नेपाल त्रासदी LIVE: पीएम बालेन शाह बोले- हिम्मत और दृढ़ता से लड़ना होगा; मृतकों का आंकड़ा 1222 पहुंचा
Nepal Tragedy Death Toll And Missing: नेपाल में बाढ़ के बाद हालात बदतर बने हुए हैं। हर दिन के साथ हताहतों की संख्या बढ़ती जा रही है, जबकि अभी भी हजारों लोग लापता हैं। वहीं, इस भीषण त्रासदी को झेलने वाले अब मानसिक रूप से पीड़ा झेल रहे हैं, जिसमें बच्चे से लेकर बड़े भी शामिल है। फिलहाल राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है। यहां पढ़ें, नेपाल त्रासदी से जुड़े सभी अपडेट्स...
लाइव अपडेट
नेपाल में बाढ़ से 1,222 लोगों की मौत
नेपाल पुलिस के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित आठ जिलों से और शव बरामद होने के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 1,222 हो गई है, जबकि देश के कई कस्बों और गांवों में तबाही मचाने वाली बाढ़ के एक सप्ताह बाद भी 4,875 लोग लापता हैं। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, सुरक्षा बलों ने चितवन जिले से 348, पूर्वी नवलपरासी से 218, पश्चिमी नवलपरासी से 208 और नुवाकोट से 155 शव बरामद किए हैं। इसके अलावा रसुवा से 127, गोरखा से 69, धादिंग से 60 और तनहूं से 38 शव मिले हैं।नेपाल में बाढ़ से 1,204 लोगों की मौत
नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी के मुताबिक, देश के उत्तरी और मध्य हिस्सों में आई विनाशकारी बाढ़ के एक सप्ताह बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 1,204 हो गई है। बाढ़ प्रभावित आठ जिलों में सुरक्षा बलों ने अब तक चितवन से 348, नवलपरासी ईस्ट से 217, नवलपरासी वेस्ट से 202, नुवाकोट से 155, रसुवा से 115, गोरखा से 69, धादिंग से 60 और तनाहूं से 38 शव बरामद किए हैं। वहीं, बाढ़ से तबाह हुए कस्बों और गांवों में 4,216 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।भोटेकोशी बाढ़ हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते जलवायु जोखिमों की गंभीर चेतावनी
13 हजार से ज्यादा जवानों ने संभाला मोर्चा
आपदा के बाद नेपाल सरकार ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया। नेपाल सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के 13,000 से अधिक जवानों को अलग-अलग चरणों में तैनात किया गया। हेलीकॉप्टरों के जरिए गंभीर रूप से घायल लोगों, गर्भवती महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगों को प्राथमिकता देते हुए सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया। नुवाकोट में 19 अस्थायी राहत शिविरों में 2,653 लोगों को आश्रय दिया गया है। बाढ़ से बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा। आठ चालू जलविद्युत परियोजनाएं, जिनकी क्षमता 281 मेगावाट थी, और निर्माणाधीन चार परियोजनाएं, जिनकी क्षमता 388 मेगावाट थी, प्रभावित हुईं। इससे 431.1 मेगावाट की उत्पादन क्षमता बाधित हुई। गल्छी-बेत्रावती-रसुवागढ़ी सड़क और पृथ्वी राजमार्ग के कई हिस्से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए। 48 झूला पुल और 31 मोटरेबल पुल भी तबाह या क्षतिग्रस्त हो गए।
दुनिया से मदद की अपील
