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पाकिस्तान की नापाक हरकत, दहशत फैलाने के लिए आतंकी संगठनों को भेजा काबुल

Thu, 04 Jun 2020 03:58 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Sneha Baluni Updated Thu, 04 Jun 2020 03:58 PM IST
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terror groups in pakistan have been expanding their footprint in Afghanistan as part of their strategy
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (फाइल फोटो) - फोटो : social media

पाकिस्तान के आतंकी समूह लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद काबुल में आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए पाकिस्तान द्वारा सावधानीपूर्वक तैयार की गई रणनीति के तहत अफगानिस्तान में अपनी पैठ बढ़ा रहे हैं। ऐसा लगा रहा है कि ये अमेरिकी-तालिबान की शांति प्रक्रिया से बेपरवाह हैं। इस बात की जानकारी इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने दी।

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लश्कर और जैश के आतंकवादियों को पाकिस्तान की इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस यानी आईएसआई इस्लामिक स्टेट-खुरासान प्रांत (आईकेएसपी) में घुसपैठ करवा रही है।

वहींं, अफगान सुरक्षा बलों के प्रमुख अब्दुल्ला ओरकजई उर्फ असलम फारूकी को मौलवी मोहम्मद की जगह आईकेएसपी का नया प्रमुख बनाया गया है। काबुल में आतंकवाद विरोधी अधिकारियों का कहना है कि मौलवी के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से गहरे संबंध हैं। पाकिस्तान के रावलपिंडी में तैयार ब्लूप्रिंट को लेकर दिल्ली में एक काउंटर टेरर अधिकारी ने कहा कि आईएसआई अधिकारियों ने अपने ऑपरेशन को आसान बनाने के लिए आर्थिक और रसद का एक सपोर्ट नेटवर्क बनाया है। 
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लश्कर और तालिबान गुटों के साथ हाल ही में कुनार प्रांत में तालिबान के शैडो गवर्नर ने एक बैठक बुलाई थी। इसमें आईएसआई के अधिकारी भी मौजूद थे। यह खुलासा तब हुआ जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिबंधों की निगरानी टीम ने 6,000-6,500 विदेशी लड़ाकों पर छानबीन शुरू की। इन्हें अफगानिस्तान में शामिल किया गया था।
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यूएनएससी की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि लश्कर-ए-तैयबा में मोहनंद दरगाह, दुर बाबा और नंगरहार प्रांत के शेरजाद जिले के लगभग 800 लड़ाके थे।  

काबुल में सुरक्षा अधिकारियों ने कहा कि लश्कर और जैश के आतंकियों को अफगानिस्तान भेजने के लिए आईएसआई ने 29 फरवरी को तालिबान और संयुक्त राज्य अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि जाल्मे खलीलजाद के बीच समझौते के बाद जोर दिया था।  
 

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