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Explainer: अपना सबसे सुरक्षित विमान छोड़ा, खाने वाले कंटेनर में छिपे, फिर US पहुंचे ट्रंप; किस बात का था डर?
Tue, 11 Aug 2026 04:58 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Tue, 11 Aug 2026 04:58 PM IST
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सार
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एयर फोर्स वन में ट्रंप।
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब तक कई बार ईरान को पूरी तरह तबाह करने की धमकी दे चुके हैं। खासकर ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई और कई और सैन्य-राजनीतिक नेताओं और अफसरों पर हमलों के बाद अमेरिका अपनी खुफिया क्षमताओं को लेकर काफी बड़े दावे करता रहा है। हालांकि, ईरान की तरफ से अमेरिकी राष्ट्रपति को दी गई एक धमकी के बाद हालिया समय में ऐसा घटनाक्रम हुआ, जो अमेरिकी सुरक्षा दायरे की मजबूती के दावों की पोल खोलता है। दरअसल, बीते महीने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को तुर्किये में हुए नाटो सम्मेलन के बाद जिस तरह से छिपाकर निकाला गया, वह न सिर्फ दुनिया के सबसे सुरक्षित विमान, उसके बेडे़ और अमेरिका की सैन्य क्षमताओं के लिए बड़ा सवाल है, बल्कि उसकी खुफिया व्यवस्थाओं के लिए भी प्रश्नचिह्न के तौर पर उभरा है।आइये जानते हैं कि बीते महीने के नाटो सम्मेलन के जिस घटनाक्रम की बात हो रही है, वह क्या है? ईरान की किस धमकी पर अमेरिकी खुफिया विभाग ने राष्ट्रपति की यात्रा का तरीका बदल दिया? सबसे सुरक्षित कहे जाने वाले एयरफोर्स वन विमान और इसके बेड़े को ट्रंप को वापस ले जाने के लिए इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया? इससे पहले कब-कब और क्यों अमेरिकी राष्ट्रपतियों को सफर के तरीकों और जरियों को बदला गया है? आइये जानते हैं...
पहले जानें- तुर्किये में अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ हुए किस घटनाक्रम की चर्चा?
तुर्किये में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जुड़े एक बेहद गुप्त और असाधारण सुरक्षा ऑपरेशन की चर्चा हो रही है, जिसे पिछले महीने अंकारा में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान अंजाम दिया गया था।1. ट्रंप की हत्या का गंभीर खतरा मंडराया
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच खुफिया अधिकारियों की ओर से राष्ट्रपति ट्रंप की जान को ईरान से गंभीर खतरा होने की बात कही गई थी। सुरक्षा चिंता के चलते ट्रंप सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए कतर की तरफ से उपहार में दिए गए एयर फोर्स वन विमान में पहुंचे थे, लेकिन उनकी सुरक्षित रवानगी के लिए एक गुप्त चकमा देने वाली योजना बनाई गई।
2. बयान कुछ, योजना कुछ और...
