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West Asia: ट्रंप ने ईरान को भेजा 15 सूत्रीय युद्धविराम प्रस्ताव, इस बीच सैनिकों की तैनाती भी बढ़ा रहा अमेरिका
Wed, 25 Mar 2026 08:29 AM IST
Nitin Gautam
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: Nitin Gautam
Updated Wed, 25 Mar 2026 08:29 AM IST
सार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 15 सूत्रीय युद्धविराम प्रस्ताव भेजा है। अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्ताव ईरानी अधिकारियों को भेज दिया गया है और यह प्रस्ताव पाकिस्तान की तरफ से ईरान को दिया गया है। जानिए और इस खबर में क्या अपडेट है।
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डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को दिया युद्धविराम का प्रस्ताव
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ईरान को 15 सूत्रीय युद्धविराम प्रस्ताव पेश किया है। यह जानकारी एक ऐसे व्यक्ति ने दी, जिसे इसकी जानकारी है, लेकिन उसे सार्वजनिक रूप से इस मुद्दे पर बोलने की अनुमति नहीं है। यह युद्धविराम प्रस्ताव पाकिस्तान के मध्यस्थों के जरिए ईरान को सौंपा गया है। पाकिस्तान द्वारा ही अमेरिका और तेहरान के बीच मध्यस्थता बातचीत की मेजबानी की पेशकश की गई है।
युद्धविराम प्रस्ताव के साथ ही सैनिकों की तैनाती भी बढ़ा रहा अमेरिका
अमेरिका द्वारा ईरान को यह प्रस्ताव ऐसे समय भेजा गया है जब अमेरिकी सेना क्षेत्र में पहले से तैनात लगभग 50,000 सैनिकों के अलावा अपनी 82वीं एयरबोर्न डिवीजन से कम से कम 1,000 और सैनिकों को पश्चिम एशिया में तैनात करने की तैयारी कर रही है। द न्यूयॉर्क टाइम्स ने मंगलवार को अपनी रिपोर्ट में बताया था कि 15 सूत्रीय योजना ईरानी अधिकारियों को सौंप दी गई है। इस बीच, पेंटागन दो मरीन यूनिट्स की तैनाती की प्रक्रिया में भी है, जिससे क्षेत्र में करीब 5,000 मरीन और हजारों नाविकों की अतिरिक्त तैनाती की जाएगी।
इस्राइल ने ईरान को युद्धविराम प्रस्ताव पर जताई हैरानी
वहीं इस्राइल की सरकार, जो ट्रंप से ईरान के खिलाफ युद्ध जारी रखने की वकालत कर रही थी, वे अमेरिकी प्रशासन द्वारा युद्धविराम प्रस्ताव भेजे जाने से हैरान है। मध्य पूर्व में अतिरिक्त सैनिक और मरीन भेजने की अमेरिकी तैयारियों के बीच इस कदम को ट्रंप की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि युद्धविराम के चलते अमेरिका को आगे की रणनीति बनाने और सैनिकों की तैनाती का समय मिल गया है। ताकि ईरान अगर युद्धविराम पर सहमत नहीं होता है तो आगे के फैसलों को बेहतर तरीके से लागू किया जा सके। व्हाइट हाउस ने इस मामले पर टिप्पणी के अनुरोधों का कोई जवाब नहीं दिया।
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ये भी पढ़ें- US-Iran War: ट्रंप ईरान से युद्ध में लक्ष्य बदल रहे या नाकाम हो रहे? जानें अमेरिका की क्या नीति, असफल क्यों
शांति वार्ता में हैं कई चुनौतियां
अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत को कई बड़ी चुनौतियों का सामना कर सकती है। खासकर ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका की सख्ती अभी भी बनी हुई है।
वहीं इस्राइल ने ईरानी नेतृत्व को निशाना बनाना जारी रखने की बात कही है।
कूटनीतिक स्थिति पर विरोधाभास
ट्रंप ने व्हाइट हाउस में कहा कि अमेरिका बातचीत कर रहा है और इसमें स्टीव विटकॉफ, जारेड कुश्नर, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शामिल हैं। वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची विभिन्न देशों के समकक्षों से चर्चा कर रहे हैं, लेकिन ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर ने अमेरिका के साथ सीधी वार्ता से इनकार किया है। ईरानी सेना ने भी साफ कहा है कि पूरी जीत तक सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी।
