फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Taliban leaders Mullah Yaqoob To Haibatullah Akhundzada Role In Afganistan Latest News Update

तख्तापलट: महज 100 दिन में अफगानिस्तान को मिली शिकस्त, तालिबान के इन चार चेहरों ने बदल दी पूरी बिसात

Mon, 16 Aug 2021 03:06 AM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, काबुल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, काबुल Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Mon, 16 Aug 2021 03:06 AM IST
सार

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अफगान फतह के पीछे तालिबान के चार नेताओं की अहम भूमिका है। फिलहाल इन्हीं चारों के हाथ में तालिबान की कमान है।

विज्ञापन
Taliban leaders Mullah Yaqoob To Haibatullah Akhundzada Role In Afganistan Latest News Update
मुल्ला याकूब, सिराजुद्दीन हक्कानी, हेबतुल्लाह अखुंदजादा और मुल्ला बरादर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा जमा लिया है। वह राजधानी काबुल के मुहाने पर है या यूं कहें कि उसने लगभग काबुल पर भी अपना शिकंजा कस लिया है। अब वह अफगान सत्ता हड़पने के लिए शांतिपूर्ण हस्तांतरण का दिखावा कर रहा है। तालिबान ने इससे पहले 1996 से 2001 तक अफगानिस्तान की सत्ता पर राज किया है। तब उनके नेता मीडिया से दूरी बनाकर रखते थे। 
विज्ञापन


20 साल बाद हालात बदल चुके हैं। तालिबान के प्रवक्ता अब नेताओं का पैगाम अफगानिस्तान और पूरी दुनिया तक पहुंचा रहे हैं। दुनिया को तालिबान के शासन का नया मॉडल बता रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अफगान फतह के पीछे तालिबान के चार नेताओं की अहम भूमिका है। फिलहाल इन्हीं चारों के हाथ में तालिबान की कमान है। आइए, इन चारों के बारे में आपको कुछ बताते हैं...
विज्ञापन


1. हेबतुल्लाह अखुंदजादा
2016 में अमेरिका ने जलालाबाद एयरबेस से तालिबान के एक ठिकाने पर ड्रोन के जरिए हमला किया। हमले में मुल्ला मंसूर अख्तर मारा गया। इसके बाद हेबतुल्लाह अखुंदजादा को तालिबान का सुप्रीम लीडर बना दिया गया। हेबतुल्लाह ने जब यह जिम्मेदारी संभाली, उस वक्त तालिबान अलग-अलग गुटों में बंटने लगा था। अफगानिस्तान की सत्ता दोबारा पाने के लिए साथ रहना जरूरी था और यह काम उसने कर के दिखाया।
विज्ञापन
विज्ञापन


2. मुल्ला बरादर
मुल्ला बरादर का पूरा नाम मुल्ला अब्दुल गनी बरादर है। कंधार में उसका बचपन बीता। कंधार ही वह जगह है, जहां तालिबान जैसे संगठन की नींव पड़ी। 1970 के दशक में जब सोवियत सेना ने मुल्क पर कब्जा किया, तब से ही वो किसी न किसी रूप में सक्रिय है। 

बरादर तालिबान के पूर्व शीर्ष कमांडर मुल्ला उमर का करीबी रह चुका है। 2010 में उसे पाकिस्तान में गिरफ्तार भी किया गया था। बरादर तालिबान के राजनीतिक और लोकतांत्रिक मामले देखता है। अमेरिकी फौज की अफगानिस्तान से वापसी के समझौते पर उसने ही दस्तखत किए थे।

3. सिराजुद्दीन हक्कानी
सिराजुद्दीन 1970-80 के दशक में सोवियत सेनाओं के खिलाफ गोरिल्ला हमले करने वाले जलालुद्दीन हक्कानी का बेटा है। तालिबान में इसका ओहदा नंबर दो का है। अमेरिका जिस हक्कानी नेटवर्क को जड़ से उखाड़ फेंकना चाहता है, सिराजुद्दीन उसका सर्वेसर्वा है। समझने वाली बात यह है कि हक्कानी नेटवर्क और तालिबान नेटवर्क, दोनों का मकसद अफगानिस्तान पर शासन है। हक्कानी नेटवर्क के दहशतगर्द फिदायीन हमले ज्यादा करते हैं। उगाही के लिए यह अफगानिस्तान में रह रहे विदेशी नागरिकों या उनके परिवारों को भी अगवा करता रहा है।


4. मुल्ला याकूब
याकूब तालिबान के फाउंडर मेंबर मुल्ला उमर का बेटा है। इसके पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी से करीबी रिश्ते हैं। तालिबान की जंगजू यूनिट की कमान इसी के हाथ में है। जंग और हमलों की रणनीति भी यही तय करता है। हालांकि, कुछ जानकार मानते हैं कि याकूब की संगठन में भूमिका उतनी मजबूत नहीं है, जितनी बताई जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed