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फ्लाई एंड वोट अभियान: विदेश से वोट डालने लौट रहे हजारों इस्राइली, नेतन्याहू की पार्टी ने अभियान रोकने की मांग

Sat, 19 Sep 2026 08:03 PM IST
राहुल कुमार अमर उजाला नेटवर्क, तेल अवीव
अमर उजाला नेटवर्क, तेल अवीव Published by: राहुल कुमार Updated Sat, 19 Sep 2026 08:03 PM IST
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Thousands of Israelis returning from abroad to vote; Netanyahu's party demands a halt to the campaign
बेंजामिन नेतन्याहू, प्रधानमंत्री, इस्राइल - फोटो : एक्स/बेंजामिन नेतन्याहू/वीडियो ग्रैब
इस्राइल में आगामी आम चुनाव से पहले विदेशों में रह रहे नागरिकों को वोट डालने के लिए स्वदेश लौटाने के अभियान ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने ‘फ्लाई एंड वोट’ अभियान को रोकने की मांग की है। लिकुड का आरोप है कि अमेरिका से जुड़ा एक संगठन विदेश में रहने वाले इस्राइलियों को चुनाव के लिए वापस लाकर चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, अभियान चलाने वाले संगठन का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी पार्टी को फायदा पहुंचाना नहीं, बल्कि विदेश में रहने वाले इस्राइली नागरिकों को उनके मतदान के अधिकार का इस्तेमाल करने में मदद करना है।
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सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार विवाद की मूल वजह यह है कि इस्राइल में आम नागरिक विदेश से ऑनलाइन, डाक या दूतावास के जरिए वोट नहीं डाल सकते। मतदान करने के लिए उन्हें खुद इस्राइल पहुंचना पड़ता है। ऐसे में विदेशों में रह रहे हजारों नागरिकों को चुनाव के लिए एक साथ स्वदेश लाने का अभियान चुनावी गणित पर असर डाल सकता है।लिकुड को विशेष रूप से इस बात पर आपत्ति है कि अभियान को अमेरिका स्थित अमेरिका- इस्राइल डेमोक्रेसी एड कोएलिशन नामक गैर-लाभकारी संगठन चला रहा है। पार्टी का आरोप है कि यह संगठन विदेशी फंडिंग के जरिए इस्राइल के चुनाव में हस्तक्षेप कर रहा है और विदेशों से ऐसे मतदाताओं को ला रहा है, जिनके लौटने से चुनावी मुकाबले का संतुलन बदल सकता है।लिकुड ने यह भी आरोप लगाया है कि सस्ती उड़ानों, समूह बुकिंग और यात्रा में प्राथमिकता जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना चुनाव कानून के तहत प्रतिबंधित लाभ की श्रेणी में आ सकता है। पार्टी ने केंद्रीय चुनाव समिति से अभियान की जांच और उस पर रोक लगाने की मांग की है।
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35 हजार से अधिक इस्राइलियों ने कराया पंजीकरण
फ्लाई एंड वोट अभियान के अनुसार अब तक 35 हजार से अधिक इस्राइली नागरिक इसमें पंजीकरण करा चुके हैं। संगठन का दावा है कि उसके आंतरिक सर्वे में 50 हजार से अधिक लोगों ने चुनाव के लिए इस्राइल लौटने की इच्छा जताई है।अभियान विदेशों में रहने वाले इस्राइलियों के लिए सस्ती उड़ानें तलाशने, समूह बुकिंग और यात्रा संबंधी व्यवस्थाओं में मदद करता है। संगठन का कहना है कि वह किसी व्यक्ति के टिकट का सीधे भुगतान नहीं करता और किसी मतदाता से यह नहीं पूछा जाता कि वह चुनाव में किसे वोट देगा।
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संगठन ने आरोपों से किया इनकार
अमेरिका-इस्राइल डेमोक्रेसी एड कोएलिशन ने लिकुड के आरोपों को खारिज किया है। संगठन का कहना है कि ‘फ्लाई एंड वोट’ गैर-पक्षपातपूर्ण अभियान है और इसका मकसद केवल विदेशों में रहने वाले इस्राइली नागरिकों को मतदान के लिए देश लौटने में मदद करना है।संगठन की सह-संस्थापक बाटेल ब्लाइश सुल्तानिक ने कहा कि अभियान किसी मतदाता को आर्थिक लाभ नहीं देता और यह जानने की कोशिश भी नहीं करता कि कोई व्यक्ति किसे वोट देने वाला है। उनके मुताबिक मुद्दा सिर्फ मतदान के अधिकार का इस्तेमाल करने का है।

चुनाव में क्यों महत्वपूर्ण हैं विदेश में रहने वाले मतदाता?
इस्राइल की संसद नेसेट में 120 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए 61 सीटों का बहुमत चाहिए। ऐसे में जब चुनावी मुकाबला करीबी हो, तब कुछ हजार वोट भी राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।इस्राइल में विदेश में रहने वाले नागरिकों की संख्या काफी बड़ी है। लेकिन उन्हें आम मतदाताओं की तरह बाहर से वोट डालने की सुविधा नहीं है। इसलिए चुनाव के दौरान विदेश से लौटने वाले नागरिकों की संख्या बढ़ना मतदान के कुल आंकड़े और कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में परिणामों को प्रभावित कर सकता है।लिकुड और विपक्ष के बीच इसी संभावित प्रभाव को लेकर विवाद है। लिकुड अभियान को चुनावी हस्तक्षेप के रूप में देख रही है, जबकि अभियान के समर्थक इसे विदेश में रहने वाले नागरिकों को मतदान का अवसर उपलब्ध कराने की पहल बता रहे हैं।


एयरपोर्ट और उड़ानों को लेकर भी बढ़ा विवाद
विवाद अब सिर्फ ‘फ्लाई एंड वोट’ अभियान तक सीमित नहीं है। विपक्षी नेताओं ने यह आशंका भी जताई है कि चुनाव के आसपास उड़ानों और एयरपोर्ट संचालन में किसी तरह की बाधा विदेश में रहने वाले मतदाताओं के मतदान को प्रभावित कर सकती है।इस्राइली मीडिया में ऐसी रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दलों और नागरिक अधिकार संगठनों ने केंद्रीय चुनाव समिति से चुनाव के दौरान हवाई यातायात सामान्य रखने की मांग की।परिवहन मंत्री मिरी रेगेव ने इन आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि युद्ध के दौरान भी हवाई क्षेत्र खुला रखा गया और चुनाव के दिन उसे बंद करने का कोई सवाल नहीं है।
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