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे पहले अमेरिकी अखबार 'द वॉशिंगटन पोस्ट' ने खुलासा किया। अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाइट हाउस और राष्ट्रपति ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी कि वे तुर्किये से निकलने के लिए कतर की तरफ से उपहार में दिए गए नए विमान के बजाय पुराने एयर फोर्स वन विमान का इस्तेमाल करेंगे। हालांकि, पर्दे के पीछे खुफिया एजेंसियों ने उन्हें पुराने विमान से भेजने की योजना भी नहीं बनाई थी।
3. कैमरों के सामने पुराने विमान में चढ़े, कैटरिंग ट्रॉली में छिपाकर निकाले गए
4. पत्रकारों ही नहीं, व्हाइट हाउस कर्मी भी रहे ट्रंप की गौरमौजूदगी से अनजान
पुराने एयर फोर्स वन विमान में सवार पत्रकारों और व्हाइट हाउस के अन्य कर्मचारियों को बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि राष्ट्रपति उनके साथ विमान में यात्रा नहीं कर रहे हैं। दरअसल, राष्ट्रपति के लिए केबिन बिल्कुल अलग होता है, जहां आने-जाने पर पाबंदियां होती हैं। यह विमान उन्हें लेकर ब्रिटेन के लिए उड़ा। इससे वह विमान ट्रंप के वास्तविक ठिकाने को छिपाने के लिए एक छलावा साबित हुआ, जबकि ट्रंप दूसरे छोटे विमान में सवार रहे।
- जब ट्रंप की तुर्किये से रवानगी का समय आया तो वे टीवी कैमरों के सामने अंकारा एयरपोर्ट पर अपनी विशेष लिमोजीन कार में बैठकर पहुंचे। इसके बाद वे रेड कार्पेट पर होते हुए पुराने एयर फोर्स वन विमान पर चढ़ते भी दिखे। उन्होंने हाथ हिलाकर जनता का अभिवादन किया। हालांकि, इसके बाद की पूरी योजना खुफिया टीमों की थी।
- कैमरे की नजरों के सामने विमान में सवार होने के ठीक बाद ट्रंप और उनके कुछ चुनिंदा सलाहकारों को विमान के दूसरी तरफ, यानी जहां से मीडियाकर्मी सवार नहीं हो रहे थे, से लगे एक एयरपोर्ट कैटरिंग ट्रक के कंटेनर में छिपाया गया और इस कंटेनर को चुपके से नीचे उतार कर इसे पास खड़े एक छोटे सैन्य विमान सी-32ए में स्थानांतरित कर दिया गया।
4. पत्रकारों ही नहीं, व्हाइट हाउस कर्मी भी रहे ट्रंप की गौरमौजूदगी से अनजान
पुराने एयर फोर्स वन विमान में सवार पत्रकारों और व्हाइट हाउस के अन्य कर्मचारियों को बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि राष्ट्रपति उनके साथ विमान में यात्रा नहीं कर रहे हैं। दरअसल, राष्ट्रपति के लिए केबिन बिल्कुल अलग होता है, जहां आने-जाने पर पाबंदियां होती हैं। यह विमान उन्हें लेकर ब्रिटेन के लिए उड़ा। इससे वह विमान ट्रंप के वास्तविक ठिकाने को छिपाने के लिए एक छलावा साबित हुआ, जबकि ट्रंप दूसरे छोटे विमान में सवार रहे।
उड़ान के दौरान सुरक्षा कारणों से पत्रकारों को विमान की खिड़कियों के पर्दों को बंद रखने को कहा गया था। बाद में वॉशिंगटन लौटते समय जब ट्रंप से खिड़की के पर्दे ढंकने के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि यह उड़ान के खतरे में होने की वजह से किया गया था, क्योंकि वे ईरान की सूची में पहले नंबर पर हैं।
ये भी पढ़ें: कैटरिंग ट्रक में छिपकर ट्रंप ने बदला विमान: ईरान की धमकी के बीच कैसे तुर्किये से निकले? रिपोर्ट में दावा

5. ब्रिटेन में चुपके से वापस एयर फोर्स वन विमान में बिठाए गए ट्रंप
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5. ब्रिटेन में चुपके से वापस एयर फोर्स वन विमान में बिठाए गए ट्रंप
- राष्ट्रपति ट्रंप ने जिस सी-32ए सैन्य विमान से यात्रा की, उसने अपनी पहचान छिपाने के लिए रीच 18 (या आरसीएच18) नाम के एक सामान्य कॉल साइन का इस्तेमाल किया था और उसके ट्रैकिंग सिस्टम को भी हवा में बंद कर दिया गया था, ताकि किसी भी देश के रडार पर इसकी लोकेशन ट्रैक न हो पाए।
- ब्रिटेन के सैन्य बेस पर उतरने के बाद ट्रंप को फिर से चुपके से पुराने एयर फोर्स वन विमान में बोर्ड कराया गया, जहां से वे कैमरे के सामने एक बार फिर एयर फोर्स वन से उतरते दिखे और बाद में कतर वाले एयर फोर्स वन विमान में लौटकर वॉशिंगटन के लिए रवाना हुए।
ट्रंप के लिए सबसे सुरक्षित एयरफोर्स वन विमान का इस्तेमाल क्यों नहीं?
