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पीएम मोदी-पेजेशकियन की मुलाकात पर क्यों अमेरिका की नजर?: रूबियो बोले- भारत-ईरान के बीच व्यापार समझौता नहीं
Thu, 03 Sep 2026 01:14 AM IST
देवेश त्रिपाठी
पीटीआई, वॉशिंगटन
पीटीआई, वॉशिंगटन
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Thu, 03 Sep 2026 01:14 AM IST
सार
अमेरिका ने भारत और ईरान के बीच संभावित व्यापारिक समझौते को लेकर सामने आ रही चर्चाओं से दूरी बनाई है। विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की मुलाकात के संदर्भ में कहा कि उन्हें दोनों देशों के बीच ऐसे किसी करार की जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका समेत कई देश ईरानी अधिकारियों के साथ संवाद करते हैं।
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अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने बुधवार को कहा कि उन्हें नहीं लगता कि भारत और ईरान के बीच किसी व्यापार समझौते को लेकर बातचीत हो रही है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देश ईरान की सरकार से बातचीत करते हैं। रूबियो ने यह टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन से इतर हुई मुलाकात को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में की। यह सवाल फॉक्स न्यूज रेडियो के 'द ब्रायन किल्मीड शो' में उनसे पूछा गया था।
कार्यक्रम के दौरान प्रस्तोता ब्रायन किल्मीड ने कहा कि पीएम मोदी और पेजेशकियन की मुलाकात में ऐसा लगा कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते की तैयारी हो रही है। इसके जवाब में रूबियो ने कहा, ''खैर, मुझे नहीं लगता कि भारत और ईरान के बीच कोई व्यापार समझौता है। जाहिर तौर पर, सभी देश अपनी-अपनी विदेश नीति तय करते हैं और दुनिया के कई देश ईरान की सरकार से बातचीत करते हैं।''
ईरान की मदद करने वाले देशों पर अमेरिका क्या करेगा कार्रवाई?
अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा, ''मेरा मतलब है कि हम भी ईरान की सरकार के कुछ लोगों के साथ मिले हैं। कुछ चर्चाओं के संदर्भ में हमारी उनसे बातचीत और संपर्क हुआ है।'' रूबियो ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी देश को ईरान को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने में मदद नहीं करनी चाहिए।
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उन्होंने कहा, ''किसी भी देश को ऐसे तंत्र बनाने में उनकी मदद नहीं करनी चाहिए, जिनके जरिए वे राजस्व जुटा सकें और फिर उसका इस्तेमाल आतंकवाद को बढ़ावा देने के साथ परमाणु हथियार बनाने की कोशिश में कर सकें। और अगर देश ऐसा करने का फैसला करते हैं, तो हमें उन पर भी प्रतिबंध लगाना पड़ेगा।''
पीएम मोदी से पेजेशकियन ने क्यों की मुलाकात?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 अगस्त को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन से इतर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ बैठक की थी। ईरान की अर्द्ध सरकारी तस्नीम न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने आपसी रिश्तों की मौजूदा स्थिति का जायजा लिया और दोनों देशों के लिए अहम क्षेत्रों में ईरान और भारत के बीच आपसी सहयोग को मजबूत करने की जरूरत पर बल दिया गया।
पश्चिम एशिया संकट के बीच दोनों शीर्ष नेताओं में संवाद कायम रहा है। जून में, पीएम मोदी और पेजेशकियन के बीच फोन पर बातचीत हुई थी, जिसमें ईरानी राष्ट्रपति ने भारतीय पीएम को पश्चिम एशिया में हो रही घटनाओं और आगे की राह के बारे में जानकारी दी थी। बातचीत के दौरान, पीएम मोदी ने संघर्ष खत्म करने के लिए बनी सहमति का स्वागत किया था और स्थायी शांति और स्थिरता के लिए लगातार कोशिशों की जरूरत को दोहराया।
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कार्यक्रम के दौरान प्रस्तोता ब्रायन किल्मीड ने कहा कि पीएम मोदी और पेजेशकियन की मुलाकात में ऐसा लगा कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते की तैयारी हो रही है। इसके जवाब में रूबियो ने कहा, ''खैर, मुझे नहीं लगता कि भारत और ईरान के बीच कोई व्यापार समझौता है। जाहिर तौर पर, सभी देश अपनी-अपनी विदेश नीति तय करते हैं और दुनिया के कई देश ईरान की सरकार से बातचीत करते हैं।''
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ईरान की मदद करने वाले देशों पर अमेरिका क्या करेगा कार्रवाई?
अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा, ''मेरा मतलब है कि हम भी ईरान की सरकार के कुछ लोगों के साथ मिले हैं। कुछ चर्चाओं के संदर्भ में हमारी उनसे बातचीत और संपर्क हुआ है।'' रूबियो ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी देश को ईरान को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने में मदद नहीं करनी चाहिए।
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उन्होंने कहा, ''किसी भी देश को ऐसे तंत्र बनाने में उनकी मदद नहीं करनी चाहिए, जिनके जरिए वे राजस्व जुटा सकें और फिर उसका इस्तेमाल आतंकवाद को बढ़ावा देने के साथ परमाणु हथियार बनाने की कोशिश में कर सकें। और अगर देश ऐसा करने का फैसला करते हैं, तो हमें उन पर भी प्रतिबंध लगाना पड़ेगा।''
पीएम मोदी से पेजेशकियन ने क्यों की मुलाकात?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 अगस्त को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन से इतर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ बैठक की थी। ईरान की अर्द्ध सरकारी तस्नीम न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने आपसी रिश्तों की मौजूदा स्थिति का जायजा लिया और दोनों देशों के लिए अहम क्षेत्रों में ईरान और भारत के बीच आपसी सहयोग को मजबूत करने की जरूरत पर बल दिया गया।
पश्चिम एशिया संकट के बीच दोनों शीर्ष नेताओं में संवाद कायम रहा है। जून में, पीएम मोदी और पेजेशकियन के बीच फोन पर बातचीत हुई थी, जिसमें ईरानी राष्ट्रपति ने भारतीय पीएम को पश्चिम एशिया में हो रही घटनाओं और आगे की राह के बारे में जानकारी दी थी। बातचीत के दौरान, पीएम मोदी ने संघर्ष खत्म करने के लिए बनी सहमति का स्वागत किया था और स्थायी शांति और स्थिरता के लिए लगातार कोशिशों की जरूरत को दोहराया।