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Bangladesh: बांग्लादेश के नोटों से क्यों हटाई गई बंगबंधु मुजीबुर रहमान की तस्वीर, भारत के लिए क्या है संदेश?

Tue, 03 Jun 2025 11:10 AM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ढाका
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ढाका Published by: नितिन गौतम Updated Tue, 03 Jun 2025 11:10 AM IST
सार

साल 1971 से ही बांग्लादेश के सभी नोटों पर शेख मुजीबुर रहमान की तस्वीर थी, लेकिन अब इसे हटाकर उनकी जगह बांग्लादेश की ऐतिहासिक स्थलों की तस्वीर छापी गई है। 

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why Bangladesh drops bangabandhu mujibur rahman photo from currency notes message for india
नए नोटों का अनावरण करते मोहम्मद यूनुस और अन्य - फोटो : एक्स/ बांग्लादेश सरकार के मुख्य सलाहकार

विस्तार

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार धीरे-धीरे बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की विरासत को खत्म करने में जुटी है। अब इसी कड़ी में बांग्लादेशी सरकार ने अपने नोटों से बंगबंधु की तस्वीर हटा दी है। सोमवार को बांग्लादेश की आंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने नए नोटों का अनावरण किया। जल्द ही ये नए नोट सर्कुलेशन में आ जाएंगे। नए नोटों पर बंगबंधु की तस्वीर गायब है। 
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शेख मुजीबुर रहमान की विरासत को किया जा रहा खत्म
मोहम्मद यूनुस सरकार के विरोधी इस कदम को शेख मुजीबुर रहमान की विरासत खत्म करने की कोशिश का हिस्सा बता रहे हैं। इससे पहले बांग्लादेश की अंतरिम सरकार इतिहास की किताबों में भी बदलाव कर चुकी है, जिनमें बांग्लादेश की आजादी की लड़ाई में शेख मुजीबुर रहमान के योगदान को धुंधला किया जा रहा है। साथ ही मौजूदा बांग्लादेश सरकार में शेख मुजीबुर रहमान की कई जगहों पर प्रतिमाओं को भी तोड़ा गया है। साल 1971 से ही बांग्लादेश के सभी नोटों पर शेख मुजीबुर रहमान की तस्वीर थी, लेकिन अब इसे हटाकर उनकी जगह बांग्लादेश की ऐतिहासिक स्थलों की तस्वीर छापी गई है। 
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दुनिया के सामने खुद की छवि सुधारने की कोशिश
जिन ऐतिहासिक स्थलों की तस्वीर नोटों पर छापी गई है, उनमें इस्लाम से जुड़े स्थलों के अलावा हिंदू और बौद्ध धर्म के मंदिरों को भी शामिल किया गया है। सरकार का इस बदलाव के पीछे तर्क है कि यह राष्ट्रीय प्रतीकों का अराजनीतिकरण है। बांग्लादेश की मुद्रा पर इस्लामिक ऐतिहासिक स्थलों के अलावा हिंदू और बौद्ध धर्म से जुड़े स्थलों की तस्वीरों को अंतरराष्ट्रीय दबाव से जोड़कर देखा जा रहा है। दरअसल बांग्लादेश की अंतरिम सरकार में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर अत्याचार बढ़े हैं। जिसके चलते बांग्लादेश की सरकार पर अंतरराष्ट्रीय दबाव भी है। मुद्रा पर ऐतिहासिक स्थलों की तस्वीर को इस दबाव को कम करने की कोशिश से जोड़कर देखा जा रहा है। अभी 1000, 50 और 20 टका के नोट जारी किए गए हैं। बांग्लादेश बैंक के प्रवक्ता ने बताया कि अभी शेख मुजीबुर रहमान की तस्वीर वाले नोट और सिक्के भी चलन में रहेंगे। 

भारत के लिए क्या संदेश
बांग्लादेश से शेख मुजीबुर रहमान की विरासत को खत्म करने की कोशिश बांग्लादेश में बदलते राजनीतिक परिदृश्य का सबूत है। यह बांग्लादेश की जनता के मन में शेख हसीना सरकार के लिए गुस्सा दिखाता है। साथ ही शेख मुजीबुर रहमान की विरासत को खत्म करने की कोशिश, बांग्लादेश में अवामी लीग की वापसी की कोशिश को खत्म करना भी है। ये भी बताता है कि बांग्लादेश में चरमपंथी, भारत विरोधी और शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग विरोधी भावना को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे स्पष्ट संदेश है कि भारत को अब बांग्लादेश की तरफ से भी सावधान रहना होगा। जिस तरह से बांग्लादेश में आतंकी संगठनों को समर्थन दिया जा रहा है, उससे भारत की चिंता बढ़ना स्वभाविक है। 

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