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अमेरिका-चीन: आपात संपर्क के लिए 'रेड फोन' स्थापित करने की तैयारी में बाइडन प्रशासन
Thu, 15 Jul 2021 08:22 PM IST
गौरव पाण्डेय
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Thu, 15 Jul 2021 08:22 PM IST
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अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग
- फोटो :
पीटीआई
विस्तार
सूत्रों के अनुसार अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन एक ऐसा रैपिड कम्युनिकेशन टूल विकसित करना चाहते हैं जिसे अमेरिका और चीन के बीच विवादों के खतरे को कम करने के लिए प्रयासों को विस्तारित करने में उपयोग किया जा सके। हालांकि, अभी यह विचार अपने शुरुआती दौर में है और चीनी पक्ष के सामने औपचारिक रूप से ऐसा प्रस्ताव रखा जाना भी बाकी है।
सीएनएन की एक रिपोर्ट के अनुसार सूत्रों ने बताया कि बीजिंग के लिए एक हॉटलाइन से राष्ट्रपति बाइडन या शीर्ष अधिकारी तुरंत चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को या उनके अधिकारी को इन्क्रिप्टेड कॉल कर सकेंगे या संदेश भेज सकेंगे। उदाहरण के तौर पर अचानक हुई सैन्य गतिविधियों या साइबर हमले से संबंधित चेतावनी संदेशों से संबंधित जानकारी साझा की जा सकेगी।
बराक ओबामा के प्रशासन में भी हुआ था विचार
बीजिंग के साथ एक हॉटलाइन की स्थापना करने का विचार पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रशासन में भी लाया गया था। लेकिन, इस अवधारणा को ट्रंप प्रशासन के अंतिम वर्ष तक क्लासिफाइड नेशनल सिक्योरिटी मेमो में संहिताबद्ध नहीं हुई। यह जानकारी इस मेमो की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने दी। अब बाइडन प्रशासन भी इस विचार पर काम कर रहा है।
इतनी आसान नहीं राह, सामने आएंगी चुनौतियां
अमेरिका-चीन के बीच एक हॉटलाइन की स्थापना आसान नहीं हैं। इसमें कई चुनौतियां सामने आएंगी। पहला सवाल ये है कि क्या चीनी पक्ष इस उपकरण का इस्तेमाल करने के लिए राजी होगा। जब तात्कालिक मामलों की बात आती है तो चीन की ओर से प्रतिक्रिया में देरी लंबे समय से विवाद का मुद्दा बना हुआ है। चीन की राजनीतिक व्यवस्था भी इसमें आड़े आ सकती है।
पेंटागन में मौजूद है चीन के साथ एक हॉटलाइन
हालांकि, चीन के साथ एक हॉटलाइन पेंटागन में पहले से ही है। इसकी स्थापना केवल सैन्य मामलों में इस्तेमाल करने के लिए की गई थी, लेकिन इसका उपयोग न के बराबर ही होता है। एक अधिकारी ने इस साल की शुरुआत में कहा था कि एक-दो बार हमने इस हॉटलाइन का इस्तेमाल किया है। लेकिन घंटों तक केवल घंटी ही जारी रही थी, हमें उधर से कोई जवाब नहीं मिला।