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Abortion Pills: अमेरिका में गर्भपात की दवा 'मिफेप्रिस्टोन' पर नहीं लगेगी रोक, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

Fri, 14 Jun 2024 08:49 AM IST
काव्या मिश्रा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: काव्या मिश्रा Updated Fri, 14 Jun 2024 08:49 AM IST
सार

कानूनी लड़ाई तब शुरू हुई थी, जब टेक्सास में एक संघीय न्यायाधीश ने मिफेप्रिस्टोन दवा पर देशव्यापी बैन लगाने का आदेश दिया था। इस फैसले में कहा गया था कि दवा का इस्तेमाल जन्म लेने से पहले ही बच्चे की हत्या करने के लिए किया जा रहा है।

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US Supreme Court rejects bid to curb access to abortion pills news in hindi
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला - फोटो : एएनआई

विस्तार

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली गर्भपात की गोली को प्रतिबंधित करने की मांग को खारिज कर दिया है। इससे राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन को एक बड़ी जीत मिली है। वहीं गर्भपात का विरोध करने वाले समूह और डॉक्टरों को झटका लगा है। 

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निचली अदालत के फैसले को पलटा
न्यायाधीशों ने गुरुवार को 9-0 से फैसला सुनाया। अदालत ने गर्भपात की गोली मिफेप्रिस्टोन को सीमित करने से इनकार कर दिया, जिसपर निचली अदालतों ने रोक लगा दी थी। निचली अदालतों के फैसलों पर रोक लगाने के फैसले से दवा की उपलब्धता गंभीर रूप से प्रतिबंधित हो जाती। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस दवा के पहुंच को सीमित करने के फैसले पर रोक लगा दी है। बता दें, इस दवा का इस्तेमाल देश में आधे से अधिक गर्भपात के मामलों में किया जाता है। 
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क्या है मिफेप्रिस्टोन?
अमेरिका में मिफेप्रिस्टोन और मिसोप्रोस्टॉल नाम की गोलियों का इस्तेमाल गर्भ गिराने के लिए होता है। इन गोलियों के सेवन को अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने मान्यता दे रखी है। इन गोलियों का इस्तेमाल गर्भ ठहरने के पहले 10 हफ्तों के अंदर किया जाता है। इन गोलियों की ऑनलाइन डिलीवरी भी होती है। अमेरिका के जिन राज्यों ने गर्भपात पर रोक लगाई है, अब वहां इन गोलियों की डिलीवरी रोकने के उपायों पर विचार चल रहा है। मिफेप्रिस्टोन को सन् 2000 में एफडीए रेगुलेटरी ने अनुमति दी थी। इस दवा का 60 फीसदी से अधिक गर्भपात के मामलों में इस्तेमाल होता है।  
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यह किया गया था दावा
बता दें, मिफेप्रिस्टोन टैबलेट से जुड़ी कानूनी लड़ाई तब शुरू हुई थी, जब टेक्सास में एक संघीय न्यायाधीश ने मिफेप्रिस्टोन पर देशव्यापी बैन लगाने का आदेश दिया था। इस फैसले में कहा गया था कि दवा का इस्तेमाल जन्म लेने से पहले ही बच्चे की हत्या करने के लिए किया जा रहा है। इस पर न्यायाधीशों ने फैसला सुनाया कि साल 2022 में टेक्सास में मुकदमा करने वाले वादी के पास मामले को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक कानूनी आधार का अभाव था, जिसके लिए उन्हें यह दिखाना आवश्यक था कि उन्हें इस तरह से नुकसान पहुंचाया गया है जिसका पता एफडीए से लगाया जा सके।


2022 में गर्भपात को ठहराया था वैध
अमेरिका में सुप्रीम कोर्ट के गर्भपात को वैध ठहराने का फैसला पलट देने के बाद कई राज्यों में ‘गर्भपात की गोलियों’ (एबॉर्शन पिल्स) की उपलब्धता सीमित करने कोशिशों पर ध्यान केंद्रित हो गया था। सुप्रीम कोर्ट ने साल 2022 में 1973 के रो एंड वेड नामक फैसले को पलट दिया था। 49 साल पहले उस फैसले में कोर्ट ने गर्भपात कराने को महिलाओं का वैध अधिकार घोषित किया गया था। इसके बाद 14 राज्यों को इस प्रक्रिया पर प्रतिबंध लगाने के लिए प्रेरित किया गया था। 

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