वर्चुअल दुनिया: आगे बढ़ रहा है मेटावर्स का कारवां, दूतावास निर्माण के लिए हुआ पहला करार
बारबेडोस सरकार ने डिजिटल दुनिया में अपनी मौजूदगी बनाने की एक विस्तृत योजना का एलान किया है। इसके तहत मेटावर्स में दूतावास बनाना उसका सिर्फ एक कदम है। इसके अलावा वह दूसरे वर्चुअल रियलिटी प्लैटफॉर्म्स के साथ भी समझौता करने की तैयारी में है...
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कैरीबियाई द्वीप बारबेडोस ऐसा पहला देश बना है, जिसने मेटावर्स में अपना दूतावास खोलने का फैसला किया है। मेटावर्स एक वर्चुअल दुनिया होगी। अमेरिकी कंपनी फेसबुक के प्रस्तावित मेटावर्स की इस समय दुनिया भर में चर्चा है। लेकिन इस वर्चुअल वर्ल्ड को तैयार करने की कोशिश में दूसरी कंपनियां भी जुटी हुई हैं।
वेस्ट इंडीज के तहत आने वाले देश बारबेडोस ने एक ब्लॉकचेन आधारित प्लैटफॉर्म से करार किया है। ये कंपनी बारबेडोस का डिजिटल दूतावास स्थापित करेगी। ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी की मेटावर्स का निर्माण में अहम भूमिका है। मेटावर्स में डिजिटल दूतावास कायम करने के लिए औपचारिक करार करने वाला बारबेडोस पहला देश है।
एथेरियम आधारित डिजिटल वातावरण में बनेगा दूतावास
बारबेडोस सरकार ने डिसेंट्रालैंड नाम की कंपनी के साथ समझौता किया है। उसका दूतावास एथेरियम आधारित डिजिटल वातावरण में बनेगा। इस बारे में बारबेडोस के विदेश मंत्रालय और विदेश व्यापार मंत्रालय ने औपचारिक घोषणा कर दी है। डिसेंट्रालैंड कंपनी के संचालकों ने भी इस बारे में एक ट्विट के जरिए सूचना दी है। डिसेंट्रालैंड कंपनी की वेबसाइट पर बताया गया है कि वह भूमि अनुबंध, जायदाद अनुबंध, कंटेंट सर्वर और वर्चुअल बाजार की सुविधा देगी।
उधर बारबेडोस सरकार ने डिजिटल दुनिया में अपनी मौजूदगी बनाने की एक विस्तृत योजना का एलान किया है। इसके तहत मेटावर्स में दूतावास बनाना उसका सिर्फ एक कदम है। इसके अलावा वह दूसरे वर्चुअल रियलिटी प्लैटफॉर्म्स के साथ भी समझौता करने की तैयारी में है। बारबेडोस सरकार ने कहा है कि मेटवर्स दूतावास बनाने का फैसला उसने पिछले अगस्त में लिया था। उसने कहा है कि यह परियोजना एक तरह की ‘टेक्नोलॉजी डिप्लोमैसी’ (तकनीक कूटनीति) है। इससे दूसरे देशों के साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान के नए दरवाजे खुलेंगे।
बताया जाता है कि जनवरी तक बारबेडोस का मेटावर्स दूतावास काम करने लगेगा। इस रूप में पहली बार किसी देश ने ‘डिजिटल संप्रभु भूमि’ को मान्यता प्रदान की है। जानकारों का कहना है कि ये परियोजना अभी भी शुरुआती दौर में है। इसे अभी प्रायोगिक चरण में ही माना जाएगा। इसके बावजूद बारबेडोस जैसे छोटे देश की सरकार का यह साहसी कदम है।
बारबेडोस ने 2016 में बनाया था इलेक्ट्रॉनिक डॉलर
बारबेडोस पहले भी ऐसे प्रयोगात्मक कदम उठा चुकी है। 2016 में उसने इलेक्ट्रॉनिक डॉलर तैयार किया था। बारबेडोस की मुद्रा डॉलर है। इलेक्ट्रॉनिक डॉलर की कल्पना संयुक्त अरब अमीरात में उसके मौजूदा राजदूत गैब्रियेल अबेड ने की थी। अबेड ही मेटावर्स दूतावस के प्रोजेक्ट का भी नेतृत्व कर रहे हैं। वेबसाइट कॉइनडेस्क को दिए इंटरव्यू में अबेड ने कहा- ‘किसी देश में प्रवेश करने के लिए वीजा लेने या वीजा फ्री यात्रा करने के लिए दूतावास ही सबसे पहला स्थल होते हैं। क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि ये प्रक्रिया वर्चुअल दुनिया में कैसी होगी? और ई-वीजा आपको कहां से मिल सकेगा?’
जानकारों के मुताबिक मेटावर्स को विकसित करने में अब दुनिया की बड़ी कंपनियां कूद पड़ी हैं। फेसबुक के अलावा माइक्रोसॉफ्ट, रॉबलॉक्स और एनविडिया भी ऐसे सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर बनाने में जुटी हैं, जिससे डिजिटल वर्ल्ड को एक हकीकत में तब्दील किया जा सकेगा।