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China: थाईलैंड-कंबोडिया के राजनयिकों की वार्ता शुरू; मध्यस्थ के रूप में भूमिका मजबूत करना चाहता है चीन

Sun, 28 Dec 2025 07:52 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 28 Dec 2025 07:52 PM IST
सार

China: कंबोडिया और थाईलैंड के विदेश मंत्रियों ने चीन में दो दिवसीय वार्ता शुरू की, जिसका उद्देश्य हालिया संघर्षविराम को स्थायी बनाना है। हाल में सीमा विवाद को लेकर सैन्य झड़प में दोनों देशों में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हुई और पांच लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं। 

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Thai, Cambodian top diplomats meet in China to solidify ceasefire
थाईलैंड और कंबोडिया के राष्ट्रीय ध्वज - फोटो : फ्रीपिक

विस्तार

कंबोडिया और थाईलैंड के शीर्ष राजनयिकों ने रविवार को चीन में दो दिवसीय वार्ता की शुरुआत की। यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब एक दिन पहले दोनों देशों ने नया संघर्षविराम समझौता किया है और चीन इस सीमा विवाद में मध्यस्थ की भूमिका मजबूत करना चाहता है। शनिवार को हुआ संघर्षविराम समझौता दोनों देशों की विवादित सीमा पर कई हफ्तों से जारी संघर्ष को रोकने के लिए किया गया है। इस संघर्ष में अब तक 100 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और दोनों देशों में पांच लाख से अधिक लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं।
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थाईलैंड के विदेश मंत्री सिहासक फुआंगकेओ और कंबोडियाई समकक्ष प्राक सोखोन चीन के दक्षिण-पश्चिमी युन्नान प्रांत में चीनी विदेश मंत्री वांग यी की मध्यस्थता में बातचीत करने वाले हैं। सिहासक के कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि इन वार्ताओं का मकसद संघर्षविराम को लंबे समय तक बनाए रखना और दोनों देशों के बीच स्थायी शांति को बढ़ावा देना है।
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वांग यी के सोमवार को दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें करने और एक त्रिपक्षीय बैठक में शामिल होने की भी योजना है। चीन ने संघर्षविराम के एलान का स्वागत किया है। इस समझौते से सीमा पर संघर्ष रोक दिया गया है और विस्थापित नागरिकों को अपने घरों में लौटने की अनुमति मिली है।

चीन के विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया, चीन कंबोडिया और थाईलैंड के बीच और अधिक गहन तथा विस्तृत संवाद के लिए मंच उपलब्ध कराने और अनुकूल परिस्थितियां बनाने को तैयार है। संघर्षविराम समझौते में 72 घंटे की निगरानी अवधि का प्रावधान है। इसके बाद थाईलैंड ने जुलाई में हुई झड़पों के बाद हिरासत में लिए गए 18 कंबोडियाई सैनिकों को वापस भेजने पर सहमति जताई है। इन सैनिकों की रिहाई कंबोडिया की प्रमुख मांग थी। चीन इस संकट में अमेरिका और मलयेशिया के साथ खुद को मध्यस्थ के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।

जुलाई में मलयेशिया की मध्यस्थता से संघर्षविराम हुआ था और उस पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव का भी असर था। ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर दोनों देश सहमत नहीं हुए तो व्यापार से जुड़े लाभ रोके जा सकते हैं। इन समझौतों के बावजूद थाईलैंड और कंबोडिया के बीच बयानबाजी जारी रही और सीमा पर कम स्तर की हिंसा जारी रही, जो दिसंबर की शुरुआत में फिर से बड़े संघर्ष में बदल गई।

थाईलैंड में आम चुनाव की सरगर्मियां तेज
थाईलैंड में आठ फरवरी को होने वाले आम चुनाव के लिए सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। रविवार को राजनीतिक दलों ने प्रधानमंत्री पद के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम पंजीकृत कराए। इसे चुनाव प्रचार की अनौपचारिक शुरुआत माना जा रहा है।

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प्रधानमंत्री अनुतिन चर्नविराकुल ने इस महीने की शुरुआत में संसद भंग कर दी थी। विपक्षी पार्टी उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी में थी, जिससे बचने के लिए उन्होंने जल्दी चुनाव कराने का फैसला किया। अनुतिन को उम्मीद है कि इससे उनकी 'भूमजैथाई पार्टी' संसद में ज्यादा सीट हासिल कर सकेंगी। चुनाव के साथ ही एक जनमत संग्रह भी होगा। इसमें जनता तय करेगी कि देश को नया संविधान चाहिए या नहीं। प्रगतिशील दलों का मानना है कि मौजूदा व्यवस्था में नौकरशाही के पास बहुत ज्यादा ताकत है, जो अलोकतांत्रिक है। 

इस बार चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिलेगा। मुख्य मुकाबला अनुतिन की रूढ़िवादी पार्टी और प्रगतिशील 'पीपुल्स पार्टी' के बीच है। पीपुल्स पार्टी ने 2023 में सबसे ज्यादा सीट जीती थीं, लेकिन उसे सरकार बनाने से रोक दिया गया था। इसके नेता नत्थाफोंग रुंगपान्यवुत पीएम पद के उम्मीदवार हैं। तीसरी बड़ी ताकत 'फेउ थाई पार्टी' है। इसे पूर्व प्रधानमंत्री थाकसिन शिनावात्रा का समर्थन हासिल है, जो अभी जेल में हैं। इस पार्टी ने 46 वर्षीय योदचानन वोंगसावत को अपना उम्मीदवार बनाया है।

वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति ने भी अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर इसको लेकर पोस्ट किया है। उन्होंने लिखा, मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि थाईलैंड और कंबोडिया के बीच जारी हिंसक झड़पें फिलहाल रुक जाएंगी और दोनों देश मलू संधि के अनुसार फिर से शांति से रहेंगे। ट्रंप ने कहा कि वह दोनों देशों के महान नेताओं को इस तेजऔर निष्पक्ष फैसले पर पहुंचने के लिए बधाई देते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, यह फैसला बहुत तेजी और मजबूती से लिया गया है, जैसाकि ऐसे हालात में होना ही चाहिए। 

थाईलैंड-कंबोडिया युद्धविराम पर क्या बोले ट्रंप?
उन्होंने कहा, अमेरिका को हमेशा की तरह इस प्रक्रिया में मदद करने पर गर्व है। ट्रंप ने इस दावे को भी दोहराया कि पिछले 11 महीनों में उन्होंने आठ युद्धों और संघर्षों को रोकने में भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा, इन घटनाओं के बाद ऐसा लगता है कि अमेरिका ही अब असली संयुक्त राष्ट्र बन गया है, जबकि संयुक्त राष्ट्र इन मामलों में बहुत कम मदद कर पाया है। इनमें रूस और यूक्रेन के बीच जारी मौजूदा संकट भी शामिल है।  डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को अब दुनिया में शांति स्थापित करने के लिए अधिक सक्रिय और प्रभावी भूमिका निभानी चाहिए।

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