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Myanmar: म्यांमार के मुद्दे पर क्या अब प्रभावी पहल कर पाएगा आसियान? दबाव बनाने में रहा नाकाम

Wed, 19 Apr 2023 05:15 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यंगून
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यंगून Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 19 Apr 2023 05:15 PM IST
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सार
Myanmar: अगली शिखर बैठक के साथ इंडोनेशिया आसियान की अध्यक्ष बनेगा। समझा जाता है कि वर्तमान अध्यक्ष कंबोडिया का म्यांमार के सैनिक शासकों के प्रति रुख नरम रहा है। इसके पीछे एक कारण कंबोडिया के चीन से करीबी रिश्तों को भी माना गया है...
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Will ASEAN be able to take effective initiative on the issue of Myanmar
आसियान शिखर सम्मेलन - फोटो : ANI (File Photo)

विस्तार

म्यांमार के मुद्दे पर दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संघ आसियान में मतभेद जारी रहने से यहां के सैनिक शासकों को लगातार राहत मिली हुई है। म्यांमार भी दस देशों के इस संघ का सदस्य है। हालांकि फरवरी 2021 में म्यांमार में सैनिक तख्ता पलट होने के बाद आसियान ने म्यांमार से संपर्क सीमित रखा है। इसके बावजूद आसियान किसी सख्त कार्रवाई पर फैसला करने में नाकाम रहा है। अब यहां के कूटनीतिक हलकों की नजर आसियान की अगली शिखर बैठक पर है।

अगली शिखर बैठक के साथ इंडोनेशिया आसियान की अध्यक्ष बनेगा। समझा जाता है कि वर्तमान अध्यक्ष कंबोडिया का म्यांमार के सैनिक शासकों के प्रति रुख नरम रहा है। इसके पीछे एक कारण कंबोडिया के चीन से करीबी रिश्तों को भी माना गया है। माना जाता है कि यहां के सैनिक शासकों को चीन का समर्थन हासिल है।

अगला आसियान शिखर सम्मेलन छह से 10 मई तक इंडोनेशिया में होगा। इस बीच म्यांमार में राजनीतिक हिंसा बढ़ती जा रही है। सेना और सैनिक शासन विरोधी गुटों के बीच देश के विभिन्न क्षेत्रों में लड़ाई चल रही है। इसे देखते हुए आसियान के कई सदस्य देशों की राय है कि अब इस संस्था को अधिक स्पष्ट रुख तय करना चाहिए।

लेकिन पर्यवेक्षकों के मुताबिक आसियान के अंदर मतभेद के कुछ बुनियादी पहलू हैं। इस गुट के सदस्य अलग-अलग देश भी अमेरिका और चीन के प्रति अपनी झुकावों के कारण म्यांमार जैसे मुद्दों पर अलग-अलग रुख रखते आए हैं। इसके अलावा मानव अधिकार और शऱणार्थी समस्या जैसे मसलों पर भी उनके बीच आम सहमति नहीं है। इन सब कारणों से म्यांमार के सैनिक शासकों पर दबाव बनाने में आसियान नाकाम रहा है। अगले शिखर सम्मेलन के बाद भी स्थिति बहुत बदलेगी, इसकी संभावना नहीं है।

बैंकाक स्थित चुलालोंगकोर्ण यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय संबंध विषय के प्रोफेसर थितिनन पोंगसुधिराक ने कहा है कि नई बन रही जमीनी स्थितियां आसियान पर हावी हो गई हैं। वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से बातचीत में उन्होंने कहा- ‘अब आसियान को या तो फिर से खुद को संगठित करना होगा, यह फिर यह संगठन अप्रसांगिक हो जाएगा और लोग इसका मखौल उड़ाएंगे।’  

म्यांमार में तख्ता पलट होने के बाद आसियान ने वहां की स्थिति से निपटने के लिए पांच सूत्रीय सहमति तैयार की थी। उसके तहत सैनिक शासकों से हिंसा तुरंत रोकने को कहा गया था। लेकिन सैनिक शासकों ने इसकी कोई परवाह नहीं की। बीते 11 अप्रैल को इस सहमति फॉर्मूले के अस्तित्व में आए दो साल पूरा हो गए। लेकिन इससे म्यांमार में कुछ हासिल नहीं हुआ है। बल्कि देश के अंदर हिंसा बढ़ती चली गई है।

इसलिए आसियान के अगले शिखर सम्मेलन को इस संस्था के साथ-साथ नए अध्यक्ष इंडोनेशिया के लिए भी एक अग्नि-परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो ने अंतरराष्ट्रीय मामलों में अपनी प्रभावी मध्यस्थ की छवि बनाई है। विडोडो के राष्ट्रपति कार्यकाल का यह आखिरी वर्ष भी है। इसलिए यह पूछा जा रहा है कि क्या वे अपनी ये काबिलियत म्यांमार के मामले में भी दिखा पाएंगे?

 

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