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US vs Iran: कहीं उल्टा न पड़ जाए ईरान पर हमलों का ट्रंप का दांव, तेहरान के पलटवार पर दुनियाभर की निगाहें
Mon, 23 Jun 2025 08:34 AM IST
बशु जैन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन/तेहरान
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन/तेहरान
Published by: बशु जैन
Updated Mon, 23 Jun 2025 08:34 AM IST
सार
ईरान पर हमले करने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जीत को लेकर बड़े दावे किए हैं। उन्होंने कहा कि वे ईरान को परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र नहीं बनने दे सकते। लेकिन ट्रंप का हमलों वाला यह दांव उन पर ही भारी पड़ सकता है। आइए समझते हैं कैसे...?
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ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
- फोटो : PTI
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विस्तार
ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले करके ट्रंप बेशक अपनी बड़ी जीत का दावा कर रहे हैं, लेकिन यह दावा अमेरिकी राष्ट्रपति पर ही भारी पड़ सकता है। ईरान पर हमले करने के बाद ट्रंप ने इस्राइल के प्रति अमेरिकी समर्थन को खुले तौर साझा कर दिया है, लेकिन यह ट्रंप के लिए कूटनीतिक मुश्किलें खड़ी करने वाला है। अब पूरी दुनिया की निगाहें ईरान के पलटवार पर टिकी हुई हैं। ईरान के सामने भी कई चुनौतियां हैं। अगर वह अमेरिकी हमलों का जवाब देता है, तो युद्ध बढ़ेगा। ईरान ऐसा नहीं करता है तो उसके वैश्विक समर्थन पर असर पड़ सकता है। आइए समझते हैं कि कैसे यह ईरान के लिए जीत का मौका है और ट्रंप पर यह दांव उल्टा पड़ सकता है?
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ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई
- फोटो : पीटीआई
ट्रंप ने ईरान के पाले में फेंकी गेंद
अमेरिका ने शनिवार-रविवार की दरमियानी रात ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले किए थे। इन हमलों में ईरान के फोर्डो, इस्फहान और नतांज परमाणु स्थलों को निशाना बनाया गया था। इसके बाद ट्रंप ने कहा था कि ईरान को शांति स्थापित करनी चाहिए। ऐसा करके ट्रंप ने ईरान के पाले में गेंद फेंक दी है। अब अगर ईरान अमेरिकी हमलों का जवाब देता है तो ट्रंप कहानी बनाएंगे कि हमने युद्ध शुरू नहीं किया है और ईरान पर जवाबी हमले करेंगे।
हमलों के बाद ईरान का रुख
अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने कहा था कि हमलों की घटनाएं अपमानजनक हैं। इसके अनंत परिणाम होंगे। संयुक्त राष्ट्र के प्रत्येक सदस्य को इस बेहद खतरनाक, कानूनविरोधी और आपराधिक व्यवहार से चिंतित होना चाहिए।' वैश्विक समुदाय से इस पर ध्यान देने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि वाशिंगटन की ओर से की गई खतरनाक और कानूनविहीन कार्रवाइयों से संयुक्त राष्ट्र के प्रत्येक सदस्य को चिंतित होना चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत प्रावधानों का हवाला देते हुए अराघची ने यह भी कहा था कि ईरान के पास आत्मरक्षा का अधिकार है। वह इसके प्रयोग के लिए स्वतंत्र है। ईरान के पास ऐसे सभी विकल्प सुरक्षित हैं। पोस्ट में कहा गया कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर और इसके प्रावधानों के अनुसार जो आत्मरक्षा में वैध प्रतिक्रिया की अनुमति देते हैं, ईरान अपनी संप्रभुता, हित और लोगों की रक्षा के लिए सभी विकल्प सुरक्षित रखता है।
ये भी पढ़ें: Hormuz Strait: ईरान की होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने की योजना कितनी गंभीर; इसके लिए भारत की क्या तैयारी? जानें
