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China: पाकिस्तानी आतंकियों को क्यों बचाता है चीन, वैश्विक आतंकी घोषित होता तो हाफिज सईद के बेटे का क्या होता?

Thu, 20 Oct 2022 04:10 PM IST
हिमांशु मिश्रा स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु मिश्रा Updated Thu, 20 Oct 2022 04:10 PM IST
सार

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, जब चीन ने पाकिस्तानी आतंकियों का बचाव किया हो। इसके पहले भी चार दफा ऐसा हो चुका है। आखिर चीन क्यों इन आतंकवादियों के पीछे ढाल बनकर खड़ा हुआ है? ये आतंकवादी कौन-कौन हैं? आइए समझते हैं...

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Why China protects Pakistani terrorists, what happened to Hafiz Saeed's son if he declared a global terrorist?
भारत-पाकिस्तान, चीन और अमेरिका - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के बेटे हाफिज तल्हा सईद को प्रतिबंधित आतंकियों की सूची में डालने के प्रस्ताव पर चीन ने एक बार फिर अड़ंगा लगा दिया है। संयुक्त राष्ट्र में 1267 प्रतिबंध व्यवस्था के तहत आंतकियों को प्रतिबंधित किया जाता है। इसी के तहत आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के हाफिज तल्हा सईद को वैश्विक आतंकी की सूची में डालने के लिए भारत और अमेरिका ने बुधवार को प्रस्ताव रखा था। इसके खिलाफ चीन ने अपने वीटो पॉवर का इस्तेमाल करते हुए प्रस्ताव को रोक दिया।  
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ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, जब चीन ने पाकिस्तानी आतंकियों का बचाव किया हो। इसके पहले भी चार दफा ऐसा हो चुका है। आखिर चीन क्यों इन आतंकवादियों के पीछे ढाल बनकर खड़ा हुआ है? ये आतंकवादी कौन-कौन हैं? आइए समझते हैं...
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पहले जानिए संयुक्त राष्ट्र में क्या हुआ? 
बुधवार को भारत संयुक्त राष्ट्र में हाफिज तल्हा सईद को वैश्विक आंतकी घोषित करने का प्रस्ताव लाया। अमेरिका ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया। लेकिन, चीन ने ऐन वक्त वीटो पॉवर का प्रयोग करते हुए इस प्रस्ताव पर रोक लगवा दी।  
 

अप्रैल में सईद को भारत ने आतंकवादी घोषित किया था
भारतीय गृह मंत्रालय ने इस साल आठ अप्रैल को एक अधिसूचना में लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज मोहम्मद सईद के बेटे और लश्कर-ए-तयैबा के मौलवी विंग के प्रमुख हाफिज तल्हा सईद को यूएपीए अधिनियम 1967 के प्रावधानों के तहत आतंकवादी घोषित किया था। तल्हा का पिता हाफिज सईद मुंबई में 26 नवंबर 2008 को हुए आतंकवादी हमले का मास्टरमाइंड था। उसे कुछ साल पहले ही वैश्विक आंतकी घोषित किया गया था।
 
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कैसे घोषित होता है वैश्विक आतंकी? 
किसी भी शख्स को वैश्विक आतंकी घोषित करने का फैसला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद करती है। इसमें अमेरिका, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस स्थाई सदस्य हैं और दस अस्थाई सदस्य होते हैं। किसी को वैश्विक आतंकी घोषित करने के लिए सभी स्थाई सदस्यों की सहमति जरूरी होती है।  
 

वैश्विक आतंकी घोषित होने पर क्या असर होता है? 
अगर किसी को वैश्विक आतंकी घोषित किया जाता है तो उस पर तीन तरह की कार्रवाई होती है। पहला संपत्ति जब्त करना, दूसरा यात्रा पर प्रतिबंध और तीसरा शस्त्र पर प्रतिबंध। वैश्विक आतंकी घोषित होते ही संयुक्त राष्ट्र के नियमों के अनुसार सभी देश बिना देरी किए संबंधित व्यक्ति, समूह या संस्था का धन, वित्तीय संपत्ति और आर्थिक संसाधनों को जब्त कर लेते हैं। 

