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कांगो में इबोला का कहर जारी: मई से 3000 से ज्यादा लोगों की मौत; तेजी से फैल रही बीमारी; क्या इसका उपचार है?
Thu, 03 Sep 2026 02:05 AM IST
निर्मल कांत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बुनिया (कांगो)।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बुनिया (कांगो)।
Published by: निर्मल कांत
Updated Thu, 03 Sep 2026 02:05 AM IST
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कांगो और युगांडा में इबोला का प्रकोप
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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कांगो में इबोला के प्रकोप से 3,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। अब तक 6,100 से ज्यादा मामलों की पुष्टि हुई है। बुधवार को जारी सरकार के ताजा आंकड़ों में यह जानकारी सामने आई है। बीमारी बहुत तेजी से फैल रही है। इसकी रफ्तार इतनी ज्यादा है कि इसे रोकने और इसके प्रसार पर नजर रखने की कोशिशें पीछे छूट रही हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, इस प्रकोप में अब तक इबोला के 6,186 मामलों की पुष्टि हुई है। इनमें 3,007 लोगों की मौत हो चुकी है। यह आंकड़ा मई के मध्य से अब तक का है। इसी समय इबोला को वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया गया था। यह अब तक का सबसे तेजी से बढ़ने वाला इबोला प्रकोप बना हुआ है।
लोग इलाका छोड़ने को क्यों मजबूर हैं?
बुनिया के रहने वाले जीन-क्लॉड अंगवांजिया ने बताया कि वह इतुरी प्रांत के सबसे ज्यादा प्रभावित इलाके मंबासा से निकल गए। उन्हें वहां सुरक्षित महसूस नहीं हो रहा था। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों को बहुत कम देखा। संक्रमित लोगों के शवों को भी ठीक तरीके से नहीं संभाला जा रहा था। इससे सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी। उन्होंने कहा कि इलाके में मंडरा रहे खतरे की वजह से उन्हें वहां से भागना पड़ा।
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आम लोगों की जिंदगी पर कितना असर?
इस बीमारी के इतनी तेजी से फैलने से लोगों की जिंदगी पर भी असर पड़ रहा है। बुनिया में सार्वजनिक परिवहन चलाने वाले पैपी बाराका को अपनी गाड़ी में बैठाने वाले यात्रियों की संख्या कम करनी पड़ी है। उन्होंने कहा कि बीमारी की वजह से हर किसी की जान खतरे में है। रोजमर्रा की जिंदगी लगभग रुक गई है। लोगों में डर है।
हाल के हफ्तों में इबोला के मामले तेजी से बढ़े हैं। पिछले हफ्ते उत्तरी किवु के दो और स्वास्थ्य क्षेत्रों में वायरस पहुंच गया। यहां मौत की दर दूसरे प्रभावित प्रांतों से काफी ज्यादा है। अब तक वायरस छह प्रांतों में फैल चुका है।
ये भी पढ़ें: यूक्रेन पर बड़े हमले की तैयारी में पुतिन: ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाने का आदेश, ईरान को भी दिया मदद का भरोसा
अमेरिकी रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) ने मंगलवार को एक रिपोर्ट जारी की। इसमें कहा गया कि संक्रमण को रोकने की कोशिशें तय किए गए लक्ष्यों से पीछे हैं। कई क्षेत्रों में बीमारी तेजी से फैल रही है। यह प्रकोप के बेकाबू विस्तार का संकेत है।
रिपोर्ट के मुताबिक, आंकड़ों से पता चलता है कि ज्यादातर मामले पहले से पता चली संक्रमण की कड़ियों के बाहर सामने आ रहे हैं। नए संक्रमित लोगों में केवल 15 से 20 फीसदी लोग ऐसे हैं, जो पहले से पहचाने गए संक्रमित लोगों के संपर्क में आए थे। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस ने बुधवार को कहा कि संक्रमण फैलने की कुछ कड़ियों के बारे में स्वास्थ्य अधिकारियों को जानकारी ही नहीं है।
उन्होंने कहा कि जब तक संक्रमण फैलने वाली हर कड़ी का पता लगाकर उसे रोका नहीं जाता, तब तक यह महामारी जारी रहेगी। इससे कांगो, उसके पड़ोसी देशों और पूरे क्षेत्र के लिए खतरा बना रहेगा।
स्वास्थ्यकर्मियों के सामने क्या मुश्किलें हैं?
