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एक्सप्लेनर: अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में फिर क्यों असफल हुई राष्ट्रपति की पार्टी, बीते चार चुनाव का इतिहास क्या?

Wed, 04 Nov 2026 11:53 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Wed, 04 Nov 2026 11:53 AM IST
सार

अमेरिका के बीते चार मध्यावधि चुनावों (2010, 2014, 2018, 2022) के नतीजों का पूरा विश्लेषण। जानें प्रतिनिधि सभा, सीनेट में सीटों के नफा-नुकसान और राष्ट्रपति की अप्रूवल रेटिंग का क्या असर रहा।

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US Midterm elections Results History Seat changes Republicans vs Democrats explainer
अमेरिका में मध्यावधि चुनाव। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के लिए मतगणना का दौर जारी है। भले ही इन चुनावों से डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति पद पर फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन इन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब तक के कार्यकाल के रुझान के तौर पर भी देखा जा रहा है। दरअसल, 2024 में राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के डोनाल्ड ट्रंप को जबरदस्त जीत मिली थी। साथ ही संसद (कांग्रेस) की जिन सीटों पर चुनाव हुए थे, उनमें भी रिपब्लिकन पार्टी बढ़त हासिल करने में कामयाब हुई थी। हालांकि, अब राष्ट्रपति चुनाव के ठीक दो साल बाद होने वाले मध्यावधि चुनाव को न सिर्फ ट्रंप प्रशासन की ओर से उठाए गए कदमों, बल्कि उन्हें लागू करने वाले रिपब्लिकन सांसदों को लेकर भी जनता की राय के तौर पर देखा जा रहा है। 
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अमेरिका में मध्यावधि चुनाव (मिडटर्म इलेक्शन) के इतिहास को देखा जाए तो सामने आता है कि देश में 1946 से लेकर अब तक 20 मध्यावधि चुनाव हो चुके हैं। हालांकि, सिर्फ दो बार ही सत्तासीन राष्ट्रपति की पार्टी संसद में अपनी सीटें बढ़ाने में कामयाब रही। यानी 20 में से 18 मध्यावधि चुनावों में राष्ट्रपति के कामों के आधार पर जनता ने उनके सियासी दल को कोई फायदा नहीं दिया। 
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ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर अमेरिका में बीते चार मध्यावधि चुनावों में क्या नतीजे रहे हैं और राष्ट्रपति के दल को कब फायदा या नुकसान हुआ है? ओबामा, बाइडन और पिछले कार्यकाल में खुद डोनाल्ड ट्रंप अपनी पार्टी को कितनी सफलता दिला पाए थे? कैसे इन मध्यावधि चुनाव के नतीजों ने जनता के मूड को लेकर भी हकीकत को सामने रख दिया था? इसके अलावा बीते 20 चुनाव में वह कौन दो राष्ट्रपति हैं, जो अपनी पार्टी की सीटें बढ़ाने में कामयाब हुए थे? आइये जानते हैं...




अमेरिका में बीते तीन मध्यावधि चुनावों में क्या नतीजे रहे हैं?

अमेरिका में बीते चार मध्यावधि चुनाव 2010, 2014, 2018 और 2022 में हुए थे। जहां 2010 और 2014 में राष्ट्रपति बराक ओबामा के नेतृत्व में डेमोक्रेटिक पार्टी ने मध्यावधि चुनाव लड़े थे तो वहीं 2018 में डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में रिपब्लिकन पार्टी ने जनता का सामना किया। इसके अलावा 2022 में जो बाइडन के प्रतिनिधित्व में डेमोक्रेटिक पार्टी ने मध्यावधि चुनाव लड़े। 

ये भी पढ़ें: अमेरिकी मध्यावधि चुनाव: ट्रंप की पार्टी की हार के भारत के लिए क्या मायने, कैसे सस्ता हो सकता है पेट्रोल?
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2010 का मध्यावधि चुनाव, राष्ट्रपति: बराक ओबामा, डेमोक्रेटिक पार्टी

प्रतिनिधि सभा: सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक पार्टी को भारी हार का सामना करना पड़ा। डेमोक्रेट्स ने 63 सीटें गंवाईं और सदन का नियंत्रण रिपब्लिकन पार्टी के पास चला गया। इस करारी हार को तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने करारी हार (shellacking) कहा था।

