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उपलब्धि : दुनिया में पहली बार छह माह के बच्चे के शरीर में दो जरूरी अंगों का प्रत्यारोपण किया

Sun, 13 Mar 2022 05:01 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, लंदन।
एजेंसी, लंदन। Published by: Jeet Kumar Updated Sun, 13 Mar 2022 05:01 AM IST
सार

‘साइंस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चे का नाम ईस्टन है। हॉस्पिटल में पीडियाट्रिक कार्डियक सर्जरी के प्रमुख डॉ, जोसेफ डब्ल्यू तुरेक के मुताबिक, यह सर्जरी भविष्य में ठोस अंग प्रत्यारोपण के तरीकों और संभावनाओं को बदल कर रख देगी।

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Transplantation of two essential organs in a six month old baby for the first time in the world
सांकेतिक तस्वीर.... - फोटो : Social media

विस्तार

ब्रिटेन में छह माह के एक बच्चे के शरीर में एक साथ दो जरूरी अंगों का प्रत्यारोपण किया गया। पहला अंग खून की सप्लाई के लिए तो दूसरा शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए किया गया है। ड्यूक यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में हुई इस सर्जरी को दुनिया की पहली कॉम्बिनेशन सर्जरी बताया गया है। जब इतने छोटे बच्चे के शरीर में नया दिल और इम्यून ग्लैंड का एक साथ प्रत्यारोपण किया गया है।

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‘साइंस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चे का नाम ईस्टन है। हॉस्पिटल में पीडियाट्रिक कार्डियक सर्जरी के प्रमुख डॉ, जोसेफ डब्ल्यू तुरेक के मुताबिक, यह सर्जरी भविष्य में ठोस अंग प्रत्यारोपण के तरीकों और संभावनाओं को बदल कर रख देगी।
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तुरेक ने कहा, ईस्टन कमजोर दिल के साथ पैदा हुआ था। साथ ही उसके प्रतिरोधक ग्रंथि थाइमस में भी दिक्कत थी। यह ग्रंथि शरीर में प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने वाले टी-सेल्स को जन्म देती है। ईस्टन को पिछले साल अगस्त में नया दिल और थाइमस ग्लैंड लगाया गया था। इसे लगाने की तकनीक भी ड्यूक यूनिवर्सिटी में ही विकसित की गई थी।
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तुरेक ने बताया कि थाइमस को विशेष तरीके से कल्चर और प्रोसेस किया गया था। ऐसी सर्जरी में डॉक्टर अक्सर इम्युनोसप्रेसिव दवा देते हैं, ताकि सर्जरी के दौरान या उसके तत्काल बाद शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बाहर से आ रहे अंग को अस्वीकार न करे। इन दवाओं को दो अलग-अलग स्टेज में दिया जाता है। इनमें से कुछ इतने खतरनाक होते हैं, कि उनके दुष्परिणाम जिंदगी भर रहता है। 

ऐसे हुई सर्जरी
डॉक्टरों की टीम ने बच्चे को किसी भी तरह के इम्युनोसप्रेसिव दवा देने के बजाय डोनर के शरीर से नए दिल के साथ थाइमस का नया ऊतक प्रत्यारोपित करने की भी योजना बनाई। यानी जिस शरीर से दिल आ रहा है, उसी शरीर से प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने की ग्रंथि भी। यानी रिसीवर के शरीर की इम्युनिटी नए दिल को आसानी से स्वीकार कर लेगी।

10 से 15 वर्ष होती है प्रत्यारोपित अंग की उम्र
डॉ. जोसेफ ने बताया कि किसी भी प्रत्यारोपित अंग की उम्र नए शरीर में 10 से 15 साल ही होती है। इसलिए हमने एक नया विकल्प निकाला। ईस्टन कमजोर दिल के साथ पैदा हुआ था। साथ ही उसके प्रतिरोधक ग्रंथि थाइमस में भी दिक्कत थी।  


भविष्य में बच सकती हैं कई जानें...
ड्यूक यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन में सर्जरी विभाग के प्रमुख एलेन डी. कर्क ने कहा कि अगर बच्चा सेहतमंद रहता है तो हम इस तरीके को भविष्य में अन्य लोगों पर भी इस्तेमाल करके उनकी जान बचा सकते हैं।

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