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US-China Tariff War: ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच हुई बातचीत, चीन-अमेरिका के बीच टैरिफ पर बन सकती है सहमति

Thu, 05 Jun 2025 06:52 PM IST
पवन पांडेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Published by: पवन पांडेय Updated Thu, 05 Jun 2025 06:52 PM IST
सार

US-China Tariff War: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने गुरुवार को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बातचीत के बाद कहा कि व्यापार गतिरोध की चिंताओं के बीच चीन और अमेरिका ने और टैरिफ वार्ता पर सहमति जताई है। ट्रंप और चीनी नेता शी जिनपिंग ने गुरुवार को ऐसे समय में बात की जब दोनों देशों के बीच टैरिफ वार्ता ठप होने से वैश्विक व्यापार में उथल-पुथल मची हुई है।

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Trump and Xi speak amid stalled negotiations over tariffs that have roiled global trade- Chinese state media
डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग - फोटो : एएनआई

विस्तार

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच गुरुवार को फोन पर बातचीत हुई। यह बातचीत ऐसे समय पर हुई है जब दोनों देशों के बीच व्यापार शुल्क (टैरिफ) को लेकर बातचीत लंबे समय से अटकी हुई है और इसका असर वैश्विक व्यापार पर भी साफ देखा जा रहा है। चीन के विदेश मंत्रालय ने इस फोन वार्ता की पुष्टि करते हुए बताया कि यह कॉल अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से की गई थी। हालांकि, व्हाइट हाउस की तरफ से इस पर कोई तत्काल टिप्पणी नहीं की गई।
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व्यापार वार्ता में रुकावट
दरअसल, अमेरिका और चीन के बीच 12 मई को एक समझौता हुआ था जिसमें दोनों देशों ने व्यापार शुल्क कम करने पर सहमति जताई थी ताकि आगे बातचीत की गुंजाइश बनी रहे। लेकिन उसके बाद से ही वार्ता में गतिरोध आ गया। इसके पीछे की बड़ी वजह दोनों देशों के बीच चल रही आर्थिक प्रतिस्पर्धा है। ट्रंप ने बुधवार को सोशल मीडिया पर लिखा, 'मुझे चीन के राष्ट्रपति शी पसंद हैं और मैं हमेशा उन्हें पसंद करूंगा, लेकिन वह बहुत सख्त हैं और उनके साथ समझौता करना बेहद कठिन है!' अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि जिनपिंग ने उन्हें और प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप को चीन आने के लिए 'विनम्रतापूर्वक' आमंत्रित किया। इसके जवाब में ट्रंप ने भी जिनपिंग को अमेरिका आने का न्योता दिया।
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अमेरिका के आरोप और चीन की नाराजगी
अमेरिका का आरोप है कि चीन महत्वपूर्ण खनिजों के निर्यात में सहयोग नहीं कर रहा है। वहीं चीन का कहना है कि अमेरिका उसके उच्च तकनीकी चिप्स की बिक्री पर प्रतिबंध लगा रहा है और छात्र वीजा पर भी रोक लगा रहा है, जिससे उनके कॉलेज और पीएचडी छात्र प्रभावित हो रहे हैं।
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पहले ट्रंप ने जिनपिंग पर लगाए थे आरोप
बता दें कि, इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर टैरिफ को लेकर हुए समझौते का पूरी तरह से उल्लंघन का आरोप लगाया था। 30 मई को सोशल मीडिया प्लेटफार्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि- दो सप्ताह पहले जब चीन में स्थितियां बदतर होने लगी थीं तब मैंने एक डील के जरिए उन्हें उस स्थिति से बचाया था, लेकिन जब वहां सब कुछ सामान्य हो गया तो उन्होंने समझौते का पूरी तरह से उल्लंघन कर रहे हैं।

अमेरिका और चीन के टैरिफ में बदलाव
बातचीत को मौका देने के लिए ट्रंप ने चीन से आयात होने वाले सामानों पर लगाए गए 145% शुल्क को घटाकर 30% कर दिया है, जो अगले 90 दिनों के लिए लागू रहेगा। इसके जवाब में चीन ने भी अमेरिका से आने वाले सामान पर लगने वाले कर को 125% से घटाकर 10% कर दिया है। हालांकि इन फैसलों से शेयर बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है और वैश्विक व्यापार की स्थिरता पर भी खतरा मंडरा रहा है।

दोनों देशों की अलग-अलग रणनीति
अगर बातचीत फिर से शुरू भी होती है, तब भी दोनों देशों की आर्थिक रणनीति बिल्कुल अलग है। ट्रंप चाहते हैं कि अमेरिका चीन पर अपनी विनिर्माण (फैक्ट्री) जरूरतों के लिए निर्भर न रहे और अमेरिका में फिर से औद्योगीकरण को बढ़ावा मिले। वहीं चीन चाहता है कि वह इलेक्ट्रिक वाहन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी उन्नत तकनीकों में निवेश करता रहे ताकि वह भविष्य की आर्थिक दौड़ में आगे रहे।

व्यापार घाटा और चीन की अर्थव्यवस्था
2024 में अमेरिका ने चीन के साथ 295 अरब डॉलर का व्यापार घाटा झेला है। यानी अमेरिका ने चीन से बहुत अधिक आयात किया, लेकिन निर्यात बहुत कम किया। वहीं चीन खुद एक धीमी होती अर्थव्यवस्था से जूझ रहा है। रियल एस्टेट संकट और कोविड-19 महामारी के कारण लगे लंबे लॉकडाउन ने चीन की घरेलू मांग को कमजोर कर दिया है। इससे चीन की आर्थिक रफ्तार पर असर पड़ा है।


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पिछली बातचीत और फेंटानिल मुद्दा
ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच इससे पहले जनवरी में बातचीत हुई थी, जो शपथग्रहण दिवस से तीन दिन पहले हुई थी। तब उन्होंने व्यापार के अलावा फेंटानिल नामक सिंथेटिक ड्रग को अमेरिका में प्रवेश से रोकने की मांग पर भी चर्चा की थी। ट्रंप चाहते थे कि चीन इस पर सख्त कार्रवाई करे।

क्या है ट्रंप की नाराजगी?
हालांकि ट्रंप ने कई बार आशावाद जताया था कि वह चीन के साथ एक बड़ा व्यापार समझौता कर सकते हैं, लेकिन अब वह निराश दिखाई दे रहे हैं। हाल ही में उन्होंने लिखा, 'बुरी खबर यह है कि चीन ने हमारे साथ हुए समझौते का पूरी तरह उल्लंघन किया है। अब अच्छा इंसान बनने का कोई फायदा नहीं!'

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