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कोरोना वैक्सीन: ऐसे तय किया जाता है वैक्सीन के दावों का असर
Tue, 24 Nov 2020 07:06 AM IST
Kuldeep Singh
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस
Published by: Kuldeep Singh
Updated Tue, 24 Nov 2020 07:06 AM IST
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कोरोना वायरस से बचाने में फार्मा कंपनी फाइजर और बायोटेक ने अपने कोविड-19 टीके को 95 प्रतिशत प्रभावी बताया है। मॉडर्ना ने 94.5 प्रतिशत, एस्ट्रेजनेका ने 90 प्रतिशत और स्पूतनिक ने अपने टीके को 90 प्रतिशत प्रभावी बताया है।
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टीके की सफलता के लिए कई अन्य बातें भी जरूरी
दूसरी और अधिकतर विशेषज्ञ इन टीकों के 50 से 70 प्रतिशत प्रभावी होने की अपेक्षा कर रहे थे। अमेरिका का खाद्य एवं दवा प्रशासन (एफडीए) 50 प्रतिशत प्रभाव क्षमता पर भी आपात उपयोग के लिए टीके को प्रमाणित करने को तैयार था। ऐसे में क्या दवा कंपनियों के परीक्षणों के आधार पर किए गए दावे सटीक है? इसके मायने क्या हैं? ऐसे कई प्रश्न महामारी से जूझ रहे नागरिकों के मन में आ रहे हैं।
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अगले कुछ हफ्तों में ये टीके आने की उम्मीद जताई जा रही है। कंपनियों के दावों को सही मानें तो लगता है कि 100 लोगों को टीका मिलेगा। उनमें से 90 से 95 लोग कोरोना वायरस की चपेट में नहीं आएंगे। लेकिन परीक्षणों, आंकड़े वास्तव में ऐसे काम नहीं करते। वास्तविक दुनिया में टीका कितना प्रभावी होगा, यह कई बातों से तय होता है।
95 प्रतिशत प्रभावी होने का मतलब?
करीब 100 साल पहले संख्या की विद्वानों ने टीके के परीक्षण के नियम बनाएं। इनके तहत अध्ययन करता परीक्षण में शामिल कुछ लोगों को वास्तविक टीका देते हैं और कुछ को प्लेसीबो यानी बनावटी टीका। वे देखते हैं कि किस समूह में कितने लोग बीमार हुए। फाइजर ने 48,661 लोगों को परीक्षण में शामिल किया जिनमें से 170 में कोविड-19 लक्षण मिले।
इनमें से केवल आठ को असली टीका मिला था बाकी 162 को प्लेसीबो। इसी अंतर के आधार पर कंपनी ने टीके को 95 प्रतिशत प्रभावी माना। लेकिन इस आंकड़े में गैर लक्षण वाले संक्रमित शामिल नहीं हैं। यानी यह नहीं बताया जा सकता कि अगर किसी व्यक्ति को टीका लगा तो उसे कोविड-19 होने की कितनी संभावना बचेगी?
टीकाकरण के बाद भी रहे सतर्क
येल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डेविड पाल टेल के मुताबिक, टीका जान नहीं बचाता टीकाकरण अभियान जान बचाते हैं। टीकाकरण के बाद भी कुछ समय तक मास्क लगाने व सामाजिक दूरी संबंधी लापरवाही नहीं बरती जानी चाहिए। टीके तभी प्रभावी होंगे जब वह बड़े स्तर पर नागरिकों तक पहुंचेंगे।