यूं तो एयरफोर्स वन तकनीकी रूप से दुनिया के सबसे सुरक्षित विमानों में से एक है, लेकिन यह बेहद विशाल और आसानी से पहचाने जाने वाला विमान भी है। ईरान से मिले गंभीर खतरे को देखते हुए, सुरक्षा अधिकारियों का मानना था कि इतने लोकप्रिय विमान में राष्ट्रपति को बिठाना उन्हें सीधे निशाने पर रखने जैसा था। इसके उलट एक छोटे और कम ध्यान आकर्षित करने वाले विमान में सफर करना कहीं अधिक सुरक्षित माना गया।खुफिया अधिकारियों ने चेतावनी दी थी कि ईरान सीधे राष्ट्रपति ट्रंप या वे जिस भी विमान में सफर कर रहे हों, उस पर हमला करने की फिराक में था। यह खतरा कतर की ओर से उपहार में दिए गए विशेष जेट तक सीमित नहीं था, बल्कि ट्रंप जिस भी विमान में सवार होते, उस पर हमले की गंभीर आशंका थी।
न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, ट्रंप जिस नए कतर के एयर फोर्स वन विमान (बोइंग 747-8) से तुर्किये आए थे, उसमें पुराने एयरफोर्स वन की तरह सभी उन्नत रक्षात्मक प्रणालियां और अपग्रेड पूरी तरह स्थापित नहीं थे। हालांकि, खतरा ट्रंप के हर विमान पर था, लेकिन इस नए विमान की तकनीकी कमियों के कारण सुरक्षा चिंताएं और ज्यादा बढ़ गई थीं।
ईरान से कितना गंभीर और किस तरह का था खतरा?
- ईरान की ओर से इस खतरे को तब भांपा गया, जब तुर्किये में नाटो सम्मेलन से ठीक एक रात पहले, अमेरिका और ईरान के बीच महीनों पुराने युद्ध को खत्म करने की वार्ता नाकाम हो गई। इसके बाद ट्रंप के निर्देश पर अमेरिकी सेना ने ईरान पर नए सिरे से सैन्य हमले किए। इसके चलते दोनों देशों के बीच तनाव अपने चरम पर था। ईरान ने इसी दौरान ट्रंप को धमकियां दी थीं।
- खुफिया जानकारियों के मुताबिक, ट्रंप के सहयोगियों को वर्षों से ईरान से लगातार धमकियां मिल रही हैं। इसकी एक वजह ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान उनके आदेश पर ईरान के बेहद ताकतवर सैन्य कमांडर मेजर जनरल कासिम सुलेमानी की अमेरिकी हमले में हुई हत्या थी। तभी से ईरान लगातार ट्रंप को नुकसान पहुंचाने की योजना बना रहा था।
- खुद ट्रंप ने बाद में वॉशिंगटन लौटते समय पत्रकारों से बातचीत में इस बात को स्वीकार किया था कि वे ईरान की हिट लिस्ट में नंबर वन पर हैं और उन पर लगातार हमले का खतरा बना हुआ है। इसी वजह से सीक्रेट सर्विस ने ट्रंप को सुरक्षित निकालने के लिए एक छलावे और भटकाने वाली रणनीति के तहत इस गुप्त ऑपरेशन को अंजाम दिया।
पहले कब-कब और क्यों बदला गया अमेरिकी राष्ट्रपति के सफर का तरीका-जरिया?
