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US: ट्रंप ने दुनिया भर के देशों पर अब लगाया नया टैरिफ, इन धाराओं का किया इस्तेमाल; बढ़ सकता है व्यापार तनाव
Sat, 21 Feb 2026 07:49 AM IST
पवन पांडेय
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: पवन पांडेय
Updated Sat, 21 Feb 2026 07:49 AM IST
सार
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन के पुराने टैरिफ को गलत तरीका बताया, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने दूसरे कानूनों के जरिए नए टैरिफ लगाकर अपनी नीति को जारी रखा है। वहीं अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कहा कि यह 'कोर्ट की तरफ से कानून-व्यवस्था में हस्तक्षेप' जैसा है।
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डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति
- फोटो : ANI
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विस्तार
अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार को बड़ा कानूनी झटका लगा है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने छह-तीन के फैसले में कहा कि राष्ट्रपति ने एक कानून का गलत इस्तेमाल करके दुनिया भर के देशों पर टैरिफ (आयात शुल्क) लगाया था।
क्या था पूरा मामला?
ट्रंप सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम, 1977 (आईईईपीए) नाम के कानून का इस्तेमाल करके कई देशों पर बड़े पैमाने पर टैरिफ लगा दिए थे। लेकिन अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कहा, यह कानून राष्ट्रपति को टैक्स या टैरिफ लगाने की शक्ति नहीं देता। संविधान के अनुसार टैरिफ लगाने का अधिकार सिर्फ अमेरिकी संसद के पास है।
यह भी पढ़ें - Global Tariff: 10 प्रतिशत ग्लोबल टैरिफ की पुष्टि, एलान के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने कार्यकारी आदेश पर किए हस्ताक्षर
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कोर्ट ने अपने फैसले क्या कहा?
छह जजों ने कहा कि आईईईपीए के तहत टैरिफ लगाना गलत था। तीन जजों ने ट्रंप सरकार का समर्थन किया और असहमति जताई। इस फैसले से ट्रंप प्रशासन को करीब 130-175 अरब डॉलर तक की वसूली वापस करनी पड़ सकती है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ट्रंप की प्रतिक्रिया
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे बहुत खराब फैसला बताया और नया आदेश जारी करते हुए पूरी दुनिया पर तुरंत 10% का नया टैरिफ लगा दिया। यह टैरिफ ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 122 के तहत लगाया गया है, जो 150 दिन तक अस्थायी शुल्क लगाने की अनुमति देता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के कुछ ही घंटों के भीतर, ट्रंप ने एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करके अस्थायी आयात शुल्क लागू किया, जिसका उद्देश्य बुनियादी अंतरराष्ट्रीय भुगतान समस्याओं का समाधान करना और अमेरिकी श्रमिकों, किसानों और निर्माताओं को लाभ पहुंचाने के लिए हमारे व्यापार संबंधों को पुनर्संतुलित करने के प्रशासन के काम को जारी रखना था। इस घोषणा के तहत, 150 दिनों की अवधि के लिए, संयुक्त राज्य अमेरिका में आयातित वस्तुओं पर 10 प्रतिशत का आयात शुल्क लगाया गया है। यह अस्थायी आयात शुल्क 24 फरवरी को रात 12:01 बजे से प्रभावी होगा।
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का बयान
वहीं, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की कड़ी आलोचना की है, जिसमें कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आयात पर टैरिफ लगाने के लिए अपने अधिकारों से ज्यादा इस्तेमाल किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, कोर्ट का यह फैसला 'कानून-व्यवस्था के खिलाफ' है। इससे राष्ट्रपति के लिए अमेरिकी उद्योगों की रक्षा करना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने राष्ट्रपति को आयात नियंत्रित करने की शक्ति दी थी, लेकिन कोर्ट ने उसे गलत तरीके से सीमित कर दिया।
यह भी पढ़ें - Poland Russia: रूस के खतरे से सतर्क पोलैंड अब सीमा पर बिछाएगा बारूदी सुरंग, कहा- सुरक्षा जरूरी
अब क्या करने वाली है सरकार?
अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा- कोर्ट ने टैरिफ को पूरी तरह खत्म नहीं किया, सिर्फ आईईईपीए कानून के इस्तेमाल को रोका है, सरकार अब दूसरे कानूनों का इस्तेमाल करेगी। जिन कानूनों का उपयोग होगा, उनमें सेक्शन 232- राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर टैरिफ, सेक्शन 301- व्यापार विवाद के मामलों में टैरिफ और सेक्शन 122- अस्थायी वैश्विक टैरिफ शामिल है। सरकार का दावा है कि इससे 2026 तक टैरिफ से होने वाली कमाई लगभग वही रहेगी।
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क्या था पूरा मामला?
ट्रंप सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम, 1977 (आईईईपीए) नाम के कानून का इस्तेमाल करके कई देशों पर बड़े पैमाने पर टैरिफ लगा दिए थे। लेकिन अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कहा, यह कानून राष्ट्रपति को टैक्स या टैरिफ लगाने की शक्ति नहीं देता। संविधान के अनुसार टैरिफ लगाने का अधिकार सिर्फ अमेरिकी संसद के पास है।
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कोर्ट ने अपने फैसले क्या कहा?
छह जजों ने कहा कि आईईईपीए के तहत टैरिफ लगाना गलत था। तीन जजों ने ट्रंप सरकार का समर्थन किया और असहमति जताई। इस फैसले से ट्रंप प्रशासन को करीब 130-175 अरब डॉलर तक की वसूली वापस करनी पड़ सकती है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ट्रंप की प्रतिक्रिया
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे बहुत खराब फैसला बताया और नया आदेश जारी करते हुए पूरी दुनिया पर तुरंत 10% का नया टैरिफ लगा दिया। यह टैरिफ ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 122 के तहत लगाया गया है, जो 150 दिन तक अस्थायी शुल्क लगाने की अनुमति देता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के कुछ ही घंटों के भीतर, ट्रंप ने एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करके अस्थायी आयात शुल्क लागू किया, जिसका उद्देश्य बुनियादी अंतरराष्ट्रीय भुगतान समस्याओं का समाधान करना और अमेरिकी श्रमिकों, किसानों और निर्माताओं को लाभ पहुंचाने के लिए हमारे व्यापार संबंधों को पुनर्संतुलित करने के प्रशासन के काम को जारी रखना था। इस घोषणा के तहत, 150 दिनों की अवधि के लिए, संयुक्त राज्य अमेरिका में आयातित वस्तुओं पर 10 प्रतिशत का आयात शुल्क लगाया गया है। यह अस्थायी आयात शुल्क 24 फरवरी को रात 12:01 बजे से प्रभावी होगा।
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का बयान
वहीं, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की कड़ी आलोचना की है, जिसमें कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आयात पर टैरिफ लगाने के लिए अपने अधिकारों से ज्यादा इस्तेमाल किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, कोर्ट का यह फैसला 'कानून-व्यवस्था के खिलाफ' है। इससे राष्ट्रपति के लिए अमेरिकी उद्योगों की रक्षा करना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने राष्ट्रपति को आयात नियंत्रित करने की शक्ति दी थी, लेकिन कोर्ट ने उसे गलत तरीके से सीमित कर दिया।
Today, the Supreme Court decided that Congress, despite giving the president the ability to "regulate imports", didn't actually mean it. This is lawlessness from the Court, plain and simple. And its only effect will be to make it harder for the president to protect American…
— JD Vance (@JDVance) February 20, 2026
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अब क्या करने वाली है सरकार?
अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा- कोर्ट ने टैरिफ को पूरी तरह खत्म नहीं किया, सिर्फ आईईईपीए कानून के इस्तेमाल को रोका है, सरकार अब दूसरे कानूनों का इस्तेमाल करेगी। जिन कानूनों का उपयोग होगा, उनमें सेक्शन 232- राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर टैरिफ, सेक्शन 301- व्यापार विवाद के मामलों में टैरिफ और सेक्शन 122- अस्थायी वैश्विक टैरिफ शामिल है। सरकार का दावा है कि इससे 2026 तक टैरिफ से होने वाली कमाई लगभग वही रहेगी।