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UK economic crisis: बैंक ऑफ इंग्लैंड के अर्थशास्त्री बोले- ब्रिटेनवासी मान लें कि अब वे गरीब हो गए हैं

Thu, 27 Apr 2023 02:57 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 27 Apr 2023 02:57 PM IST
सार

बैंक ऑफ इंग्लैंड के मुख्य अर्थशास्त्री हुव पिल ने कहा है कि इस बात को स्वीकार करते हुए श्रमिकों को अधिक वेतन की मांग छोड़ देनी चाहिए, जबकि कंपनियों को बढ़ी लागत का पूरा हिस्सा उपभोक्ताओं से वसूलने की आदत छोड़ देनी चाहिए...

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UK economic crisis: Bank of England economist said– Britons should accept that they have become poor now
UK economic crisis: Bank of England - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

बैंक ऑफ इंग्लैंड के मुख्य अर्थशास्त्री ने ब्रिटेन के लोगों को यह स्वीकार कर लेने की सलाह दी है कि अब उनकी स्थिति पहले जैसी नहीं रह गई। पहले की तुलना में वे गरीब हो गए हैं। बैंक ऑफ इंग्लैंड ब्रिटेन का सेंट्रल बैंक है।

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बैंक ऑफ इंग्लैंड के मुख्य अर्थशास्त्री हुव पिल ने कहा है कि इस बात को स्वीकार करते हुए श्रमिकों को अधिक वेतन की मांग छोड़ देनी चाहिए, जबकि कंपनियों को बढ़ी लागत का पूरा हिस्सा उपभोक्ताओं से वसूलने की आदत छोड़ देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि फिलहाल ब्रिटेन में ‘पास द पार्सल’ का खेल चल रहा है। इसके तहत कंपनियां और श्रमिक वर्ग दोनों बढ़ी महंगाई का बोझ किसी और पर डालने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन उन्हें अब यह आदत छोड़नी होगी।

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कोलंबिया लॉ स्कूल की तरफ से तैयार एक पॉडकास्ट में भाग लेते हुए पिल ने कहा कि ऊर्जा की महंगाई को देखते हुए यह लाजिमी है कि आम लोग अधिक वेतन की मांग करें। उधर, लागत बढ़ने के कारण रेस्तरां मूल्य वृद्धि कर देंगे। लेकिन अब सबको यह बात याद रखनी होगी कि ब्रिटेन प्राकृतिक गैस का एक बड़ा आयातक है, जिसकी कीमत निर्यात से ब्रिटेन को होने वाली आमदनी की तुलना में बहुत अधिक बढ़ गई है। ब्रिटेन मुख्य रूप से सेवाओं (सर्विसेज) का ही निर्यात करता है।

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पिल ने कहा- ‘आप जिन चीजों को खरीदते हैं, अगर उनकी लागत बढ़ जाती है, तो आपकी स्थिति बदतर होगी ही। लेकिन अब इसे स्वीकार करना होगा कि हालत बदतर हो गई है। वास्तविक खर्च शक्ति को बरकरार रखने की कोशिश अब छोड़नी होगी। लेकिन हम इस हकीकत को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं दिखते हैं। हम यह मानने को तैयार नहीं हैं कि हमारी हालत बिगड़ चुकी है और हम सबको इन हालात का बोझ उठाना होगा।’

पिछले साल बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर एंड्र्यू बेली ने भी ऐसी बात कही थी। उन्होंने कहा था कि कर्मचारियों को वेतन बढ़ाने की मांग नहीं करनी चाहिए, ताकि कीमतों को बेकाबू होने से रोका जा सके। तब बेली के इस बयान की कड़ी आलोचना हुई थी। अखबार द गार्जियन ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि अब पिल की टिप्पणियों को भी सख्त आलोचना झेलनी पड़ सकती है। ब्रिटेन में कई क्षेत्रों के कर्मचारी महंगाई को देखते हुए वेतन वृद्धि की मांग कर रहे हैं। इस मांग पर जोर डालने के लिए लगभग रोजमर्रा के स्तर पर हड़तालें होती रही हैं।

बैंक ऑफ इंग्लैंड की आलोचना उसके बड़े अधिकारियों के व्यवहार के कारण भी हुई है। एक तरफ इन अधिकारियों ने आम कर्मचारियों से वेतन वृद्धि की मांग ना करने को कहा है, वहीं खुद उनके वेतन में लगातार बढ़ोतरी हुई है। बेली को 28 फरवरी 2022 को पूरे हुए साल में चार लाख 95 हजार पाउंड का भुगतान हुआ था। पिल को पिछले वर्ष लगभग छह महीनों के लिए 88 हजार पाउंड का अतिरिक्त भुगतान हुआ। इससे उनकी सालाना तनख्वाह एक लाख 80 हजार पाउंड हो गई। जबकि पिछले वर्ष ब्रिटेन में औसत घरों की सालाना आमदनी सिर्फ 32,300 पाउंड रही।

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