स्वास्थ्यकर्मी बेहद मुश्किल हालात में काम कर रहे हैं। वे अपने वेतन की मांग को लेकर कई बार हड़ताल भी कर चुके हैं।
बीमारी के तेजी से फैलने के पीछे कई कारण हैं। इनमें देश के पूर्वी हिस्से में जारी संघर्ष भी शामिल है। इसी इलाके में इबोला का प्रकोप सबसे ज्यादा है। स्वास्थ्यकर्मियों पर हमले हो रहे हैं। खदानों में काम करने वाले लोग लगातार एक जगह से दूसरी जगह जा रहे हैं। स्वास्थ्य सुविधाएं भी पर्याप्त नहीं हैं। प्रकोप के बीच स्कूल दोबारा खुलने से भी चिंता बढ़ी है। इससे कक्षाओं में संक्रमण फैलने का खतरा पैदा हो गया है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा कि यह प्रकोप अब तक के सबसे घातक इबोला प्रकोप को पीछे छोड़ सकता है। 2014 से 2016 के बीच पश्चिम अफ्रीका में फैले इबोला के प्रकोप में 11 हजार लोगों की मौत हुई थी।
अफ्रीका रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र ने कहा कि असल मामले दर्ज मामलों से तीन गुना तक ज्यादा हो सकते हैं। इसकी वजह बीमारी पर कमजोर नजर रखना और संक्रमित लोगों के संपर्क में आए लोगों का पता नहीं लगा पाना है। इसके बावजूद यह कांगो का अब तक का सबसे घातक इबोला प्रकोप बन गया है।
क्या इबोला का टीका या इलाज है?
मौजूदा प्रकोप बुंडिबुग्यो वायरस की वजह से है। यह एक दुर्लभ वायरस है। इसके लिए अभी कोई टीका (वैक्सीन) या मंजूर इलाज उपलब्ध नहीं है। हालांकि, इस बीमारी से निपटने के लिए दो वैक्सीन विकसित की जा रही हैं। पिछले हफ्ते सरकार ने उत्तर-पूर्वी त्शोपो क्षेत्र के किसांगानी में अग्रिम मोर्चे पर काम कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों को एरवेबो वैक्सीन देना शुरू किया। एरवेबो ने इबोला के पिछले प्रकोपों से निपटने में मदद की है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि यह कुछ सुरक्षा दे सकती है।
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स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, इस प्रकोप में अब तक इबोला के 6,186 मामलों की पुष्टि हुई है। इनमें 3,007 लोगों की मौत हो चुकी है। यह आंकड़ा मई के मध्य से अब तक का है। इसी समय इबोला को वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया गया था। यह अब तक का सबसे तेजी से बढ़ने वाला इबोला प्रकोप बना हुआ है।
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लोग इलाका छोड़ने को क्यों मजबूर हैं?
बुनिया के रहने वाले जीन-क्लॉड अंगवांजिया ने बताया कि वह इतुरी प्रांत के सबसे ज्यादा प्रभावित इलाके मंबासा से निकल गए। उन्हें वहां सुरक्षित महसूस नहीं हो रहा था। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों को बहुत कम देखा। संक्रमित लोगों के शवों को भी ठीक तरीके से नहीं संभाला जा रहा था। इससे सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी। उन्होंने कहा कि इलाके में मंडरा रहे खतरे की वजह से उन्हें वहां से भागना पड़ा।
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आम लोगों की जिंदगी पर कितना असर?
इस बीमारी के इतनी तेजी से फैलने से लोगों की जिंदगी पर भी असर पड़ रहा है। बुनिया में सार्वजनिक परिवहन चलाने वाले पैपी बाराका को अपनी गाड़ी में बैठाने वाले यात्रियों की संख्या कम करनी पड़ी है। उन्होंने कहा कि बीमारी की वजह से हर किसी की जान खतरे में है। रोजमर्रा की जिंदगी लगभग रुक गई है। लोगों में डर है।
हाल के हफ्तों में इबोला के मामले तेजी से बढ़े हैं। पिछले हफ्ते उत्तरी किवु के दो और स्वास्थ्य क्षेत्रों में वायरस पहुंच गया। यहां मौत की दर दूसरे प्रभावित प्रांतों से काफी ज्यादा है। अब तक वायरस छह प्रांतों में फैल चुका है।
ये भी पढ़ें: यूक्रेन पर बड़े हमले की तैयारी में पुतिन: ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाने का आदेश, ईरान को भी दिया मदद का भरोसा
अमेरिकी रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) ने मंगलवार को एक रिपोर्ट जारी की। इसमें कहा गया कि संक्रमण को रोकने की कोशिशें तय किए गए लक्ष्यों से पीछे हैं। कई क्षेत्रों में बीमारी तेजी से फैल रही है। यह प्रकोप के बेकाबू विस्तार का संकेत है।
रिपोर्ट के मुताबिक, आंकड़ों से पता चलता है कि ज्यादातर मामले पहले से पता चली संक्रमण की कड़ियों के बाहर सामने आ रहे हैं। नए संक्रमित लोगों में केवल 15 से 20 फीसदी लोग ऐसे हैं, जो पहले से पहचाने गए संक्रमित लोगों के संपर्क में आए थे। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस ने बुधवार को कहा कि संक्रमण फैलने की कुछ कड़ियों के बारे में स्वास्थ्य अधिकारियों को जानकारी ही नहीं है।
उन्होंने कहा कि जब तक संक्रमण फैलने वाली हर कड़ी का पता लगाकर उसे रोका नहीं जाता, तब तक यह महामारी जारी रहेगी। इससे कांगो, उसके पड़ोसी देशों और पूरे क्षेत्र के लिए खतरा बना रहेगा।
स्वास्थ्यकर्मियों के सामने क्या मुश्किलें हैं?
स्वास्थ्यकर्मी बेहद मुश्किल हालात में काम कर रहे हैं। वे अपने वेतन की मांग को लेकर कई बार हड़ताल भी कर चुके हैं।
बीमारी के तेजी से फैलने के पीछे कई कारण हैं। इनमें देश के पूर्वी हिस्से में जारी संघर्ष भी शामिल है। इसी इलाके में इबोला का प्रकोप सबसे ज्यादा है। स्वास्थ्यकर्मियों पर हमले हो रहे हैं। खदानों में काम करने वाले लोग लगातार एक जगह से दूसरी जगह जा रहे हैं। स्वास्थ्य सुविधाएं भी पर्याप्त नहीं हैं। प्रकोप के बीच स्कूल दोबारा खुलने से भी चिंता बढ़ी है। इससे कक्षाओं में संक्रमण फैलने का खतरा पैदा हो गया है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा कि यह प्रकोप अब तक के सबसे घातक इबोला प्रकोप को पीछे छोड़ सकता है। 2014 से 2016 के बीच पश्चिम अफ्रीका में फैले इबोला के प्रकोप में 11 हजार लोगों की मौत हुई थी।
अफ्रीका रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र ने कहा कि असल मामले दर्ज मामलों से तीन गुना तक ज्यादा हो सकते हैं। इसकी वजह बीमारी पर कमजोर नजर रखना और संक्रमित लोगों के संपर्क में आए लोगों का पता नहीं लगा पाना है। इसके बावजूद यह कांगो का अब तक का सबसे घातक इबोला प्रकोप बन गया है।
क्या इबोला का टीका या इलाज है?
मौजूदा प्रकोप बुंडिबुग्यो वायरस की वजह से है। यह एक दुर्लभ वायरस है। इसके लिए अभी कोई टीका (वैक्सीन) या मंजूर इलाज उपलब्ध नहीं है। हालांकि, इस बीमारी से निपटने के लिए दो वैक्सीन विकसित की जा रही हैं। पिछले हफ्ते सरकार ने उत्तर-पूर्वी त्शोपो क्षेत्र के किसांगानी में अग्रिम मोर्चे पर काम कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों को एरवेबो वैक्सीन देना शुरू किया। एरवेबो ने इबोला के पिछले प्रकोपों से निपटने में मदद की है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि यह कुछ सुरक्षा दे सकती है।