अमेरिका ने शनिवार-रविवार की दरमियानी रात ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले किए थे। इन हमलों में ईरान के फोर्डो, इस्फहान और नतांज परमाणु स्थलों को निशाना बनाया गया था। इसके बाद ट्रंप ने कहा था कि ईरान को शांति स्थापित करनी चाहिए। ऐसा करके ट्रंप ने ईरान के पाले में गेंद फेंक दी है। अब अगर ईरान अमेरिकी हमलों का जवाब देता है तो ट्रंप कहानी बनाएंगे कि हमने युद्ध शुरू नहीं किया है और ईरान पर जवाबी हमले करेंगे।
हमलों के बाद ईरान का रुख
अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने कहा था कि हमलों की घटनाएं अपमानजनक हैं। इसके अनंत परिणाम होंगे। संयुक्त राष्ट्र के प्रत्येक सदस्य को इस बेहद खतरनाक, कानूनविरोधी और आपराधिक व्यवहार से चिंतित होना चाहिए।' वैश्विक समुदाय से इस पर ध्यान देने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि वाशिंगटन की ओर से की गई खतरनाक और कानूनविहीन कार्रवाइयों से संयुक्त राष्ट्र के प्रत्येक सदस्य को चिंतित होना चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत प्रावधानों का हवाला देते हुए अराघची ने यह भी कहा था कि ईरान के पास आत्मरक्षा का अधिकार है। वह इसके प्रयोग के लिए स्वतंत्र है। ईरान के पास ऐसे सभी विकल्प सुरक्षित हैं। पोस्ट में कहा गया कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर और इसके प्रावधानों के अनुसार जो आत्मरक्षा में वैध प्रतिक्रिया की अनुमति देते हैं, ईरान अपनी संप्रभुता, हित और लोगों की रक्षा के लिए सभी विकल्प सुरक्षित रखता है।
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ईरान पर अमेरिका का हमला
- फोटो : Amar Ujala
ईरान के लिए यह जीत का मौका कैसे?
अमेरिकी हमले ईरान के लिए जीत का मौका हैं। अगर ईरान अमेरिका पर जवाबी हमले करता है तो यह उसकी बड़ी लापरवाही होगी। इससे ठीक वैसा ही होगा, जैसा कि ट्रंप चाहते हैं। इसकी बजाय अगर ईरान अमेरिका के खिलाफ शांत रहता है और इस्राइल पर हमले जारी रखता है तो ट्रंप इस संघर्ष से खुद ही हट जाएंगे। जबकि इस्राइल पर अधिक दबाव पड़ेगा। वहीं अगर अमेरिका अब भी ईरान पर हमले करता है तो संदेश जाएगा कि वह इस्राइल की ओर से युद्ध में शामिल हुआ है।
अमेरिकी हमले ईरान के लिए जीत का मौका हैं। अगर ईरान अमेरिका पर जवाबी हमले करता है तो यह उसकी बड़ी लापरवाही होगी। इससे ठीक वैसा ही होगा, जैसा कि ट्रंप चाहते हैं। इसकी बजाय अगर ईरान अमेरिका के खिलाफ शांत रहता है और इस्राइल पर हमले जारी रखता है तो ट्रंप इस संघर्ष से खुद ही हट जाएंगे। जबकि इस्राइल पर अधिक दबाव पड़ेगा। वहीं अगर अमेरिका अब भी ईरान पर हमले करता है तो संदेश जाएगा कि वह इस्राइल की ओर से युद्ध में शामिल हुआ है।
ईरान का फोर्डो परमाणु केंद्र
- फोटो : पीटीआई
परमाणु नीति बदलने का भी अवसर और तीन बड़े फायदे
अमेरिका की कार्रवाई के बाद ईरान को वैश्विक स्तर पर समर्थन मिला है। ट्रंप की कार्रवाई की आलोचना भी हो रही है। ऐसे में इस वक्त ईरान के पास अपनी परमाणु नीति बदलने का भी अवसर है। अब ईरान कह सकता है कि अमेरिकी हमलों के बाद उसकी यूरेनियम की आपूर्ति ध्वस्त हो गई है। इससे यह अस्पष्टता पैदा होगी कि ईरान के पास परमाणु हथियार बनाने की क्षमता है या नहीं। इन हालात में ईरान को तीन बड़े फायदे होंगे। पहला कि वह अमेरिका के साथ सीधे टकराव में देरी कर सकता है। दूसरा परमाणु पारदर्शिता से दूर जाने का अवसर दे सकता है और तीसरा युद्ध के बाद किसी भी वार्ता में लाभ प्रदान करता है।
ये भी पढ़ें: ट्रंप की जोखिम भरी विदेश नीति से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को झटका, अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर...
