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UN रिपोर्ट में खुलासा: पाकिस्तान-ईरान से निकाले गए अफगानों को तालिबान ने दी यातनाएं, मारने की धमकी भी दी

Thu, 24 Jul 2025 03:00 PM IST
हिमांशु चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: हिमांशु चंदेल Updated Thu, 24 Jul 2025 03:00 PM IST
सार

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान और ईरान से निकाले गए अफगानों को तालिबान ने यातनाएं दीं और धमकाया। इनमें वे लोग भी शामिल हैं जो पहले सरकार में काम करते थे या अल्पसंख्यक पहचान से जुड़े हैं। रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं, बच्चों और यौन अल्पसंख्यकों को भी निशाना बनाया गया है। तालिबान ने सभी आरोपों को खारिज किया है।

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UN report revealed Taliban tortured Afghans expelled from Pakistan Iran also threatened to kill them
संयुक्त राष्ट्र का झंडा - फोटो : ANI

विस्तार

तालिबान सरकार एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों के निशाने पर आ गई है। संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान और ईरान से जबरन निकाले गए कई अफगान नागरिकों को तालिबान ने यातनाएं दीं, धमकाया और मनमाने ढंग से हिरासत में लिया। यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब पाकिस्तान और ईरान लाखों अफगानों को यह कहकर देश से निकाल रहे हैं कि वे अवैध रूप से रह रहे थे।
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संयुक्त राष्ट्र मिशन की रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान लौटे कई लोग तालिबान के हाथों गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन का शिकार हुए। इनमें वे लोग शामिल हैं जो पहले पश्चिम समर्थित सरकार के लिए काम कर चुके थे या ऐसे पेशे से जुड़े थे जो तालिबान की नजरों में संदेहास्पद हैं। कुछ लोगों को जान से मारने की धमकियां मिलीं, तो कई को गुमनाम रहकर जिंदगी बितानी पड़ रही है।
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शारीरिक यातनाओं का दर्दनाक ब्यौरा
रिपोर्ट में एक पूर्व सरकारी अधिकारी का बयान शामिल है, जिसने बताया कि 2023 में लौटने पर उसे बुरी तरह पीटा गया, पानी में डुबोया गया और नकली फांसी की धमकी दी गई। एक अन्य गैर-बाइनरी व्यक्ति ने कहा कि उसे बंदूक की बट से पीटा गया। ये घटनाएं दिखाती हैं कि तालिबान के दावों के उलट, लौटने वाले अफगानों के साथ सख्ती बरती जा रही है।
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महिलाओं-लड़कियों की स्थिति भयावह
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने कहा कि किसी को भी ऐसे देश में नहीं भेजा जाना चाहिए जहां उन्हें उनकी पहचान या इतिहास के कारण उत्पीड़न का सामना करना पड़े। उन्होंने अफगान महिलाओं और लड़कियों की स्थिति को विशेष रूप से चिंताजनक बताया, जिन पर तालिबान की सख्त पाबंदियां हैं। जैसे स्कूल बंद, काम करने पर रोक और सार्वजनिक जगहों पर जाने पर प्रतिबंध।


तालिबान की सफाई और यूएन से अपील
तालिबान प्रशासन ने इन आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि लौटने वालों को दस्तावेज, परिवहन और कानूनी सहायता दी जा रही है। साथ ही, तालिबान ने संयुक्त राष्ट्र से अपील की कि वह जबरन निष्कासन को रोके और अफगान शरणार्थियों को खाना, दवा, शिक्षा और आश्रय जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराए।

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अफगान शरणार्थियों का भविष्य संकट में
अफगानिस्तान से लाखों लोग दशकों से अलग-अलग कारणों से बाहर रह रहे थे। अब वे पाकिस्तान, ईरान या अमेरिका जैसे देशों में कानूनी सुरक्षा खो रहे हैं। अमेरिका में हाल ही में एक अदालत के फैसले से हजारों अफगानों की अस्थायी सुरक्षा समाप्त हो गई। ट्रंप प्रशासन की नीतियों और यात्रा प्रतिबंधों ने स्थिति को और खराब बना दिया है।


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