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India-China: भारत-चीन के रिश्तों पर बोले जयशंकर- 75% तक सुलझी समस्याएं, सीमा पर सैन्यीकरण का बढ़ना बड़ा मुद्दा

Thu, 12 Sep 2024 04:35 PM IST
पवन पांडेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: पवन पांडेय Updated Thu, 12 Sep 2024 04:35 PM IST
सार

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्विट्जरलैंड की राजधानी जेनेवा में पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद पर कहा कि चीन के साथ समस्याओं में से लगभग 75 प्रतिशत का समाधान हो गया है, लेकिन बड़ा मुद्दा सीमा पर सैन्यीकरण का बढ़ना है।

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We made some progress: EAM Jaishankar on India-China talks on eastern Ladakh row
भारत-चीन के रिश्तों पर बोले विदेश मंत्री जयशंकर - फोटो : X / @DrSJaishankar

विस्तार

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद पर कहा कि चीन के साथ समस्याओं में से लगभग 75 प्रतिशत का समाधान हो गया है, लेकिन बड़ा मुद्दा सीमा पर सैन्यीकरण का बढ़ना है। स्विट्जरलैंड की राजधानी जेनेवा शहर में एक थिंक-टैंक में एक संवादात्मक सत्र में, जयशंकर ने कहा कि जून 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़पों ने भारत-चीन संबंधों को प्रभावित किया है, उन्होंने जोर देकर कहा कि सीमा पर हिंसा होने के बाद यह नहीं कहा जा सकता कि बाकी संबंध इससे अछूते हैं।
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दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी- जयशंकर
विदेश मंत्री ने कहा कि समस्या का समाधान खोजने के लिए दोनों पक्षों के बीच बातचीत चल रही है। जिनेवा सेंटर फॉर सिक्योरिटी पॉलिसी में उन्होंने कहा, कि अब बातचीत चल रही हैं, हमने कुछ प्रगति की है। मैं मोटे तौर पर कह सकता हूं कि लगभग 75 प्रतिशत समस्याएं सुलझ गई हैं। वहीं एक सवाल के जवाब में जयशंकर ने कहा, हमें अभी भी कुछ काम करने हैं। लेकिन एक बड़ा मुद्दा यह है कि हम दोनों ने अपनी सेनाओं को एक दूसरे के करीब ला दिया है और इस लिहाज से सीमा पर सैन्यीकरण हो रहा है।
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बेहतर हो सकते हैं रिश्ते- विदेश मंत्री
इस दौरान विदेश मंत्री ने संकेत दिया कि अगर विवाद का समाधान हो जाता है तो रिश्ते बेहतर हो सकते हैं। उन्होंने कहा, हमें उम्मीद है कि अगर कोई समाधान निकलता है, शांति और सौहार्द की वापसी होती है, तो हम अन्य संभावनाओं पर विचार कर सकते हैं। बता दें कि भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच पूर्वी लद्दाख में कुछ टकराव वाले बिंदुओं पर गतिरोध बना हुआ है, जबकि दोनों पक्षों ने व्यापक कूटनीतिक और सैन्य वार्ता के बाद कई क्षेत्रों से वापसी की प्रक्रिया पूरी कर ली है।
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वहीं विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि हमें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में अमेरिका में क्वाड शिखर सम्मेलन होगा और समय बीतने के साथ, हिंद-प्रशांत क्षेत्र के अधिकांश हिस्सों में यह भरोसा बढ़ रहा है कि यह (क्वाड) क्षेत्र के लिए एक शुद्ध संपत्ति है।
 

वहीं जब विदेश मंत्री से पूछा गया कि ब्रिक्स क्यों और क्या इसका विस्तार होगा, तो उन्होंने कहा, क्लब क्यों? क्योंकि एक और क्लब था! इसे जी-7 कहा जाता था और आप किसी और को उस क्लब में नहीं जाने देंगे। इसलिए, हम जाकर अपना खुद का क्लब बनाते हैं। मैं अब भी इस बात से हैरान हूं कि जब आप ब्रिक्स के बारे में बात करते हैं तो उत्तर कितना असुरक्षित हो जाता है। किसी तरह, लोगों के दिलों में कुछ खटकता है।

 


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