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Taiwan: चेंग ली-वुन बनीं मुख्य विपक्षी पार्टी की अध्यक्ष, पांच उम्मीदवारों को हराया; नवंबर में संभालेगी पद
Sun, 19 Oct 2025 09:47 AM IST
निर्मल कांत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ताइपे।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ताइपे।
Published by: निर्मल कांत
Updated Sun, 19 Oct 2025 09:47 AM IST
सार
Taiwan: ताइवान की मुख्य विपक्षी नेशनलिस्ट पार्टी (केएमटी) ने पूर्व सांसद चेंग ली-वुन को नया अध्यक्ष चुना। केएमटीको पिछले तीन राष्ट्रपति चुनावों में हार का सामना करना पड़ा है, लेकिन उसकी राजनीति में मजबूत पकड़ बनी हुई है। चेंग नवंबर में पद संभालेंगी।
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ताइवान का राष्ट्रीय ध्वज
- फोटो : फ्रीपिक
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विस्तार
ताइवान की मुख्य विपक्षी 'नेशनलिस्ट पार्टी' ने शनिवार को एक कड़े मुकाबले के बाद पूर्व सांसद चेंग ली-वुन को अपना नया अध्यक्ष चुना। इस चुनाव में चीन की दखलंदाजी के आरोप लग रहे थे। चुनाव में एकमात्र महिला उम्मीदवार चेंग ली-वुन ने सबसे ज्यादा मत हासिल किए। वह खुद को एक बदलावकारी नेता के रूप में पेश कर रही थीं। उन्होंने ताइपे के पूर्व मेयर हाउ लुंग-बिन और चार अन्य उम्मीदवारों को हराया। यह पार्टी चीन के साथ करीबी संबंधों के लिए जानी जाती है और इसे केएमटी के नाम से भी जाना जाता है।
हालांकि, पार्टी को पिछले तीन बार के राष्ट्रपति चुनावों में आजादी समर्थक सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (डीपीपी) से हार का सामना करना पड़ा है। फिर भी केएमटी की ताइवान की राजनीति में मजबूत पकड़ बनी हुई है।
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पार्टी के पास संसद में इतनी सीटें हैं कि वह अपने सहयोगियों के साथ मिलकर बहुमत वाला गठबंधन बना सकती है। कुछ महीने पहले हुए पुनर्चुनाव में भी केएमटी को जीत मिली थी। यह चुनाव उस समय लाए गए कुछ कानूनों के खिलाफ विरोध के चलते हुए थे। ये कानून राष्ट्रपतिकी शक्तियों को कम करने और चीन के पक्ष में माने जा रहे थे।
चेंग नवंबर में अपना पद संभालेंगी और उनके आने से यह तय होगा कि ताइवान चीन के साथ अपने संबंधों को किस दिशा में ले जाएगा। इसके अलावा, वह घरेलू और अंतरराष्ट्रीय नीतियों पर भी असर डालेंगी। वह पार्टी की 2026 के स्थानीय चुनावों में अगुवाई करेंगी। साथ ही, पार्टी 2028 में राष्ट्रपति लाई चिंग-ते के खिलाफ भी उम्मीदवार उतारेगी।
अपने चुनाव प्रचार के दौरान चेंग ने कहा था कि वह पार्टी को 'भेड़' से 'शेर' बनाना चाहती हैं। उन्होंने राष्ट्रपति लाई के उस प्रस्ताव का विरोध किया जिसमें रक्षा बजट को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का पांच फीसदी करने की बात कही गई थी। खास बात यह है कि चेंग कभी खुद भी डीपीपी की सदस्य रह चुकी हैं। चुनाव जीतने के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में चेंग ने कहा कि पार्टी विदेश नीति में समानता, सम्मान और पारस्परिक लाभ के सिद्धांतों का पालन करेगी।
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उन्होंने कहा, हमें ताइवान को किसी संकट का कारण नहीं बनने देना चाहिए। दूसरा, हमें ताइवान को भू-राजनीति की बलि नहीं चढ़ने देना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी शांति बनाए रखने वाली पार्टी बनेगी।
चीन की ताइवान को लेकर मौजूदा सरकार से खासतौर पर टकराव की स्थिति बनी हुई है। बीजिंग राष्ट्रपति लाई को अलगाववादी मानता है और कह चुका है कि अगर जरूरत पड़ी, तो वह ताइवान पर बल प्रयोग भी कर सकता है। हाल के वर्षों में चीन ने ताइवान पर सैन्य, राजनयिक और आर्थिक दबाव बढ़ा दिया है ताकि वहां की सरकार को कमजोर किया जा सके।
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हालांकि, पार्टी को पिछले तीन बार के राष्ट्रपति चुनावों में आजादी समर्थक सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (डीपीपी) से हार का सामना करना पड़ा है। फिर भी केएमटी की ताइवान की राजनीति में मजबूत पकड़ बनी हुई है।
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पार्टी के पास संसद में इतनी सीटें हैं कि वह अपने सहयोगियों के साथ मिलकर बहुमत वाला गठबंधन बना सकती है। कुछ महीने पहले हुए पुनर्चुनाव में भी केएमटी को जीत मिली थी। यह चुनाव उस समय लाए गए कुछ कानूनों के खिलाफ विरोध के चलते हुए थे। ये कानून राष्ट्रपतिकी शक्तियों को कम करने और चीन के पक्ष में माने जा रहे थे।
चेंग नवंबर में अपना पद संभालेंगी और उनके आने से यह तय होगा कि ताइवान चीन के साथ अपने संबंधों को किस दिशा में ले जाएगा। इसके अलावा, वह घरेलू और अंतरराष्ट्रीय नीतियों पर भी असर डालेंगी। वह पार्टी की 2026 के स्थानीय चुनावों में अगुवाई करेंगी। साथ ही, पार्टी 2028 में राष्ट्रपति लाई चिंग-ते के खिलाफ भी उम्मीदवार उतारेगी।
अपने चुनाव प्रचार के दौरान चेंग ने कहा था कि वह पार्टी को 'भेड़' से 'शेर' बनाना चाहती हैं। उन्होंने राष्ट्रपति लाई के उस प्रस्ताव का विरोध किया जिसमें रक्षा बजट को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का पांच फीसदी करने की बात कही गई थी। खास बात यह है कि चेंग कभी खुद भी डीपीपी की सदस्य रह चुकी हैं। चुनाव जीतने के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में चेंग ने कहा कि पार्टी विदेश नीति में समानता, सम्मान और पारस्परिक लाभ के सिद्धांतों का पालन करेगी।
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उन्होंने कहा, हमें ताइवान को किसी संकट का कारण नहीं बनने देना चाहिए। दूसरा, हमें ताइवान को भू-राजनीति की बलि नहीं चढ़ने देना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी शांति बनाए रखने वाली पार्टी बनेगी।
चीन की ताइवान को लेकर मौजूदा सरकार से खासतौर पर टकराव की स्थिति बनी हुई है। बीजिंग राष्ट्रपति लाई को अलगाववादी मानता है और कह चुका है कि अगर जरूरत पड़ी, तो वह ताइवान पर बल प्रयोग भी कर सकता है। हाल के वर्षों में चीन ने ताइवान पर सैन्य, राजनयिक और आर्थिक दबाव बढ़ा दिया है ताकि वहां की सरकार को कमजोर किया जा सके।