अमेरिका की कार्रवाई के बाद ईरान को वैश्विक स्तर पर समर्थन मिला है। ट्रंप की कार्रवाई की आलोचना भी हो रही है। ऐसे में इस वक्त ईरान के पास अपनी परमाणु नीति बदलने का भी अवसर है। अब ईरान कह सकता है कि अमेरिकी हमलों के बाद उसकी यूरेनियम की आपूर्ति ध्वस्त हो गई है। इससे यह अस्पष्टता पैदा होगी कि ईरान के पास परमाणु हथियार बनाने की क्षमता है या नहीं। इन हालात में ईरान को तीन बड़े फायदे होंगे। पहला कि वह अमेरिका के साथ सीधे टकराव में देरी कर सकता है। दूसरा परमाणु पारदर्शिता से दूर जाने का अवसर दे सकता है और तीसरा युद्ध के बाद किसी भी वार्ता में लाभ प्रदान करता है।
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डोनाल्ड ट्रंप, राष्ट्रपति, अमेरिका
- फोटो : एएनआई
ट्रंप की मुश्किल कैसे बढ़ रही
ईरान के खिलाफ युद्ध में शामिल होने से ट्रंप की मुश्किलें बढ़ रही हैं। पूर्व अमेरिकियों राष्ट्रपतियों के युद्ध के फैसलों के खिलाफ ट्रंप मुखर रहे हैं। मगर ईरान पर हमले करके ट्रंप ने अपने ही बयान का विरोध किया है। इन हमलों के बाद ट्रंप को डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता घेर रहे हैं। इससे उनकी ही रिपब्लिकन पार्टी के अलग-थलग होने का जोखिम है। अगर ट्रंप ईरान को झुकाने में कामयाब हो जाते हैं तो वे जीत का दावा कर सकते हैं। अगर ऐसा नहीं हो पाता है तो अमेरिका को संघर्ष पैदा करने का दोषी माना जाएगा। यह ट्रंप के लिए मुश्किल भरा होगा। क्योंकि हाल ही में पाकिस्तान ने नोबेल शांति पुरस्कार के लिए ट्रंप का समर्थन किया है। अगर युद्ध बढ़ता है तो यह ब्रांड ट्रंप के लिए बुरा होगा।
ईरान के खिलाफ युद्ध में शामिल होने से ट्रंप की मुश्किलें बढ़ रही हैं। पूर्व अमेरिकियों राष्ट्रपतियों के युद्ध के फैसलों के खिलाफ ट्रंप मुखर रहे हैं। मगर ईरान पर हमले करके ट्रंप ने अपने ही बयान का विरोध किया है। इन हमलों के बाद ट्रंप को डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता घेर रहे हैं। इससे उनकी ही रिपब्लिकन पार्टी के अलग-थलग होने का जोखिम है। अगर ट्रंप ईरान को झुकाने में कामयाब हो जाते हैं तो वे जीत का दावा कर सकते हैं। अगर ऐसा नहीं हो पाता है तो अमेरिका को संघर्ष पैदा करने का दोषी माना जाएगा। यह ट्रंप के लिए मुश्किल भरा होगा। क्योंकि हाल ही में पाकिस्तान ने नोबेल शांति पुरस्कार के लिए ट्रंप का समर्थन किया है। अगर युद्ध बढ़ता है तो यह ब्रांड ट्रंप के लिए बुरा होगा।