अमेरिकी इतिहास में यह पहली बार नहीं है जब सुरक्षा कारणों से किसी राष्ट्रपति के सफर का तरीका, माध्यम या मार्ग बदला गया हो। पूर्व में भी कई अमेरिकी राष्ट्रपतियों की यात्राओं को अत्यधिक गुप्त रखा गया और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अप्रत्याशित माध्यमों का उपयोग किया गया।1. अब्राहम लिंकन (1862 - गृहयुद्ध के दौरान वेस्ट पॉइंट की यात्रा)
क्या बदला गया: गृहयुद्ध के चरम पर राष्ट्रपति लिंकन ने सैन्य रणनीति पर चर्चा करने के लिए वेस्ट पॉइंट की एक बेहद गुप्त और अप्रत्याशित यात्रा की थी। इस यात्रा के दौरान उन्होंने हडसन नदी पार करने के लिए नाव और फिर वापस आने के लिए खासतौर से डिजाइन की गई ट्रेन का इस्तेमाल किया था। यह यात्रा इतनी अप्रत्याशित थी कि उनके कैबिनेट मंत्रियों तक को इसकी कोई भनक नहीं थी।
2. फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट (द्वितीय विश्व युद्ध - कैसाब्लांका सम्मेलन)
हवाई जहाज से आधिकारिक यात्रा करने वाले फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट अमेरिका के पहले राष्ट्रपति बने थे। उनकी यह यात्रा तब हुई थी, जब वे ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल के साथ एक गुप्त बैठक के लिए कैसाब्लांका गए। यह यात्रा पूरी तरह गुप्त थी, जिसमें उन्होंने फ्लोरिडा से उड़ान भरने के बाद कैरेबियन, ब्राजील और गाम्बिया जैसे स्थानों पर रुकते हुए कुल चार दिनों का समय लिया। इसके अलावा इस यात्रा के दौरान सुरक्षा के लिए एक बॉडी डबल यानी हमशक्ल का भी इस्तेमाल किया गया था।
दरअसल, दूसरे विश्व युद्ध के दौरान नाजी जर्मनी और अन्य दुश्मनों की ओर से अमेरिकी राष्ट्रपति के विमान को निशाना बनाने का बहुत बड़ा खतरा था, जिससे बचने के लिए इस लंबी यात्रा को पूरी तरह गुप्त रखा गया था।
3. ड्वाइट डी. आइजनहावर (1952 - कोरियाई युद्ध के दौरान सैन्य निरीक्षण)
आइजनहावर ने चुनाव प्रचार के दौरान किए गए वादे के मुताबिक, कोरिया का दौरा किया और वहां सैनिकों के बीच तीन दिन बिताए। यह वह समय था, जब कोरिया में अमेरिका और पश्चिमी देश एक तरफ और रूस-चीन एक तरफ लड़ रहे थे। इस युद्ध के दौरान ही अमेरिकी राष्ट्रपति कोरिया के दक्षिणी मुहाने पर पहुंचे थे। इस यात्रा को पूरी तरह गुप्त रखने के लिए प्रशासन ने ऐसा आभास दिया कि राष्ट्रपति देश में ही हैं और अपने घर से कैबिनेट की नियुक्तियां कर रहे हैं। यह बदलाव सक्रिय युद्ध क्षेत्र में राष्ट्रपति की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उनकी यात्रा के समय और स्थान को दुश्मनों से छिपाने के लिए किया गया था।
हवाई जहाज से आधिकारिक यात्रा करने वाले फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट अमेरिका के पहले राष्ट्रपति बने थे। उनकी यह यात्रा तब हुई थी, जब वे ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल के साथ एक गुप्त बैठक के लिए कैसाब्लांका गए। यह यात्रा पूरी तरह गुप्त थी, जिसमें उन्होंने फ्लोरिडा से उड़ान भरने के बाद कैरेबियन, ब्राजील और गाम्बिया जैसे स्थानों पर रुकते हुए कुल चार दिनों का समय लिया। इसके अलावा इस यात्रा के दौरान सुरक्षा के लिए एक बॉडी डबल यानी हमशक्ल का भी इस्तेमाल किया गया था।