प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत, चीन, अमेरिका, जापान, एशियाई विकास बैंक, विश्व बैंक, यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र ने सहायता का भरोसा दिया है। सरकार ने 15 स्थानीय निकायों को तीन महीने के लिए आपदा संकटग्रस्त घोषित किया है। राहत कोष से मदद जारी की गई है, जिसमें सात अरब नेपाली रुपये से अधिक जमा हैं और विदेशी योगदान भी मिला है। सड़कों को जोड़ने और पुलों के पुनर्निर्माण जैसे काम शुरू किए जा रहे हैं। लापता लोगों की तलाश लगातार जारी है, जबकि बरामद शवों की वैज्ञानिक पहचान की जा रही है और डीएनए नमूने सुरक्षित रखे गए हैं। अब तक 1,114 शव बरामद हुए हैं, जिनमें 95 की पहचान कर उन्हें परिवारों को सौंप दिया गया। 292 घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिनमें 182 को छुट्टी मिल चुकी है। शाह ने कहा कि यह त्रासदी हिमालय की बढ़ती संवेदनशीलता और जलवायु संकट के गंभीर असर को पूरी दुनिया के सामने रखती है।
नेपाल में मुर्दाघर फुल; अज्ञात शवों का सामूहिक दफन
नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के एक सप्ताह बाद तबाही की तस्वीर और भयावह हो गई है। बुधवार को कई परिवारों ने अपनों का अंतिम संस्कार किया, जबकि पहचान नहीं हो सके शवों के लिए ‘कुश’ से प्रतीकात्मक पुतले बनाकर अंतिम संस्कार की रस्में निभाई गईं। धुन्चे से बरामद अज्ञात शवों को नेपाल पुलिस और बचाव दल ने काठमांडू के बाहरी इलाके में नदी किनारे दफनाया। इससे पहले मंगलवार को गोरखर्णा वन क्षेत्र में सामूहिक दफन शुरू किया गया था। मुर्दाघरों में जगह खत्म होने के बाद सुरक्षा बलों ने पीपीई किट पहनकर शवों को कीचड़ भरे जंगल तक पहुंचाया और दफनाया। शवों के साथ पहचान टैग और रिकॉर्ड सुरक्षित रखे गए हैं, ताकि पहचान होने पर उन्हें कब्र से निकालकर परिवारों को सौंपा जा सके। अधिकारियों ने दफन शवों का डीएनए भी सुरक्षित रखा है, जिससे आगे परिजनों के नमूनों से मिलान किया जा सके। पहचान का इंतजार जारी है।350 शवों की क्षमता, हजारों मौतों ने बढ़ाया संकट
बाढ़ से हुई मौतों के बाद नेपाल के सामने शवों की पहचान और सुरक्षित रखरखाव की चुनौती खड़ी हो गई है। मुर्दाघरों में करीब 350 शव रखने की क्षमता है, जबकि बाढ़ के पानी के साथ शव और मानव अवशेष विभिन्न इलाकों में पहुंच रहे हैं। रासुवा और नुवाकोट से बहकर आए शवों की बरामदगी कई जिलों में हुई है। चितवन में संख्या में शव मिलने के बाद मुर्दाघर भर गए और प्रशासन को अस्थायी व्यवस्था करनी पड़ी। नेपाल पुलिस के मुताबिक मंगलवार शाम तक 1,068 शव बरामद किए जा चुके थे, जिनमें करीब 400 आंशिक अवशेष थे। इससे पहचान और भी मुश्किल हो गई है। इसी चुनौती के बीच भारत की 19 सदस्यीय फोरेंसिक टीम ने नेपाल में डीएनए विश्लेषण शुरू किया है। भारतीय विशेषज्ञ नेपाल पुलिस और फोरेंसिक टीमों के साथ मिलकर नमूनों की जांच कर रहे हैं, ताकि मृतकों और लापता लोगों की पहचान जल्द हो सके।
पीएम बालेन शाह बोले- हिम्मत और दृढ़ता से लड़ना होगा, बचाव पहली प्राथमिकता
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने रासुवा और नुवाकोट में आई अचानक विनाशकारी बाढ़ के बीच सरकार की ओर से किए गए राहत और बचाव कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस मुश्किल घड़ी में सरकार देश के साथ खड़ी है और प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालना उसकी पहली प्राथमिकता रही।शाह ने बताया कि घटना सुबह करीब 8:30 बजे हुई। जानकारी मिलते ही बचाव दलों को अलर्ट कर दिया गया और सुबह 9:15 बजे बैठक बुलाई गई। हेलीकॉप्टरों को तैयार रखा गया। करीब 10:30 बजे आपातकालीन बचाव टीमें प्रभावित क्षेत्रों में भेजने के लिए तैयार थीं। प्रधानमंत्री ने कहा कि सेना के हेलीकॉप्टरों को प्रभावित इलाकों में बचाव अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। करीब दोपहर एक बजे स्थानीय सांसद और विधायक से संपर्क स्थापित हो सका।