सीनेट: डेमोक्रेट्स ने सीनेट में छह सीटें गंवाईं, हालांकि कम बहुमत के साथ वे सीनेट पर अपना नियंत्रण बचाने में सफल रहे।


2014 का मध्यावधि चुनाव, राष्ट्रपति: बराक ओबामा, डेमोक्रेटिक पार्टी

प्रतिनिधि सभा: डेमोक्रेटिक पार्टी को 13 सीटों का नुकसान हुआ और प्रतिनिधि सभा पर रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण बरकरार रहा।

सीनेट: डेमोक्रेट्स को नौ सीटों का नुकसान उठाना पड़ा। इसके साथ ही रिपब्लिकन पार्टी ने सीनेट का बहुमत हासिल कर लिया।
 
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2018 का मध्यावधि चुनाव, राष्ट्रपति: डोनाल्ड ट्रंप, रिपब्लिकन पार्टी

प्रतिनिधि सभा: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी ने सदन में 41 सीटें गंवा दीं, जिससे उन्होंने प्रतिनिधि सभा का नियंत्रण खो दिया और डेमोक्रेटिक पार्टी ने बहुमत हासिल किया।

सीनेट: इसके विपरीत, रिपब्लिकन पार्टी ने सीनेट में अपनी स्थिति मजबूत की और 2 सीटें जोड़कर सीनेट पर अपना नियंत्रण बनाए रखा।
 

2022 का मध्यावधि चुनाव, राष्ट्रपति: जो बाइडन, डेमोक्रेटिक पार्टी

प्रतिनिधि सभा: डेमोक्रेट्स को नौ सीटों का नुकसान हुआ और प्रतिनिधि सभा पर मामूली अंतर से रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण स्थापित हो गया।

सीनेट: बड़ी लाल लहर की भविष्यवाणियों के बावजूद, डेमोक्रेट्स ने सीनेट में अपना नियंत्रण बरकरार रखा और एक सीट का फायदा हासिल किया।

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अमेरिका में बीते मध्यावधि चुनाव के नतीजे। - फोटो : अमर उजाला

राष्ट्रपति की छवि से कैसे पड़ा था मध्यावधि चुनावों पर असर?

अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में राष्ट्रपति की लोकप्रियता और तत्कालीन राजनीतिक व आर्थिक माहौल का चुनाव नतीजों पर गहरा असर पड़ता है। 2010, 2014, 2018 और 2022 में लगातार इसके संकेत सामने आए।

2010 का चुनाव: बराक ओबामा, डेमोक्रेटिक पार्टी 

अप्रूवल रेटिंग: 2008 के राष्ट्रपति चुनाव से लेकर अगस्त से अक्तूबर 2010 के दौरान बराक ओबामा की अप्रूवल रेटिंग 44% से 45% के बीच स्थिर थी।

राजनीतिक संदर्भ: ओबामा के पहले कार्यकाल का यह चुनाव 2008 की भारी आर्थिक मंदी के साये में लड़ा गया था, जिससे जनता में गहरा असंतोष था। इसके अलावा, 2010 में पारित अफोर्डेबल केयर एक्ट- ओबामाकेयर को लेकर मतदाताओं में आशंकाएं और भ्रम की स्थिति बनी हुई थी, जिसका रिपब्लिकन पार्टी ने जमकर राजनीतिक लाभ उठाया।

नतीजा: इस कम अप्रूवल रेटिंग और जनआक्रोश के चलते डेमोक्रेट्स को प्रतिनिधि सभा में भारी झटका लगा और पार्टी ने 63 सीटें गंवाईं।

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2014 का चुनाव: बराक ओबामा, डेमोक्रेटिक पार्टी 

अप्रूवल रेटिंग: अगस्त से अक्तूबर 2014 के दौरान ओबामा की अप्रूवल रेटिंग 41% से 43% के स्तर पर आ गई थी।

राजनीतिक संदर्भ: यह ओबामा का दूसरा कार्यकाल था। ऐतिहासिक रूप से राष्ट्रपतियों के दूसरे कार्यकाल के मध्यावधि चुनावों में उनकी लोकप्रियता और राजनीतिक ऊर्जा में गिरावट देखने को मिलती है। इस चुनाव में दक्षिण और मध्य-पश्चिम के राज्यों में रिपब्लिकन पार्टी का प्रभाव और मजबूत हुआ।

