{"_id":"5df711268ebc3e87ba6441d0","slug":"turkey-recep-tayyip-erdogan-threatens-to-close-2-us-military-bases-of-nato-sanctions-donald-trump","type":"story","status":"publish","title_hn":"तुर्की ने अमेरिका को चेताया, कहा- प्रतिबंध बढ़ाए तो देश में मौजूद अमेरिकी बेस होंगे बंद","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
तुर्की ने अमेरिका को चेताया, कहा- प्रतिबंध बढ़ाए तो देश में मौजूद अमेरिकी बेस होंगे बंद
Mon, 16 Dec 2019 11:49 AM IST
अनवर अंसारी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, अंकारा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, अंकारा
Published by: अनवर अंसारी
Updated Mon, 16 Dec 2019 11:49 AM IST
विज्ञापन
recep tayyip erdogan
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमेरिका की तरफ से तुर्की पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों पर राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन ने नाराजगी व्यक्त की है। तुर्की के राष्ट्रपति ने रविवार को कहा कि अब अगर अमेरिका तुर्की पर और प्रतिबंध लगाता है, तो वे देश में मौजूद अमेरिका के इनसर्लिक एयरबेस को बंद कर सकते हैं।
विज्ञापन
एर्दोगन ने अमेरिका को साथ ही यह भी धमकी दी है कि अगर प्रतिबंध जारी रहे तो मलाक्या प्रांत के अदाना में मौजूद कुरेसिच रडार स्टेशन को भी बंद कर दिया जाएगा। कुरेसिच बेस में अमेरिकी सेना के अहम रडार लगे हुए हैं। यह रडार अमेरिका और नाटो संगठन के देशों को मिसाइल लॉन्च की जानकारी देते हैं।
विज्ञापन
गौरतलब हो कि अमेरिकी सीनेट ने बुधवार को ही तुर्की पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया। तुर्की ने पिछले वर्ष रूस से एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदने का समझौता किया था। अमेरिका इसी बात को लेकर नाराज है। ट्रंप प्रशासन ने पहले ही तुर्की से एफ-35 लड़ाकू विमान के सौदे को रद्द कर चुका है। उसके अलावा नाटो देशों ने भी एस-400 की खरीद को लेकर तुर्की से दूरी बनाई है।
विज्ञापन
अमेरिकी संसद में अर्मेनिया नरसंहार पर बिल पास, तुर्की नाराज
अमेरिकी संसद के उच्च सदन (सीनेट) ने हाल ही में 100 साल पहले हुए अर्मेनियन नरसंहार को लेकर भी एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें इस नरसंहार की निंदा की गई थी। अर्मेनियन नरसंहार 24 अप्रैल 1915 से शूरू हुआ, जब ऑटोमान (मौजूदा तुर्की) सरकार ने यहां करीब 15 लाख अल्पसंख्यकों की क्रूर हत्याएं करवाईं थी।
इस नरसंहार को जर्मनी में नाजियों द्वारा यहूदियों की हत्या के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा नरसंहार माना जाता है। अमेरिकी सीनेट ने इसे नरसंहार के बजाय अर्मेनियाई नागरिकों का सामूहिक हत्याकांड बताया है। तुर्की द्वारा इस प्रस्ताव की निंदा की गई थी, कहा गया था कि यह प्रस्ताव दोनों देशों के बीच कड़वाहट का कारण बन सकता है। अमेरिका इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहा है।
अमेरिका कई बार तुर्की पर लगा चुका प्रतिबंध
इससे पहले दो महीने पहले जब तुर्की ने सीरिया में कुर्द विद्रोहियों के खिलाफ ऑपरेशन का ऐलान किया, तो अमेरिकी राष्ट्रपति ने तुर्की को धमकी देते हुए कहा था कि वह तुर्की की अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर देंगे। कुर्दों ने अमेरिका के साथ मिलकर चरमपंथी इस्लामी संगठन आईएस को हराने में मदद की थी। ट्रंप ने एर्दोगन सरकार पर प्रतिबंधों का भी ऐलान किया।
हालांकि, बाद में तुर्की ने कुर्दों के खिलाफ अपनी कार्रवाई को समाप्त कर दिया था। ट्रंप ने उनसे सीरिया को लेकर समझौते की अपील की थी। इसके अलावा रूस से एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदने के लिए भी तुर्की पर काट्सा कानून के तहत कुछ प्रतिबंध लग चुके हैं।