फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   US is soft stance on the European Union's decision to impose additional taxes on America big technology companies

पसोपेश में अमेरिका: मंजिल अभी भी दूर, और मुश्किलों से भरा है ग्लोबल मिनिमम टैक्स का रास्ता

Mon, 25 Oct 2021 06:46 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 25 Oct 2021 06:46 PM IST
सार

विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि सीनेट में संधि से संबंधित बिल पारित होने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होगी। यह तभी हासिल हो सकता है, जब कम से कम 17 रिपब्लिकन सीनेटर पार्टी लाइन से हट कर मतदान करें। लेकिन अभी तक इस मुद्दे पर पूरी पार्टी एकजुट है...

विज्ञापन
US is soft stance on the European Union's decision to impose additional taxes on America big technology companies
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन - फोटो : पीटीआई (फाइल)

विस्तार

अंतरराष्ट्रीय न्यूनतम कॉरपोरेट टैक्स के प्रस्ताव को अमली जामा पहनाने के लिए बातचीत में जुटे अधिकारियों का मनोबल पिछले हफ्ते बढ़ा। ऐसा अमेरिका की बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों पर अतिरिक्त टैक्स लगाने के यूरोपियन यूनियन के फैसले पर अमेरिका के नरम रुख अख्तियार कर लेने से हुआ। इससे दोनों पक्षों के बीच जारी एक बड़ा विवाद दूर हो गया। इसके बावजूद नई टैक्स व्यवस्था को लागू करने की तैयारियों में जुटे अधिकारी आशंकित हैं। उन्हें भरोसा नहीं है कि अमेरिका इसके लिए होने वाली वैश्विक संधि के प्रावधानों को 2023 तक अपने यहां लागू कर पाएगा।

विज्ञापन

दो तिहाई बहुमत की जरूरत

वैश्विक संधि की तैयारी में धनी देशों के संगठन ऑर्गनाइजेशन फॉर इकॉनमिक को-ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (ओईसीडी) के अधिकारी जुटे हुए हैं। उनकी चिंता का कारण अमेरिका की मौजूदा राजनीतिक स्थिति है। उनके मुताबिक जो बाइडन प्रशासन संधि पर दस्तखत करेगा। लेकिन संधि को अमेरिकी कांग्रेस (संसद) में वह मंजूरी दिलवा पाएगा, इसकी संभावना कम है। विपक्षी रिपब्लिकन पार्टी प्रस्तावित संधि का जोरदार विरोध कर रही है। सीनेट में बिना उसके समर्थन के संधि से संबंधित बिल का पारित होना असंभव माना जा रहा है।

विज्ञापन


विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि सीनेट में संधि से संबंधित बिल पारित होने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होगी। यह तभी हासिल हो सकता है, जब कम से कम 17 रिपब्लिकन सीनेटर पार्टी लाइन से हट कर मतदान करें। लेकिन अभी तक इस मुद्दे पर पूरी पार्टी एकजुट है। सीनेट की एक सुनवाई के दौरान रिपब्लिकन सीनेटर पैट्रिक टूमी ने दो टूक कहा- ‘मेरी राय में नई अंतरराष्ट्रीय टैक्स व्यवस्था का लागू होना संभव नहीं है।’

विज्ञापन
विज्ञापन

पसोपेश में अमेरिका

विशेषज्ञों के मुताबिक अभी सूरत यह है कि अमेरिका ‘आधा इस संधि के अंदर है और आधा बाहर है।’ अगर यही हालत बने रहे तो फिर बहुत से दूसरे देश भी आधे मन से ही इस संधि में शामिल होंगे। वे उन प्रावधानों को जारी रखेंगे, जिनके तहत कम टैक्स दर से उन्हें फायदा होता है। अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन में टैक्स कानून के प्रोफेसर रिउवेन अवी-योनाह ने वेबसाइट पॉलिटिको.कॉम से कहा- ‘अगर वैश्विक संधि नहीं हो पाई, जो भारत जैसे देश डिजिटल टैक्स लगाने पर विचार करेंगे। उस हाल में ऐसे देश एकतरफा कदम उठाना जारी रखेंगे।’


जानकारों का कहना है कि अब भले दुनिया के ज्यादातर देशों के बीच न्यूनतम कॉरपोरेट टैक्स की वैश्विक दर तय करने पर सहमति बन गई हो, लेकिन अमेरिका में अनिश्चितता के कारण प्रस्तावित संधि अभी भी अधर में लटकी हुई है। रिपब्लिकन पार्टी नई व्यवस्था पर सहमत नहीं होगी, यह साफ हो चुका है।

ऐसे में कुछ विशेषज्ञों को उम्मीद अमेरिका में 2017 में किए गए एक प्रावधान पर टिकी है। इसे पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उस समय बनाया था, जब उन्होंने कंपनियों को एक बड़ी टैक्स छूट दी थी। इस प्रावधान को ग्लोबल इन्टैंजिबल लॉ-टैक्स्ड इनकम कहा जाता है। इस प्रावधान का मकसद उन अमेरिकी कंपनियों पर टैक्स लगाना है, जो अपना मुनाफा विदेशों में जमा करती हैं। लेकिन इस प्रावधान के तहत न्यूनतम टैक्स दर 10 फीसदी हैं, जबकि प्रस्तावित वैश्विक व्यवस्था में इसे 15 फीसदी रखने का इरादा है।


इसीलिए ग्लोबल मिनिमम कॉरपोरेट टैक्स की संभावनाओं के बारे में अभी तक आम राय यही है कि अभी इस दिशा में आधी दूरी ही तय हुई है। बाकी आधी दूरी का रास्ता भी भी कठिन है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed