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UN: 'आज की चुनौतियों से निपटने में सक्षम नहीं सुरक्षा परिषद', सुधारों की मांग करते हुए भारत ने क्या-क्या कहा?
Wed, 15 Jul 2026 07:44 PM IST
निर्मल कांत
पीटीआई, संयुक्त राष्ट्र।
पीटीआई, संयुक्त राष्ट्र।
Published by: निर्मल कांत
Updated Wed, 15 Jul 2026 07:44 PM IST
सार
भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मौजूदा व्यवस्था को बदलने की जरूरत जोर दिया। राजदूत पर्वतनैनी हरीश ने कहा कि 80 साल पुराना ढांचा आज की वैश्विक चुनौतियों से निपटने में सक्षम नहीं है और इसमें सुधार जरूरी है। पढ़िए रिपोर्ट-
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राजदूत हरीश पर्वतनैनी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
भारत ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की 80 साल पुरानी व्यवस्था आज की चुनौतियों से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं है। दुनियाभर में जारी संघर्षों के कारण लोगों की तकलीफों को खत्म करने में यह व्यवस्था प्रभावी साबित नहीं हो पाई है। वित्तीय व्यवस्था में बदलाव की जरूरत है, ताकि वह विकासशील देशों की प्राथमिकताओं को बेहतर तरीके से पूरा कर सके।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनैनी ने मंगलवार को महासभा की अनौपचारिक बैठक में यह बात कही। बैठक का विषय'भविष्य के लिए बहुपक्षवाद को उपयुक्त बनाना' था।
राजदूत हरीश पर्वतनैनी ने क्या कहा?
इससे पहले सोमवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 2028-29 के लिए अस्थायी सीट हासिल करने के भारत के आधिकारिक अभियान की शुरुआत की थी। इस कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र के राजदूत, राजनयिक और अधिकारी शामिल हुए थे।
'आज की चुनौतियों से निपटने में सक्षम नहीं 80 साल पुरानी व्यवस्था'
भारत ने मंगलवार को कहा कि सुरक्षा परिषद की खामियों की असली वजह साफ है। पर्वतनैनी ने कहा, 1940 के दशक के लिए बनाई गई 80 साल पुरानी व्यवस्था आज की चुनौतियों से निपटने में सक्षम नहीं है। एक समूह के रूप में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की दिशा में आगे नहीं बढ़ पाया है।
उन्होंने कहा कि अब तक अंतर-सरकारी वार्ता (आईजीएन) प्रक्रिया में चर्चा सिर्फ तैयार किए गए बयानों तक ही सीमित रही है और इसमें कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। कुछ कदम सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गए हैं। यह स्थिति जारी नहीं रखी जा सकती और इसमें बदलाव जरूरी है।
ये भी पढ़ें: अमेरिकी सेना ने दिन के उजाले में शुरू किए हवाई हमले, क्या पश्चिम एशिया में बढ़ेगा तनाव?
भारत ने कहा कि 'भविष्य के लिए समझौते' में आईजीएन से जुड़े कदम इस समझौते के सह-संचालकों ने नहीं, बल्कि उस समय के आईजीएन सह-अध्यक्षों ने तैयार किए थे। भारत को इन कदमों को लेकर कई आपत्तियां थीं, लेकिन सकारात्मक सोच के साथ वह इस समझौते के साथ आगे बढ़ा।
पर्वतनैनी ने कहा, भारत के लिए भविष्य के लिए बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूत बनाने की शुरुआत इस बात से होती है कि वैश्विक संस्थाएं आज की दुनिया की वास्तविक स्थिति को दर्शाएं। इसके लिए सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार, महासभा को फिर से मजबूत करना और आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (ईसीओएसओसी) की भूमिका को मजबूत करना जरूरी है, ताकि आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय तीनों क्षेत्रों में सतत विकास को बढ़ावा दिया जा सके।
ईसीओएसओसी क्या है?
