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Taiwan: ताइवान में जनमत संग्रह चुनाव, विपक्षी सांसदों की बर्खास्तगी और परमाणु ऊर्जा के मुद्दे पर हो रहा मतदान
Sat, 23 Aug 2025 01:02 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ताइपे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ताइपे
Published by: नितिन गौतम
Updated Sat, 23 Aug 2025 01:02 PM IST
सार
नेशनलिस्ट पार्टी ने एक तीसरी पार्टी, ताइवान पीपुल्स पार्टी के साथ मिलकर परमाणु ऊर्जा संबंधी एक विधेयक पारित किया है, जिससे सत्तारूढ़ डीपीपी काफी चिंतित है।
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ताइवान में मतदान (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : फ्रीपिक
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विस्तार
ताइवान में शनिवार को रिकॉल वोटिंग (जनमत संग्रह चुनाव) हो रही है। यह मतदान सात विपक्षी सांसदों की विधायिका से बर्खास्तगी और परमाणु ऊर्जा की वापसी पर फैसला लेने के लिए हो रहा है। ताइवान में आखिरी चालू परमाणु रिएक्टर भी पांच महीने पहले बंद हो गया था। हालांकि अब फिर से परमाणु रिएक्टर को शुरू करने पर विचार किया जा रहा है। एक महीने में दूसरी बार हो रही ये रिकॉल वोटिंग सत्ताधारी पार्टी डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी के लिए सत्ता पर नियंत्रण पाने का भी मौका है, क्योंकि 2024 के चुनाव में डीपीपी ने बहुमत खो दिया था।
डीपीपी की चिंता बढ़ी
हालांकि इसकी संभावना कम ही है क्योंकि जुलाई में हुए पहले रिकॉल मतदान में विपक्षी नेशनलिस्ट पार्टी खुद को बचाने में कामयाब रही थी। डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी ने साल 2024 में राष्ट्रपति पद जीता, लेकिन 113 सीटों वाली विधायिका में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला। नेशनलिस्ट, जिसे कुओमिन्तांग या केएमटी के नाम से भी जाना जाता है, ने 52 सीटें जीतीं, जो डीपीपी से एक ज्यादा है। नेशनलिस्ट पार्टी ने एक तीसरी पार्टी, ताइवान पीपुल्स पार्टी के साथ मिलकर परमाणु ऊर्जा संबंधी एक विधेयक पारित किया है, जिससे सत्तारूढ़ डीपीपी काफी चिंतित है।
ये भी पढ़ें- US-India Row: भारत संग बिगड़ते रिश्ते पर एक और पूर्व अमेरिकी अधिकारी की ट्रंप को लताड़; आईना दिखाकर दी नसीहत
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मई में बंद हुआ था आखिरी परमाणु संयंत्र
दरअसल डीपीपी परमाणु ऊर्जा को चरणबद्ध तरीके से समाप्त कर रही है, जो कभी ताइवान को लगभग 20 प्रतिशत बिजली आपूर्ति करती थी। ताइवान के तीन परमाणु संयंत्रों में से अंतिम चालू रिएक्टर 40 वर्षों की सेवा के बाद मई में बंद कर दिया गया था। लेकिन उसी महीने, विधायिका ने नेशनलिस्ट पार्टी के समर्थन से, परमाणु ऊर्जा के विस्तार पर जनमत संग्रह कराने के ताइवान पीपुल्स पार्टी के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। जनमत संग्रह में मतदाताओं से पूछा जा रहा है कि क्या हाल ही में बंद हुए परमाणु संयंत्र को चालू रहना चाहिए, बशर्ते नियामक इस बात पर सहमत हों कि ऐसा करना सुरक्षित है। मानशान संयंत्र, जिसे आमतौर पर तीसरा परमाणु ऊर्जा संयंत्र कहा जाता है, ताइवान के दक्षिणी सिरे के पास है।
परमाणु ऊर्जा के समर्थकों का कहना है कि इससे बिजली के बिल कम होंगे और कृत्रिम बुद्धिमत्ता अनुप्रयोगों से बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी। अमेरिकी चिप दिग्गज कंपनी एनवीडिया के ताइवान में जन्मे संस्थापक जेन्सेन हुआंग ने भी परमाणु ऊर्जा का समर्थन किया।
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डीपीपी की चिंता बढ़ी
हालांकि इसकी संभावना कम ही है क्योंकि जुलाई में हुए पहले रिकॉल मतदान में विपक्षी नेशनलिस्ट पार्टी खुद को बचाने में कामयाब रही थी। डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी ने साल 2024 में राष्ट्रपति पद जीता, लेकिन 113 सीटों वाली विधायिका में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला। नेशनलिस्ट, जिसे कुओमिन्तांग या केएमटी के नाम से भी जाना जाता है, ने 52 सीटें जीतीं, जो डीपीपी से एक ज्यादा है। नेशनलिस्ट पार्टी ने एक तीसरी पार्टी, ताइवान पीपुल्स पार्टी के साथ मिलकर परमाणु ऊर्जा संबंधी एक विधेयक पारित किया है, जिससे सत्तारूढ़ डीपीपी काफी चिंतित है।
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मई में बंद हुआ था आखिरी परमाणु संयंत्र
दरअसल डीपीपी परमाणु ऊर्जा को चरणबद्ध तरीके से समाप्त कर रही है, जो कभी ताइवान को लगभग 20 प्रतिशत बिजली आपूर्ति करती थी। ताइवान के तीन परमाणु संयंत्रों में से अंतिम चालू रिएक्टर 40 वर्षों की सेवा के बाद मई में बंद कर दिया गया था। लेकिन उसी महीने, विधायिका ने नेशनलिस्ट पार्टी के समर्थन से, परमाणु ऊर्जा के विस्तार पर जनमत संग्रह कराने के ताइवान पीपुल्स पार्टी के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। जनमत संग्रह में मतदाताओं से पूछा जा रहा है कि क्या हाल ही में बंद हुए परमाणु संयंत्र को चालू रहना चाहिए, बशर्ते नियामक इस बात पर सहमत हों कि ऐसा करना सुरक्षित है। मानशान संयंत्र, जिसे आमतौर पर तीसरा परमाणु ऊर्जा संयंत्र कहा जाता है, ताइवान के दक्षिणी सिरे के पास है।
परमाणु ऊर्जा के समर्थकों का कहना है कि इससे बिजली के बिल कम होंगे और कृत्रिम बुद्धिमत्ता अनुप्रयोगों से बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी। अमेरिकी चिप दिग्गज कंपनी एनवीडिया के ताइवान में जन्मे संस्थापक जेन्सेन हुआंग ने भी परमाणु ऊर्जा का समर्थन किया।