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अमेरिकी मध्यावधि चुनाव: ट्रंप की पार्टी की हार के भारत के लिए क्या मायने, कैसे सस्ता हो सकता है पेट्रोल?

Wed, 04 Nov 2026 11:31 AM IST
शिवम गर्ग वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: शिवम गर्ग Updated Wed, 04 Nov 2026 11:31 AM IST
सार

अमेरिका के मध्यावधि चुनाव के नतीजे सिर्फ वाशिंगटन की सत्ता का संतुलन नहीं बदलेंगे, उसकी गूंज दुनियाभर में सुनाई देगी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के कमजोर पड़ने का असर ईरान युद्ध पर भी पड़ेगा। इससे कच्चे तेल की कीमतों, भारत की तेल कंपनियों, भारत-अमेरिका ट्रेड डील, एच-1बी वीजा, पाकिस्तान से जुड़े सवालों और भारतीय शेयर बाजार सब प्रभावित होंगे। आइए जानते हैं कि कैसे...

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US Midterm Elections 2026: How Trump Party Loss Could Impact India, Oil Prices, H-1B Visa and Pakistan
ट्रंप की हार से भारत को कितना फायदा? - फोटो : Amar Ujala Graphics

विस्तार

अमेरिका में सत्ता के पलड़े का झुकाव बदला, तो असर समंदर पार भारत तक पहुंचेगा। अब ईरान युद्ध पर ट्रंप के हाथ बंध सकते हैं। भारत-अमेरिका के बीच हो रही ट्रेड डील पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, राष्ट्रपति होने के नाते कई मुद्दों पर ट्रंप अपने वीटो का इस्तेमाल करेंगे, लेकिन हलचल होना तय है।

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वो बड़ी बातें जो आपको जाननी चाहिए:

  • मिडटर्म चुनाव में हार के बाद ट्रंप के लिए ईरान युद्ध पूरी ताकत से जारी रखना और मुश्किल हो सकता है। 
  • युद्ध में कमी या समाधान से तेल की कीमतें घटेंगी, भारत की तेल मार्केटिंग कंपनियों को बड़ी राहत मिल सकती है।
  • भारत-अमेरिका ट्रेड डील में बदलाव या अड़चनें आ सकती हैं, लेकिन पूरी तरह पटरी से उतरने की आशंका कम। 
  • एच-1बी पर अमेरिकी कांग्रेस की निगरानी बढ़ सकती है, बड़े नीतिगत बदलाव की संभावना कम। 
  • मिडटर्म नतीजे वैश्विक लिक्विडिटी, डॉलर, कच्चे तेल और दुनियाभर समेत भारतीय शेयर बाजार की चाल तय करेंगे।

ईरान युद्ध और तेल की कीमतों पर क्या असर होगा और भारत को क्या फायदा मिलेगा?

मिडटर्म चुनाव में हार की वजह से ट्रंप के लिए ईरान के खिलाफ युद्ध को पूरी ताकत से जारी रखना और मुश्किल हो सकता है। उन पर दो मोर्चों पर दबाव बढ़ने का अनुमान है: सैन्य खर्च और तेल की बढ़ती कीमतें। युद्ध में किसी भी तरह की कमी या समाधान का वैश्विक तेल और ऊर्जा कीमतों पर तुरंत असर होगा। भू-राजनीतिक अनिश्चितता कुछ हद तक बनी रह सकती है, लेकिन संभावित संघर्षविराम से तेल की कीमतों में नरमी आ सकती है। भारत अपने ईंधन की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में कीमतों में गिरावट का भारतीय तेल मार्केटिंग कंपनियों के आयात बिलों पर बड़ा असर पड़ेगा। अगर आयात की लागत कम होती है तो भारतीय उपभोक्ता आने वाले महीनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कुछ कमी की उम्मीद कर सकते हैं।

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भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर क्या असर पड़ सकता है?

अमेरिकी कांग्रेस के आंकड़ों में बदलाव की स्थिति में भारत-अमेरिका ट्रेड डील में कुछ बदलाव या अड़चनें आ सकती हैं। टैरिफ के अलावा इस डील में ऊर्जा, विनिर्माण और निवेश से जुड़ी प्रतिबद्धताएं भी शामिल हैं, जिन पर सांसदों की ओर से अतिरिक्त पड़ताल हो सकती है। सांसद इन मुद्दों को दबाव के औजार के रूप में भी इस्तेमाल करने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, डील में पूरी तरह से व्यवधान आने की उम्मीद नहीं है क्योंकि रिपब्लिकन और डेमोक्रेट, दोनों भारत के साथ गहरे रिश्तों के पक्षधर हैं।


डेमोक्रेट्स कुछ टैरिफ की समीक्षा के लिए दबाव बना सकते हैं या टैरिफ लगाने की राष्ट्रपति की शक्तियों को सीमित करने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन ऐसे किसी भी बड़े बदलाव को बाधाओं का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति के पास वीटो पावर है और टैरिफ लगाने के लिए कुछ स्वतंत्र अधिकार भी हैं। सिर्फ राजनीतिक संतुलन बदलने से अमेरिकी नीति में तुरंत बदलाव आना जरूरी नहीं।

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एच-1बी वीजा पर इन नतीजों का क्या असर होगा?

डेमोक्रेट्स की जीत से इमिग्रेशन नियमों पर कांग्रेस की निगरानी बढ़ सकती है और रिपब्लिकन समर्थित कुछ प्रस्ताव फिलहाल रुक सकते हैं। हालांकि, बड़े नीतिगत बदलाव की संभावना कम है। अपने दूसरे कार्यकाल के लिए व्हाइट हाउस लौटने के बाद ट्रंप ने कड़े इमिग्रेशन उपायों की घोषणा की थी। इनमें नए एच-1बी वीजा आवेदनों पर 1,00,000 डॉलर की फीस भी शामिल है। 2025 वित्त वर्ष में मंजूर किए गए सभी एच-1बी आवेदनों में भारत में जन्मे लाभार्थियों की हिस्सेदारी 69.9% थी। यानी इस नीति का सबसे बड़ा असर भारतीयों पर पड़ता है।

पाकिस्तान के मामले में भारत की नजर क्यों रहेगी?

डेमोक्रेट्स ट्रंप प्रशासन के साथ पाकिस्तान के लेन-देन की जांच में दिलचस्पी रखते हैं, जो निश्चित रूप से भारत के लिए कूटनीतिक दिलचस्पी का विषय होगा। खासकर क्रिप्टोकरंसी के मामले में पाकिस्तान की भूमिका का मुद्दा डेमोक्रेट्स उठा सकते हैं। बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम का श्रेय लेते रहे हैं। माना जाता है कि ट्रंप के परिवार ने पाकिस्तान क्रिप्टो काउंसिल के साथ डील की है। जिस कंपनी की तरफ से डील होने की चर्चा है, उसमें ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर, उनके बेटे एरिक और डोनाल्ड जूनियर की 60 फीसदी हिस्सेदारी बताई जाती है।  

भारतीय शेयर बाजार पर क्या असर पड़ेगा?

भारतीय शेयर बाजार में घरेलू आर्थिक बुनियाद और FII की वापसी से मजबूती आई है। हालांकि, अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजे वाशिंगटन में सत्ता संतुलन और डोनाल्ड ट्रंप के एजेंडे को प्रभावित करेंगे। इसका असर आने वाले दिनों में वैश्विक लिक्विडिटी, डॉलर, कच्चे तेल और भारतीय इक्विटी बाजारों की चाल पर स्पष्ट रूप से देखने को मिलेगा।

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