अफगानिस्तान में परिवार करता रहा टेस्ट रिपोर्ट का इंतजार और कोरोना से हो गई कई मौतें
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कोरोना वायरस की वजह से दुनियाभर की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी दबाव पड़ा है। इस वैश्विक महामारी ने विकसित देशों पर तो प्रभाव छोड़ा ही है, छोटे और युद्ध प्रभावित देशों की स्थिति भी भयावह हो गई है। फिलहाल अफगानिस्तान से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने अफगानिस्तान के स्वास्थ्य व्यवस्था की दयनीय स्थिति को उजागर कर दिया है। खबर के मुताबिक कोरोना के लक्षण वाले मरीज का इलाज करने वाले डॉ. यूसुफ अर्यूबी और उनके दो बच्चों की मौत हो गई और परिवार के कई सदस्य कोरोना से संक्रमित हो गए।
डॉक्टर यूसुफ के छोटे भाई बिथारिन पख्तियावाल के मुताबिक उनके भाई ने रात के खाने पर परिवार से बताया था कि उनके मरीज को खांसी और तेज बुखार था, जिसकी वजह से वो चिंतित थे। उसके कुछ दिन बाद ही उन्हें और उनके बच्चों को भी बुखार और खांसी होने लगी, लेकिन परिवार ने इसे एक आम फ्लू की तरह लिया और बुखार की दवा खाकर निश्चिंत हो गए।
लेकिन एक हफ्ते के बाद ही डॉ. यूसुफ और उनके दो बच्चों की मौत हो गई और परिवार के कई सदस्य बीमार पड़ने लगे, इसके बाद जांच में पता चला कि यूसुफ कोरोना से संक्रमित थे और उनका परिवार भी उसके प्रभाव में आ गया।
दरअसल, अर्यूबी परिवार काबुल के एक मध्यमवर्गीय जिले में एक ही इमारत में रहता है, डॉ. यूसुफ एक 53 वर्षीय बाल रोग विशेषज्ञ हैं, जो कुल 34 लोगों वाले परिवार के साथ रहते हैं।आर्युबी को रोगी से मिलने के एक दिन बाद 30 मार्च, सोमवार को हल्का बुखार महसूस हुआ। इसके बाद बुधवार तक उनकी स्थिति बदतर हो गई और उनकी सबसे छोटी बेटी, 21 वर्षीय मरियम को भी बुखार हो गया।
यह देखकर पख्तियावाल ने उन्हें और मरियम को मास्क और दस्ताने पहनाए और पास के अफगान-जापान संचारी रोग अस्पताल ले गए, जो काबुल के कोरोनो वायरस परीक्षण और उपचार की दो केंद्रों में से एक है। पख्तियावाल ने कहा, 'अस्पताल ने 24 घंटे के भीतर हमें फोन करने का वादा किया था और कहा था कि अगर परिणाम पॉजिटिव आया तो उन्हें पृथक करने के लिए एक एम्बुलेंस भेजेंगे।'
लेकिन गुरुवार तक अस्पताल से कोई कॉल नहीं आया, इसलिए उन्होंने परीक्षण को नेगेटिव मान लिया। इसके बाद आर्युबी और मरियम एक निजी क्लिनिक में गए, जहां डॉक्टर ने उन्हें फ्लू बताकर पैरासिटामोल दिया। इसके बाद पख्तियावाल के मुताबिक पूरा परिवार साथ बैठकर खाना खाने लगा लेकिन एक हफ्ते के बाद फिर सभी में वही लक्षण दिखने लगे और हर कोई खांसी और तेज बुखार से प्रभावित होने लगा। यह देखकर मैं दोबारा से अफगानिस्तान-जापान अस्पताल गया और वहां जाकर कोरोना मरीजों की लिस्ट देखी जिसमें उनके भाई को कोरोना से संक्रमित बताया गया था। इसके बाद उन्होंने परिवार के सभी 34 सदस्यों को अस्पताल पहुंचाया और उनकी जांच करवाई। हालांकि वे अपने भाई को नहीं बचा पाए।