कूटनीतिक बातचीत की चर्चाओं के बीच भी हिंसा जारी
इस्राइल के ईरान पर हमले जारी हैं। वहीं ईरान ने भी इस्राइल पर हमले किए हैं। लेबनान, बहरीन, कुवैत और सऊदी अरब सहित पूरे क्षेत्र में हमले हुए हैं। इस्राइल ने बेरूत के दक्षिणी इलाकों में भी हमले किए, जहां ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया गया। इस बीच, लेबनान ने ईरान के राजदूत को देश छोड़ने का आदेश दे दिया है और ईरानी उड़ानों पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। इससे ईरान और लेबनान के संबंधों में भी तनाव बढ़ गया है।
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युद्धविराम प्रस्ताव के साथ ही सैनिकों की तैनाती भी बढ़ा रहा अमेरिका
अमेरिका द्वारा ईरान को यह प्रस्ताव ऐसे समय भेजा गया है जब अमेरिकी सेना क्षेत्र में पहले से तैनात लगभग 50,000 सैनिकों के अलावा अपनी 82वीं एयरबोर्न डिवीजन से कम से कम 1,000 और सैनिकों को पश्चिम एशिया में तैनात करने की तैयारी कर रही है। द न्यूयॉर्क टाइम्स ने मंगलवार को अपनी रिपोर्ट में बताया था कि 15 सूत्रीय योजना ईरानी अधिकारियों को सौंप दी गई है। इस बीच, पेंटागन दो मरीन यूनिट्स की तैनाती की प्रक्रिया में भी है, जिससे क्षेत्र में करीब 5,000 मरीन और हजारों नाविकों की अतिरिक्त तैनाती की जाएगी।
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इस्राइल ने ईरान को युद्धविराम प्रस्ताव पर जताई हैरानी
वहीं इस्राइल की सरकार, जो ट्रंप से ईरान के खिलाफ युद्ध जारी रखने की वकालत कर रही थी, वे अमेरिकी प्रशासन द्वारा युद्धविराम प्रस्ताव भेजे जाने से हैरान है। मध्य पूर्व में अतिरिक्त सैनिक और मरीन भेजने की अमेरिकी तैयारियों के बीच इस कदम को ट्रंप की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि युद्धविराम के चलते अमेरिका को आगे की रणनीति बनाने और सैनिकों की तैनाती का समय मिल गया है। ताकि ईरान अगर युद्धविराम पर सहमत नहीं होता है तो आगे के फैसलों को बेहतर तरीके से लागू किया जा सके। व्हाइट हाउस ने इस मामले पर टिप्पणी के अनुरोधों का कोई जवाब नहीं दिया।
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शांति वार्ता में हैं कई चुनौतियां
अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत को कई बड़ी चुनौतियों का सामना कर सकती है। खासकर ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका की सख्ती अभी भी बनी हुई है।
वहीं इस्राइल ने ईरानी नेतृत्व को निशाना बनाना जारी रखने की बात कही है।
कूटनीतिक स्थिति पर विरोधाभास
ट्रंप ने व्हाइट हाउस में कहा कि अमेरिका बातचीत कर रहा है और इसमें स्टीव विटकॉफ, जारेड कुश्नर, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शामिल हैं। वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची विभिन्न देशों के समकक्षों से चर्चा कर रहे हैं, लेकिन ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर ने अमेरिका के साथ सीधी वार्ता से इनकार किया है। ईरानी सेना ने भी साफ कहा है कि पूरी जीत तक सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी।
कूटनीतिक बातचीत की चर्चाओं के बीच भी हिंसा जारी
इस्राइल के ईरान पर हमले जारी हैं। वहीं ईरान ने भी इस्राइल पर हमले किए हैं। लेबनान, बहरीन, कुवैत और सऊदी अरब सहित पूरे क्षेत्र में हमले हुए हैं। इस्राइल ने बेरूत के दक्षिणी इलाकों में भी हमले किए, जहां ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया गया। इस बीच, लेबनान ने ईरान के राजदूत को देश छोड़ने का आदेश दे दिया है और ईरानी उड़ानों पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। इससे ईरान और लेबनान के संबंधों में भी तनाव बढ़ गया है।
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