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रिपोर्ट: वुहान की लैब से कोरोना फैलने के सबूत नहीं, डब्ल्यूएचओ के चार वैज्ञानिकों का दावा

Sat, 13 Mar 2021 08:59 AM IST
प्रियंका तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर अजाला, वुहान
वर्ल्ड डेस्क, अमर अजाला, वुहान Published by: प्रियंका तिवारी Updated Sat, 13 Mar 2021 08:59 AM IST
सार

  • वुहान के दौरे पर गए थे डब्ल्यूएचओ के चार वैज्ञानिक
  • विशेषज्ञों ने की कोरोना वायरस की उत्पत्ति की जांच
  • वन्यजीवों के व्यापार के कारण वायरस फैलने की आशंका

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WHO scientist said after visiting China No evidence of corona origin was found from Wuhan Lab
विश्व स्वास्थ्य संगठन - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कोरोना वायरस सबसे पहले असलियत में कहां से आया, इस बात का पता लगाने के लिए चीन के दौरे से जांच कर लौटे विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के चार वैज्ञानिकों ने बड़ी बात कही है। उनका कहना है कि षड्यंत्र के सिद्धांतों के विपरीत वर्तमान में ऐसे कोई सबूत नहीं मिले हैं, जिनसे यह साबित होता है कि कोरोना वायरस वुहान की लैब से फैला था। वैज्ञानिकों ने आशंका जताई कि महामारी के उत्पन्न होने और कोरोना वायरस फैलने की सबसे बड़ी वजह वन्य जीवों का व्यापार है।

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चैथम हाउस थिंक-टैंक के एक वर्चुअल इवेंट में विशेषज्ञों ने कहा कि उन्हें वुहान की मीट बाजार और दक्षिण चीन के पड़ोसी क्षेत्र के बीच एक लिंक मिला है। बता दें, पहली बार लोग इसी मीट बाजार से वायरस की चपेट में आए थे जबकि दक्षिण चीन के पड़ोसी क्षेत्र में वायरस से संक्रमित चमगादड़ पाए गए थे।
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मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य पर रिसर्च करने वाले एक वैश्विक गैर-लाभकारी संस्थान इकोहेल्थ एलायंस के अध्यक्ष और जूलॉजिस्ट डॉ. पीटर दजाक ने कहा कि वुहान से दक्षिण चीन के प्रांतों के बीच एक पाइपलाइन थी, जहां वायरस से संक्रमित चमगादड़ पाए गए थे। उन्होंने आगे कहा कि यह आशंका है कि वायरस पालतू और खेती करने वाले जानवरों से होता हुआ वन्यजीव व्यापार के चलते वुहान में पहुंच गया हो। 
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बता दें कि डॉ. दजाक डब्ल्यूएचओ द्वारा भेजे गए चार सदस्यीय विशेषज्ञों की टीम का हिस्सा थे। उनके साथ प्रोफेसर डेविड हेयमैन, प्रोफेसर मैरियन कोपामन्स और प्रोफेसर जॉन वॉटसन भी जांच के लिए चीन गए थे। रॉटरडैम में इरास्मस यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर में वायरोसाइंस विभाग के प्रमुख कोपामन्स ने बताया कि उनकी टीम ने वुहान में हुनान बाजार के पास स्थित तीन लैब का दौरा किया। टीम ने इन तीनों लैब में प्रोटोकॉल के मुताबिक रिसर्च और जांच किया। 


ध्यान देने वाली बात है कि डब्ल्यूएचओ की टीम का यह दौरा चीन के लिए राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील मामला था और पूरी दुनिया की नजरें इस दौरे पर थीं। दरअसल, चीन पर यह आरोप लगा है कि उसने महामारी की शुरुआत में इससे निपटने के लिए उपयुक्त कदम नहीं उठाए। वुहान में चार दिनों का दौरा पूरा करने और जांच-पड़ताल करने के बाद डॉ. पीटर दजाक ने कहा कि अगला कदम क्या होना चाहिए, उस पर हमारे पास एक स्पष्ट संकेत हैं। यह कार्य किए जाने पर हमें काफी कुछ जानकारी मिलेगी।

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