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Sri Lanka: यूएन ने श्रीलंका की आलोचना की, गायब किए गए लोगों के मामलों में धीमी प्रगति से नाराज

Wed, 08 Oct 2025 12:41 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क Published by: नितिन गौतम Updated Wed, 08 Oct 2025 12:41 PM IST
सार

श्रीलंका में उग्रवादी संगठन लिट्टे के चलते लगभग तीन दशकों तक गृहयुद्ध का दौर रहा। इस दौरान हजारों लोग गायब हुए, जिनमें अधिकतर तमिल शामिल थे। साल 2009 में लिट्टे के खात्मे के साथ गृहयुद्ध खत्म हुआ।

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UN panel slams Sri Lanka slow progress on enforced disappearances
यूएन - फोटो : ANI

विस्तार

संयुक्त राष्ट्र के एक पैनल ने श्रीलंका में जबरन गायब किए गए लोगों के मामलों की धीमी प्रगति को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। यूएन ने श्रीलंका सरकार के लापता व्यक्तियों के कार्यालय (ओएमपी) के प्रदर्शन पर नाराजगी जाहिर की, जिसने गायब किए गए करीब 17 हजार मामलों में से कुछ ही मामलों का खुलासा किया है। मंगलवार को जारी संयुक्त राष्ट्र की जांच एजेंसियों द्वारा गायब किए गए लोगों (यूएनसीईडी) पर रिपोर्ट जारी हुई। 
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ओएमपी के कामकाज को लेकर उठे सवाल
यूएनसीईडी की यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) द्वारा सोमवार को एक प्रस्ताव पारित किए जाने के एक दिन बाद आई है, जिसमें श्रीलंका पर मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (ओएचसीएचआर) के कार्यकाल को दो और वर्षों के लिए बढ़ा दिया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि श्रीलंका सरकार के विभाग ओएमपी को लोगों के गायब होने के 16,966 मामलों मिले, जिनमें से अब तक केवल 23 का ही पता लगाया जा सका है। इससे लापता लोगों के परिवारों की दीर्घकालिक मांगों को पूरा करने के लिए बनी इस संस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।
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सामूहिक कब्रें मिलने पर यूएन ने जताई चिंता
संयुक्त राष्ट्र के पैनल ने श्रीलंका में कम से कम 17 सामूहिक कब्रें मिलने पर भी चिंता जाहिर की। पैनल ने श्रीलंकाई अधिकारियों की सीमित फोरेंसिक क्षमता और राष्ट्रीय आनुवंशिक डेटाबेस सहित मरने वालों के डेटाबेस की कमी की भी आलोचना की। पैनल ने श्रीलंका सरकार से इन कमियों को दूर करने की अपील की। 
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श्रीलंका में उग्रवादी संगठन लिट्टे के चलते लगभग तीन दशकों तक गृहयुद्ध का दौर रहा। इस दौरान हजारों लोग गायब हुए, जिनमें अधिकतर तमिल शामिल थे। साल 2009 में लिट्टे के खात्मे के साथ गृहयुद्ध खत्म हुआ। गृहयुद्ध के दौरान गायब हुए 17 हजार लोगों की जांच के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद श्रीलंका सरकार ने साल 2017 में ओएमपी विभाग की स्थापना की, लेकिन कई वर्ष बीत जाने के बाद भी ओएमपी विभाग कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं कर सका है। 

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