सभी देशों को प्रतिबंधित सूची में शामिल लोगों का विश्व के किसी भी देश में आने-जाने पर प्रतिबंध लग जाता है। इसके अलावा वह जिस देश में है उसमें भी स्वतंत्र रूप से यात्रा नहीं कर सकता है। संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंधित सूची में शामिल होते ही संबंधित व्यक्ति या संस्था को किसी भी देश या संगठन द्वारा हथियारों का खरीद-फरोख्त, उसके पुर्जों, मैटेरियल, तकनीकी की जानकारी देने पर प्रतिबंध लग जाता है। प्रतिबंधित व्यक्ति या संस्थान किसी भी देश का झंडा लगा वायुयान या जलपोत का उपयोग नहीं कर सकता है।
 

अब जानिए किन-किन आतंकियों को बचा रहा है चीन? 
पिछले चार महीने में पांचवीं बार चीन ने पाकिस्तान के आतंकवादियों को संयुक्त राष्ट्र में अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने से रोका है। इनमें हाफिज तल्हा सईद के अलावा आतंकी संगठन फलाह-ए-इंसानियात फाउडेंशन का वाइस चेयरमैन शाहिद महमूद, अब्दुल रहमान मक्की, अब्दुल राउफ अजहर और साजिद मीर शामिल हैं। 
 

पाकिस्तानी आतंकवादियों को क्यों बचा रहा है चीन? 
इस बारे में हमने विदेश मामलों के जानकार डॉ. आदित्य पटेल से बात की। उन्होंने कहा, 'एशिया के साथ-साथ पूरी दुनिया में चीन अपना पांव जमाने की कोशिश कर रहा है। आर्थिक, सैन्य या भागौलिक मामलों में चीन खुद को दुनिया का सुप्रीम पॉवर बनाना चाहता है। यही कारण है कि वह कई ऐसे फैसले लेता है, जिससे भारत, अमेरिका समेत उसके तमाम विरोधी देशों को नुकसान पहुंचे।'

डॉ. पटेल  कहते हैं, ‘भारत के अलावा चीन का बॉर्डर पाकिस्तान से भी जुड़ा हुआ है। भारत और पाकिस्तान के रिश्ते अच्छे नहीं हैं। वहीं, भारत के साथ चीन का भी सीमा विवाद चल रहा है। दूसरी ओर चीन ने पाकिस्तान में काफी निवेश किया हुआ है। पाकिस्तान को लाखों करोड़ों डॉलर का कर्ज भी दे रखा है। पाकिस्तान से चीन के आर्थिक हित जुड़े हुए हैं। वहीं, भारत के खिलाफ चीन पाकिस्तान का इस्तेमाल करता है। यही कारण है कि पाकिस्तान का हर मोर्चे पर चीन बचाव करता रहा है। आतंकवादियों को बचाने में भी ये बड़ा कारण है।’
 

वीटो होता क्या है?
वीटो, लैटिन भाषा के शब्द वीटे (Veto) से बना है। जिसका मतलब है किसी चीज की अनुमति ना देना। जैसा कि चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में किया है। इस शक्ति का इस्तेमाल प्राचीन रोम में किया जाता था। वहां कुछ निर्वाचित अधिकारियों के पास ये शक्ति थी, जिसकी मदद से वे रोम सरकार की किसी भी कार्रवाई को रोक सकते थे। उस वक्त इसका इस्तेमाल किसी चीज को रोकने के लिए किया जाता था।
 

किन देशों के पास है वीटो पावर?
वर्तमान समय में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थाई सदस्यों के पास वीटो की शक्ति है। ये पांच देश चीन, फ्रांस, अमेरिका, रूस और ब्रिटेन हैं। वीटो पावर किसी भी फैसले में बेहद अहम भूमिका निभाता है। अगर इन सभी सदस्यों में से कोई एक सदस्य भी किसी फैसले पर वीटो लगा दे तो उस फैसले को ही रोक दिया जाता है।
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