कारण जैसा कि पहले बताया गया था। 

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बता दे कि बुधवार को तिब्बत से शुरू हुई अचानक आई बाढ़ ने नेपाल के रसुवा और धाडिंग जिलों में मौत और विनाश का तांडव मचा दिया, जिसमें 162 लोग मारे गए और 133 भारतीय नागरिकों सहित 750 लोग लापता हो गए।
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यूएसजीएस ने क्या कहा? 
यूएसजीएस ने कहा कि लंबे समय तक चलने वाली भूकंपीय लहरों के और विश्लेषण से पता चला कि ये झटके ग्लेशियर के ढहने और मलबे के बहाव के कारण आए थे। यूएसजीएस ने इस घटना के बारे में अपने अपडेट में कहा, 'शुरुआत में इस घटना को 4.4 तीव्रता का भूकंप बताया गया था।



आस-पास के सिस्मिक स्टेशनों, लंबी अवधि वाली सिस्मिक तरंगों और सैटेलाइट तस्वीरों के और विश्लेषण से यह पता चला कि यह भूकंप नहीं, बल्कि ग्लेशियर के ढहने और मलबे के बहाव की घटना थी।' साथ ही, एजेंसी ने इस सिस्मिक घटना की तीव्रता को पहले बताए गए 4.4 से बढ़ाकर 5.2 कर दिया।

कनाडा की यूनिवर्सिटी ने क्या कहा? 
इसमें कहा गया है, 'यूएसजीएस ने पता लगाया कि भूकंप जैसी यह घटना ग्लेशियर के ढहने और मलबे के बहाव की वजह से हुई थी, जिसके कारण आगे चलकर नदी के निचले इलाकों में भारी तबाही मची।' कनाडा की कैलगरी यूनिवर्सिटी में जियोमॉर्फोलॉजी के एसोसिएट प्रोफेसर डैनियल शुगर ने बताया कि अचानक आई बाढ़ की वजह एक ग्लेशियर था, जो 5,200 मीटर की ऊंचाई वाली चट्टान से नीचे गिरा था।

सैटेलाइट तस्वीरों की तुलना कर क्या कहा? 
शुगार ने नेपाल में प्राकृतिक आपदा आने से एक दिन पहले, बुधवार और मंगलवार को ली गई क्षेत्र की उपग्रह तस्वीर की तुलना की। न्यू साइंटिस्ट पत्रिका ने शुगार के हवाले से कहा, 'कल और आज की सैटेलाइट तस्वीरों की तुलना करने पर, ऐसा लगाता है कि आसपास के ग्लेशियरों ने पिछले 24 घंटों में काफी बर्फ खो दी है। 

उन्होंने कहा, 'मेरा अनुमान है कि बर्फ पिघलने और ग्लेशियर की बर्फ पिघलने से ग्लेशियर में काफी मात्रा में तरल पानी आ गया, जो नीचे तल तक रिसकर उसे चिकना कर दिया। इतना पानी ही ग्लेशियर के ढहने के लिए काफी था।'



नेपाल ने क्या दावा किया? 
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद को बताया कि बुधवार सुबह स्थानीय समय के अनुसार 8.37 बजे तिब्बत क्षेत्र में भूकंप आया था। इसके करीब तीन मिनट बाद बाढ़ की सूचना मिली। इससे आशंका जताई जा रही है कि भूकंप के झटकों से ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट यानी हिमनद झील फटने की घटना हुई हो, जिससे अचानक भारी मात्रा में पानी नीचे की ओर आया। 

कितने भारतीय लापता है? 
वहीं, नेपाल के विदेश मंत्री खनाल ने गुरुवार को कहा कि बाढ़ में लापता हुए हजारों लोगों में लगभग 300 भारतीय भी शामिल हैं। एनडीटीवी के अनुसार, खनाल ने कहा,' हजारों परिवारों के घर उजड़ गए हैं। वे अभी लापता हैं। हम अभी भी इस आपदा के पूरे असर का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।

भारतीय दूतावास ने इमरजेंसी नंबर जारी की
बुधवार को काठमांडू में भारतीय दूतावास ने अचानक आई बाढ़ से प्रभावित भारतीय नागरिकों की मदद और जानकारी के लिए इमरजेंसी नंबर जारी किए। एक्स पर एक पोस्ट में कहा गया कि लोग +977 985 131 6807 या +977 970 910 7500 पर संपर्क कर सकते हैं।

 


 

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