दरअसल, दूसरे विश्व युद्ध के दौरान नाजी जर्मनी और अन्य दुश्मनों की ओर से अमेरिकी राष्ट्रपति के विमान को निशाना बनाने का बहुत बड़ा खतरा था, जिससे बचने के लिए इस लंबी यात्रा को पूरी तरह गुप्त रखा गया था।
3. ड्वाइट डी. आइजनहावर (1952 - कोरियाई युद्ध के दौरान सैन्य निरीक्षण)
आइजनहावर ने चुनाव प्रचार के दौरान किए गए वादे के मुताबिक, कोरिया का दौरा किया और वहां सैनिकों के बीच तीन दिन बिताए। यह वह समय था, जब कोरिया में अमेरिका और पश्चिमी देश एक तरफ और रूस-चीन एक तरफ लड़ रहे थे। इस युद्ध के दौरान ही अमेरिकी राष्ट्रपति कोरिया के दक्षिणी मुहाने पर पहुंचे थे। इस यात्रा को पूरी तरह गुप्त रखने के लिए प्रशासन ने ऐसा आभास दिया कि राष्ट्रपति देश में ही हैं और अपने घर से कैबिनेट की नियुक्तियां कर रहे हैं। यह बदलाव सक्रिय युद्ध क्षेत्र में राष्ट्रपति की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उनकी यात्रा के समय और स्थान को दुश्मनों से छिपाने के लिए किया गया था।
4. लिंडन बी. जॉनसन (वियतनाम युद्ध - कैम रैन बे की गुप्त यात्रा)
राष्ट्रपति जॉनसन ने वियतनाम युद्ध के दौरान कैम रैन बे में तैनात अमेरिकी सैनिकों से मिलने के लिए बेहद गुपचुप तरीके से यात्रा की थी। सीधे कॉम्बैट जोन (युद्ध क्षेत्र) में जाने के कारण सुरक्षा का जबरदस्त खतरा था, जिसके कारण इस यात्रा को पूरी तरह छिपाकर रखा गया।
5. रोनाल्ड रीगन (बाल्टीमोर ओरियोल्स बेसबॉल मैच - पहली पिच)
रीगन ने बाल्टीमोर ओरियोल्स के सीजन के पहले मैच में पहली गेंद फेंकने के लिए अचानक दौरा किया। सुरक्षा चिंताओं के कारण पहले इस कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया था, लेकिन रीगन ने खेल शुरू होने के मात्र 90 मिनट पहले अचानक जाने का फैसला किया। वे अपने सूट के नीचे बुलेटप्रूफ वेस्ट पहनकर मैदान पर उतरे थे। अचानक जाने की रणनीति इसलिए चुनी गई, क्योंकि सुरक्षा अधिकारियों का मानना था कि अगर यात्रा पूरी तरह अप्रत्याशित हो, तो सुरक्षा का खतरा काफी हद तक खत्म हो जाता है।
6. बिल क्लिंटन (मार्च 2000 - पाकिस्तान यात्रा)
जब राष्ट्रपति क्लिंटन पाकिस्तान पहुंचे, तो लोकप्रिय नीले और सफेद रंग के एयरफोर्स वन विमान को केवल एक छलावे के रूप में इस्तेमाल किया गया था। क्लिंटन वास्तव में उसके पीछे उड़ रहे एक साधारण सफेद रंग के जेट से नीचे उतरे थे। उस समय पाकिस्तान में गंभीर सुरक्षा चिंताओं और खतरों के चलते यह कदम उठाया गया था, ताकि संभावित हमलावरों को भ्रमित किया जा सके कि राष्ट्रपति किस विमान में हैं।
राष्ट्रपति जॉनसन ने वियतनाम युद्ध के दौरान कैम रैन बे में तैनात अमेरिकी सैनिकों से मिलने के लिए बेहद गुपचुप तरीके से यात्रा की थी। सीधे कॉम्बैट जोन (युद्ध क्षेत्र) में जाने के कारण सुरक्षा का जबरदस्त खतरा था, जिसके कारण इस यात्रा को पूरी तरह छिपाकर रखा गया।
5. रोनाल्ड रीगन (बाल्टीमोर ओरियोल्स बेसबॉल मैच - पहली पिच)
