पश्चिम एशिया में फिर शुरू होगी जंग?: 14 दिन के युद्धविराम पर ट्रंप का बड़ा बयान, बोले- शायद आगे नहीं बढ़ाऊंगा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे युद्धविराम को आगे न बढ़ाने के संकेत दिए हैं, जिससे क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई की आशंका बढ़ गई है। दोनों देशों के बीच नई वार्ता की उम्मीद है, लेकिन ट्रंप का रुख कड़ा नजर आ रहा है।
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पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे संघर्ष विराम को लेकर बड़ा संकेत दिया है। उन्होंने कहा है कि मौजूदा सीजफायर को आगे बढ़ाया भी जा सकता है और नहीं भी, यह पूरी तरह हालात पर निर्भर करेगा।
एयर फोर्स वन विमान में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि अगर तय समय तक कोई समझौता नहीं होता है, तो सीजफायर को आगे बढ़ाने की संभावना कम हो सकती है।उन्होंने यह भी संकेत दिया कि हालात बिगड़ने पर सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू हो सकती है। ट्रंप ने कहा 'शायद मैं इसे आगे न बढ़ाऊं, लेकिन नाकाबंदी जारी रहेगी। अगर समझौता नहीं हुआ तो हमें फिर से कार्रवाई करनी पड़ सकती है।'
अमेरिका की रुख: नौसैनिक नाकाबंदी जारी रहेगी
ईरान ने घोषणा की थी कि युद्धविराम की अवधि के दौरान सभी व्यापारिक जहाजों के लिए होर्मुज जलमार्ग पूरी तरह खुला रहेगा। ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने कहा था कि यह व्यवस्था केवल पहले से तय मार्गों के आधार पर लागू होगी। हालांकि, इसके तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दोबारा सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि जब तक समझौता नहीं होता, तब तक ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी जारी रहेगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि बातचीत में आई बाधाओं को जल्द सुलझा लिया जाएगा।
22 अप्रैल को सीजफायर होगा खत्म
गौरतलब है कि मौजूदा सीजफायर 22 अप्रैल को समाप्त होने वाला है और इसी को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की एक नई कोशिश भी सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल सोमवार को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में मुलाकात कर सकते हैं। इस बातचीत का उद्देश्य लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने के लिए एक नया रास्ता निकालना है।
इससे पहले 11 से 12 अप्रैल के बीच इस्लामाबाद में हुई वार्ता को ऐतिहासिक तो माना गया, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका था। इस बातचीत की मध्यस्थता पाकिस्तान ने की थी और यह 1979 की ईरानी क्रांति के बाद पहली सीधी उच्च स्तरीय वार्ता थी।
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