UN में घिरा अमेरिका: मादुरो की गिरफ्तारी से सहयोगी देश भी नाराज, आरोप भी लगाए; लेकिन ट्रंप के दूत का रुख कायम
अमेरिका की तरफ से वेनेजुएला पर किए गए सैन्य अभियान ने वैश्विक राजनीति में गहरी चिंता और विवाद पैदा कर दिया है। इसी क्रम में सोमवार को संयुक्त राष्ट्र ने एक आपात बैठक भी बुलाई, जिसमें अमेरिका के इस कार्रवाई को कई देशों ने अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और संप्रभुता पर हमला बताया है। हालांकि अमेरिका अभी भी अपने रुख पर कायम है।
विस्तार
वेनेजुएला में अमेरिका की कार्रवाई और फिर वहां के अपदस्थ राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को बंधक बनाने के बाद वैश्विक राजनीति में बड़े पैमाने पर तहलका मचा हुआ है। सवाल, समर्थन और विरोध का सिलसिला भी अपने चरम पर है। जद्दोजहद इस बात की बनी हुई है कि अब मादुरो का क्या होगा? बहराल इन सभी चिजों को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सोमवार को एक आपात बैठक बुलाई, जिसमें संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनिया गुटेरेस समेत अमेरिका के सहयोगी देश और विरोध देश सभी ने अमेरिका के इस कार्रवाई का जमकर विरोध किया। हालांकि इस बैठक में अमेरिका अपने रुख पर अभी भी कायम रहा।
आइए पहले इस पूरी कार्रवाई को समझते हैं। बता दें कि अमेरिका ने 3 जनवरी को वेनेजुएला में एक सैन्य अभियान चलाया और राष्ट्रपति निकोलेस मादुरो और उनकी पत्नी को बंधक बना लिया। इस ऑपरेशन के बाद मादुरो और उनकी पत्नी को अमेरिका के एक युद्धपोत पर ले जाया गया और न्यूयॉर्क में अदालत में पेश किया गया। अमेरिका का कहना है कि मादुरो नार्को-टेररिस्ट हैं और उन पर ड्रग्स से जुड़े गंभीर अपराध करने का आरोप है।
संयुक्त राष्ट्र ने अमेरिका पर लगाए आरोप
संयुक्त राष्ट के महासचिव जनरल एंटोनियो गुटेरेस ने इस बैठक में अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन किया है और इस तरह की कार्रवाई भविष्य में देशों के बीच संबंधों के लिए खतरनाक मिसाल बन सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी देश को दूसरे देश की सीमा का उल्लंघन करने या वहां की राजनीति में बल प्रयोग करके हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है।
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रूस, डेनमार्क कोलंबिया सभी ने जताई चिंता
बैठक में रूस ने अमेरिका के इस कार्रवाई की आलोचना की। रूस ने कहा कि अमेरिका खुद को 'सुप्रीम जज' नहीं बना सकता, जो किसी भी देश में अवैध रूप से हमला करके कानून लागू करे। रूस का कहना था कि ये कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता के खिलाफ है।
बैठक में डेनमार्क ने भी इस कार्रवाई को लेकर चिंता जताई। साथ ही कहा कि ग्रीनलैंड की सीमाओं और अधिकारों का उल्लंघन स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी देश को अन्य देशों की सीमाओं में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। वहीं कोलंबिया के राजदूत ने कहा कि अमेरिका का यह अभियान हमारे क्षेत्र में सबसे बुरी तरह का हस्तक्षेप है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को हिंसा या धमकी से लागू नहीं किया जा सकता और आर्थिक हित लोकतांत्रिक प्रक्रिया से ऊपर नहीं हो सकते।
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अपने रुख पर कायम रहा अमेरिका
हालांकि इतने विरोध के बावजूद अमेरिका के राजदूत माइक वाल्ट्ज ने सुरक्षा परिषद में इसे सही ठहराया। साथ ही कहा कि मादुरो जैसे लोगों को 'नार्को-आपराधिक' मानकर कार्रवाई करना आवश्यक था। उन्होंने कहा कि अगर संयुक्त राष्ट्र इन अपराधियों को लोकतांत्रिक नेताओं की तरह देखता है, तो यह संस्था का उद्देश्य ही गलत साबित होता है।
अमेरिका का कहना है कि इस ऑपरेशन का उद्देश्य वेंज़ुएला के तेल संसाधनों पर अस्थायी नियंत्रण रखना और उन पर नीति दबाव डालना भी है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका पहले से लागू तेल संगरोध का पालन करेगा और इसे वेंज़ुएला की नीति बदलने के लिए दबाव के तौर पर इस्तेमाल करेगा।
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