1945 में स्थापित आर्थिक और सामाजिक परिषद (ईसीओएसओसी) चर्चा और नए विचारों को बढ़ावा देने, आगे बढ़ने के रास्तों पर सहमति बनाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तय लक्ष्यों को हासिल करने के प्रयासों के समन्वय के लिए मुख्य मंच है।
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संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनैनी ने मंगलवार को महासभा की अनौपचारिक बैठक में यह बात कही। बैठक का विषय'भविष्य के लिए बहुपक्षवाद को उपयुक्त बनाना' था।
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राजदूत हरीश पर्वतनैनी ने क्या कहा?
- राजदूत हरीश पर्वतनैनी ने कहा, हाल के समय में संयुक्त राष्ट्र को लेकर लोगों की धारणा बदली हुई है।
- उन्होंने कहा कि इसकी मुख्य वजह सुरक्षा परिषद की यह असमर्थता है कि वह दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जारी गंभीर संघर्षों में प्रभावी तरीके से दखल नहीं दे रहा है।
- उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद प्रभावित लोगों की मानवीय पीड़ा को खत्म करने में प्रभावी नहीं रही है।
- पर्वतनैनी ने कहा, इसी वजह से संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के मूल सिद्धांत (अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना) पर सवाल उठने लगे हैं।
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इससे पहले सोमवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 2028-29 के लिए अस्थायी सीट हासिल करने के भारत के आधिकारिक अभियान की शुरुआत की थी। इस कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र के राजदूत, राजनयिक और अधिकारी शामिल हुए थे।
'आज की चुनौतियों से निपटने में सक्षम नहीं 80 साल पुरानी व्यवस्था'
भारत ने मंगलवार को कहा कि सुरक्षा परिषद की खामियों की असली वजह साफ है। पर्वतनैनी ने कहा, 1940 के दशक के लिए बनाई गई 80 साल पुरानी व्यवस्था आज की चुनौतियों से निपटने में सक्षम नहीं है। एक समूह के रूप में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की दिशा में आगे नहीं बढ़ पाया है।
उन्होंने कहा कि अब तक अंतर-सरकारी वार्ता (आईजीएन) प्रक्रिया में चर्चा सिर्फ तैयार किए गए बयानों तक ही सीमित रही है और इसमें कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। कुछ कदम सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गए हैं। यह स्थिति जारी नहीं रखी जा सकती और इसमें बदलाव जरूरी है।
ये भी पढ़ें: अमेरिकी सेना ने दिन के उजाले में शुरू किए हवाई हमले, क्या पश्चिम एशिया में बढ़ेगा तनाव?
भारत ने कहा कि 'भविष्य के लिए समझौते' में आईजीएन से जुड़े कदम इस समझौते के सह-संचालकों ने नहीं, बल्कि उस समय के आईजीएन सह-अध्यक्षों ने तैयार किए थे। भारत को इन कदमों को लेकर कई आपत्तियां थीं, लेकिन सकारात्मक सोच के साथ वह इस समझौते के साथ आगे बढ़ा।
पर्वतनैनी ने कहा, भारत के लिए भविष्य के लिए बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूत बनाने की शुरुआत इस बात से होती है कि वैश्विक संस्थाएं आज की दुनिया की वास्तविक स्थिति को दर्शाएं। इसके लिए सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार, महासभा को फिर से मजबूत करना और आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (ईसीओएसओसी) की भूमिका को मजबूत करना जरूरी है, ताकि आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय तीनों क्षेत्रों में सतत विकास को बढ़ावा दिया जा सके।
ईसीओएसओसी क्या है?
1945 में स्थापित आर्थिक और सामाजिक परिषद (ईसीओएसओसी) चर्चा और नए विचारों को बढ़ावा देने, आगे बढ़ने के रास्तों पर सहमति बनाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तय लक्ष्यों को हासिल करने के प्रयासों के समन्वय के लिए मुख्य मंच है।