रीगन ने बाल्टीमोर ओरियोल्स के सीजन के पहले मैच में पहली गेंद फेंकने के लिए अचानक दौरा किया। सुरक्षा चिंताओं के कारण पहले इस कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया था, लेकिन रीगन ने खेल शुरू होने के मात्र 90 मिनट पहले अचानक जाने का फैसला किया। वे अपने सूट के नीचे बुलेटप्रूफ वेस्ट पहनकर मैदान पर उतरे थे। अचानक जाने की रणनीति इसलिए चुनी गई, क्योंकि सुरक्षा अधिकारियों का मानना था कि अगर यात्रा पूरी तरह अप्रत्याशित हो, तो सुरक्षा का खतरा काफी हद तक खत्म हो जाता है।
6. बिल क्लिंटन (मार्च 2000 - पाकिस्तान यात्रा)
जब राष्ट्रपति क्लिंटन पाकिस्तान पहुंचे, तो लोकप्रिय नीले और सफेद रंग के एयरफोर्स वन विमान को केवल एक छलावे के रूप में इस्तेमाल किया गया था। क्लिंटन वास्तव में उसके पीछे उड़ रहे एक साधारण सफेद रंग के जेट से नीचे उतरे थे। उस समय पाकिस्तान में गंभीर सुरक्षा चिंताओं और खतरों के चलते यह कदम उठाया गया था, ताकि संभावित हमलावरों को भ्रमित किया जा सके कि राष्ट्रपति किस विमान में हैं।
7. जॉर्ज डब्ल्यू. बुश (9/11 हमला और 2003 इराक यात्रा)
9/11 आतंकी हमलों के तत्काल बाद राष्ट्रपति बुश को सुरक्षा कारणों से सीधे वॉशिंगटन लाने के बजाय नेब्रास्का स्थित एक अज्ञात सैन्य ठिकाने पर ले जाया गया था।
2003 में थैंक्सगिविंग के मौके पर जब बुश सैनिकों से मिलने इराक गए, तो उड़ान के लिए फर्जी कॉल साइन, देर रात की उड़ानों और मीडिया रिपोर्टिंग पर सख्त पाबंदियों का सहारा लिया गया था।
बुश के लिए दोनों ही मौकों पर ऐसा इसलिए किया गया, ताकि गंभीर आतंकी हमलों और युद्ध क्षेत्रों में राष्ट्रपति की सुरक्षा को अभेद्य बनाए रखा जा सके। इसके लिए पारंपरिक यात्रा प्रोटोकॉल को बदलने में गुरेज नहीं किया गया।
8. बराक ओबामा (2010 - अफगानिस्तान की गुप्त यात्राएं)
राष्ट्रपति ओबामा ने भी सुरक्षा कारणों से अफगानिस्तान के अपने गुप्त दौरों की घोषणा तब तक नहीं की, जब तक कि उनका विमान वहां सुरक्षित रूप से लैंड नहीं कर गया। सक्रिय युद्ध क्षेत्र में राष्ट्रपति के ठिकाने को शत्रुओं से सुरक्षित रखने के लिए इस रणनीति को लाया गया था।
9/11 आतंकी हमलों के तत्काल बाद राष्ट्रपति बुश को सुरक्षा कारणों से सीधे वॉशिंगटन लाने के बजाय नेब्रास्का स्थित एक अज्ञात सैन्य ठिकाने पर ले जाया गया था।
2003 में थैंक्सगिविंग के मौके पर जब बुश सैनिकों से मिलने इराक गए, तो उड़ान के लिए फर्जी कॉल साइन, देर रात की उड़ानों और मीडिया रिपोर्टिंग पर सख्त पाबंदियों का सहारा लिया गया था।
बुश के लिए दोनों ही मौकों पर ऐसा इसलिए किया गया, ताकि गंभीर आतंकी हमलों और युद्ध क्षेत्रों में राष्ट्रपति की सुरक्षा को अभेद्य बनाए रखा जा सके। इसके लिए पारंपरिक यात्रा प्रोटोकॉल को बदलने में गुरेज नहीं किया गया।
8. बराक ओबामा (2010 - अफगानिस्तान की गुप्त यात्राएं)
राष्ट्रपति ओबामा ने भी सुरक्षा कारणों से अफगानिस्तान के अपने गुप्त दौरों की घोषणा तब तक नहीं की, जब तक कि उनका विमान वहां सुरक्षित रूप से लैंड नहीं कर गया। सक्रिय युद्ध क्षेत्र में राष्ट्रपति के ठिकाने को शत्रुओं से सुरक्षित रखने के लिए इस रणनीति को लाया गया था।