नतीजा: कमजोर रेटिंग और दूसरे कार्यकाल की थकान के कारण डेमोक्रेट्स ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट सीटें गंवाईं। सीनेट का तो बहुमत भी रिपब्लिकन पार्टी के पास चला गया।


2018 का चुनाव: डोनाल्ड ट्रंप, रिपब्लिकन पार्टी

अप्रूवल रेटिंग: अगस्त से अक्टूबर 2018 के दौरान डोनाल्ड ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग काफी निचले- 39% से 44% के बीच रही।

राजनीतिक संदर्भ: ट्रंप प्रशासन के शुरुआती दो वर्षों की नीतियों और कार्यशैली को लेकर मतदाताओं में ध्रुवीकरण और विरोध देखने को मिला। हालांकि, यह विरोध पूरे देश और दोनों सदनों में एक समान नहीं था; रिपब्लिकन पार्टी को सीनेट में केवल नौ सीटें बचानी थीं, जिसका उन्हें रणनीतिक और भौगोलिक फायदा मिला।

नतीजा: कम अप्रूवल रेटिंग के चलते प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन पार्टी को 41 सीटों का नुकसान हुआ और बहुमत छिन गया, लेकिन अनुकूल चुनावी नक्शे के दम पर उन्होंने सीनेट में सीटें जोड़कर अपना नियंत्रण बरकरार रखा।

2022 का चुनाव: जो बाइडन, डेमोक्रेटिक पार्टी

अप्रूवल रेटिंग: चुनाव के समय अगस्त में बाइडन की अप्रूवल रेटिंग 44% थी, जो अक्टूबर के अंत तक गिरकर 40% पर आ गई थी।

राजनीतिक संदर्भ: परंपरागत रूप से 40% अप्रूवल रेटिंग वाले राष्ट्रपति के दल को मध्यावधि चुनावों में भारी हार का सामना करना पड़ता है, और इसी कारण कई विश्लेषक एक बड़ी लाल लहर की उम्मीद कर रहे थे। इसके विपरीत, ऐतिहासिक रुझानों को धता बताते हुए बाइडन के डेमोक्रेट्स ने अप्रत्याशित मजबूती दिखाई।

नतीजा: भारी नुकसान की आशंकाओं के बावजूद, डेमोक्रेट्स ने प्रतिनिधि सभा में केवल 9 सीटें गंवाईं (जिससे सदन पर रिपब्लिकन का मामूली नियंत्रण हुआ) और सीनेट में 1 सीट का लाभ हासिल कर अपना नियंत्रण सफलतापूर्वक बचा लिया।
 

2026 का चुनाव: डोनाल्ड ट्रंप, रिपब्लिकन पार्टी

अप्रूवल रेटिंग: इस साल जुलाई में ही ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग 35 फीसदी के नीचे आ गई थी, जो कि मौजूदा समय में 31 फीसदी से 34 फीसदी के बीच बनी हुई है। बीते चार मध्यावधि चुनावों में यह किसी राष्ट्रपति की सबसे कम अप्रूवल रेटिंग है। 

राजनीतिक संदर्भ: रिपब्लिकन पार्टी बीते करीब दो साल में अपने अधिकतर वादों को पूरा करने में नाकाम रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध रुकवाने का वादा करने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब तक इस संघर्ष को नहीं रुकवा पाए हैं, जबकि अमेरिका अब ईरान से युद्ध में उलझा है। दूसरी तरफ अमेरिका में पेट्रोल-डीजल और गैसों के दाम आसमान पर हैं और महंगाई भी बढ़ी है, जिसका असर ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी पर पड़ा है।

नतीजा: अब तक आए नतीजों के मुताबिक, डेमोक्रेटिक पार्टी 435 सीट वाली प्रतिनिधि सभा में 219 सीट पर आगे है, जबकि रिपब्लिकन 126 सीट पर है। दूसरी तरफ 100 सीटों वाली सीनेट में डेमोक्रेटिक पार्टी के 53 सांसद आगे हैं, जबकि रिपब्लिकन सिर्फ 41 सीटों पर आगे चल रही है।

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