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हवाना सिंड्रोम: क्या झींगुर से डर गई अमेरिकी सरकार या कूटनीतिक कारणों के चलते छुपा रही है सच?

Sat, 02 Oct 2021 06:10 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 02 Oct 2021 06:10 PM IST
सार

जेसॉन रिपोर्ट में कहा गया है कि रेडियो या माइक्रोवेव या सोनिक किरणों के प्रभाव से हवाना सिंड्रोम के लक्षण उभरते हैं, इस बात का कोई साक्ष्य नहीं है। बल्कि कान में शोर सुनाई देने वाले जैसे लक्षण झींगुर के कारण महसूस हो सकते हैं। 2019 में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के अनुसंधानकर्ता भी इस निष्कर्ष पर पहुंचे थे कि झींगुर जैसा कोई जीव रहस्यमय शोर का कारण हो सकता है...

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three years old study revealed in US, that there was no evidence of microwave or ultrasound attacks in case of Havana syndrome
हवाना सिंड्रोम: कमला हैरिस - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

हाल में अमेरिकी अधिकारियों के ‘हवाना सिंड्रोम’ से पीड़ित होने की चर्चा तेज रही है। अमेरिकी उप राष्ट्रपति कमला हैरिस की दक्षिण-पूर्वी एशिया की पिछली यात्रा के दौरान उनके साथ एक अधिकारी के भी अचानक इस समस्या से पीड़ित हो जाने की खबर आई थी। अमेरिकी सरकार का दावा रहा है कि अमेरिका के राजनयिकों और जासूसों को माइक्रोवेव हथियारों से निशाना बनाया जाता है, जिससे उनका नर्वस सिस्टम प्रभावित हो जाता है।

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लेकिन अब ये सामने आया है कि तीन साल पहले खुद अमेरिका में कराए गए अध्ययन से ये निष्कर्ष निकला था कि हवाना सिंड्रोम के मामलों में माइक्रोवेव या अल्ट्रासाउंड किरणों से हमले किए जाने के कोई साक्ष्य नहीं हैं। ये अध्ययन रिपोर्ट जेसॉन एडवाइजरी ग्रुप ने तैयार की थी। उस रिपोर्ट में यह कहा गया था कि संभवतया ये समस्या झींगुर के कारण होती है। जेसॉन ग्रुप ने कथित हवाना सिंड्रोम के 21 मामलों की जांच की थी। 2018 में उसकी रिपोर्ट को गोपनीय श्रेणी में डाल दिया गया था। तब अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति थे। अब उस रिपोर्ट को डिक्लासीफाइड (सार्वजनिक) किया गया है।
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अमेरिकी वेबसाइट बज़फीड में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक अध्ययनकर्ता इस निष्कर्ष पर पहुंचे थे कि व्यक्तियों में हवाना सिंड्रोम के लक्षण सचमुच उभरते हैं। यानी समस्या वास्तविक है। अध्ययनकर्ताओं के मुताबिक इसके लिए संभवतया साइकोजेनिक प्रभाव जिम्मेदार होते हैं। साइकोजेनिक प्रभाव का मतलब अति चिंता से पैदा हुई एक स्थिति है, जिसमें व्यक्ति खुद को शक्तिहीन महसूस करने लगता है।

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सोनिक किरणों के प्रभाव से उभरते हैं हवाना सिंड्रोम के लक्षण

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक जब जेसॉन रिपोर्ट आई थी, तब उसके निष्कर्षों की जानकारी अमेरिका के नेशनल एकेडमिक्स ऑफ साइंसेज की एक खास समिति को उस समय नहीं दी गई, जब उसने इस मामले की जांच शुरू की थी। उस समिति ने पिछले साल हवाना सिंड्रोम पर शोध किया था। उस शोध का निष्कर्ष था कि माइक्रोवेव का असर इस समस्या के लक्षणों का सबसे अधिक संभावित कारण है। इन लक्षणों में सिरदर्द, चक्कर आना, कान में शोर सुनाई देना, सुनने या देखने में बाधा, नाक से खून आना, वर्टिगो और यादाश्त कमजोर पड़ जाना शामिल हैं।

लेकिन अब जेसॉन रिपोर्ट में कहा गया है कि रेडियो या माइक्रोवेव या सोनिक किरणों के प्रभाव से हवाना सिंड्रोम के लक्षण उभरते हैं, इस बात का कोई साक्ष्य नहीं है। बल्कि कान में शोर सुनाई देने वाले जैसे लक्षण झींगुर के कारण महसूस हो सकते हैं। 2019 में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के अनुसंधानकर्ता भी इस निष्कर्ष पर पहुंचे थे कि झींगुर जैसा कोई जीव रहस्यमय शोर का कारण हो सकता है।

अब ये सवाल उठा है कि ये रिपोर्ट 2018 में आखिर क्यों छिपाई गई। क्या इसकी वजह यह थी कि उससे अमेरिका सरकार के दावे खंडित होते हैं? अमेरिका के पूर्व ट्रंप प्रशासन ने यही दलील देकर क्यूबा से संबंध का दर्जा गिरा दिया था कि हवाना सिंड्रोम क्यूबा से होने वाले हमलों की वजह से होता है। बाद में चीन और रूस से भी ऐसे हमले किए जाने के आरोप लगाए गए।

पिछले हफ्ते अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव ने सर्व-सम्मति से हेल्पिंग अमेरिकन विक्टिम्स एफलिक्टेड बाइ न्यूरोलॉजिकल अटैक्स (हवाना) अधिनियम पारित किया। उससे जरिए सीआईए को लाखों डॉलर देने का रास्ता खुल गया है, जिससे वह कथित हवाना सिंड्रोम के पीड़ितों को मुआवजा देगी।

पिछले महीने क्यूबा का वैज्ञानिकों ने अपनी एक अध्ययन रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें कहा गया था कि सोनिक किरणों से हमले की बात वैज्ञानिक रूप से स्वीकार्य नहीं है। ऐसे हमले होने का कोई वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं हैं। अब सामने आया है कि उनके पहले ही एक अमेरिकी अध्ययन भी इसी निष्कर्ष पर था। लेकिन संभवतया राजनीतिक और कूटनीतिक कारणों से उसे छिपा कर रखा गया था।

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