शाह के मुताबिक, शाम करीब सात बजे लोगों से प्रधानमंत्री राहत कोष में योगदान देने की अपील की गई। रासुवा और नुवाकोट के लिए एक-एक करोड़ रुपये की सहायता राशि दी गई। विदेशी नागरिकों की तलाश और बचाव के लिए अलग टीम बनाई गई। बचाव अभियान में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने बताया कि राहत सामग्री से लदे 10 ट्रक प्रभावित इलाकों के लिए भेजे गए। साथ ही सभी मंत्रियों ने अपने एक महीने का वेतन राहत कार्यों के लिए देने का फैसला किया। प्रधानमंत्री बालेन शाह ने इस संकट के बीच देशवासियों से साहस और दृढ़ संकल्प के साथ हालात का सामना करने की बात कही।
भारतीय तकनीकी टीम ने नेपाली सेना के साथ संभाला मोर्चा
रसुवा जिले के स्याब्रूबेसी के चिलिमे में बाढ़ से प्रभावित हाइड्रोपावर टनल में बचाव अभियान चल रहा है। सुरंग से बचाव कार्य के लिए भारत की तकनीकी टीम, नेपाली सेना के साथ मिलकर चिलिमे और लांगटांग दोनों जगहों पर काम कर रही है। भारत की एक टनल रेस्क्यू टीम ने नेपाली सेना के साथ मिलकर इस अहम हाइड्रोपावर टनल साइट पर संयुक्त खोज और बचाव अभियान शुरू किया है।#WATCH नेपाल: रसुवा जिले के स्याब्रूबेसी के चिलिमे में बाढ़ से प्रभावित हाइड्रोपावर टनल में बचाव अभियान चल रहा है।
— ANI_HindiNews (@AHindinews) September 2, 2026
सुरंग से बचाव कार्य के लिए भारत की तकनीकी टीम, नेपाली सेना के साथ मिलकर चिलिमे और लांगटांग दोनों जगहों पर काम कर रही है।
भारत की एक टनल रेस्क्यू टीम ने नेपाली सेना… pic.twitter.com/gjmfWkO6N7
नेपाल में लगातार बारिश से फिर बाढ़ का खतरा; लोगों को सतर्क रहने की सलाह
नेपाल में लगातार हो रही बारिश के बीच बाढ़ का खतरा बढ़ता जा रहा है। देश के मध्य, पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों में तीन प्रमुख नदियों का जलस्तर चेतावनी सीमा से ऊपर पहुंच गया है। इसके बाद नेपाली अधिकारियों ने नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। जल विज्ञान एवं मौसम विज्ञान विभाग की बाढ़ पूर्वानुमान शाखा के मुताबिक, बुधवार सुबह छह बजे तक सिंधुली जिले में सुन कोशी, गोरखा में बूढ़ी गंडकी और डडेलधुरा में महाकाली नदी का जलस्तर चेतावनी स्तर से ऊपर दर्ज किया गया।इससे पहले मंगलवार रात लामजुंग जिले में मार्स्यांगदी नदी ने खतरे का निशान पार कर लिया था। भुकुंडेबेसी जलस्तर निगरानी केंद्र पर रात 11:15 बजे नदी का पानी खतरे की सीमा से ऊपर दर्ज किया गया। बाढ़ पूर्वानुमान शाखा की ताजा जानकारी के अनुसार, मार्स्यांगदी नदी का जलस्तर अभी भी बढ़ रहा है। नदी में पानी का बहाव बढ़ने के कारण आसपास के इलाकों में बाढ़ का जोखिम भी बना हुआ है।
नेपाल में बाढ़ से तबाही का मंजर देखने पहुंचे सोनू सूद
बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद मंगलवार को नेपाल के बाढ़ प्रभावित त्रिशूली बाजार पहुंचे। उन्होंने मौके पर हालात का जायजा लिया और प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी परेशानियां सुनीं। बाढ़ से हुए भारी नुकसान को देखकर सोनू सूद ने चिंता जताई और कहा कि लोगों को सामान्य जिंदगी में लौटने में काफी समय लग सकता है।एएनआई से बातचीत में उन्होंने नेपाल की मदद के लिए भारत सरकार के प्रयासों की सराहना की। सोनू सूद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में नेपाल को दी जा रही सहायता सराहनीय है। उन्होंने कहा कि राहत और सहयोग का सिलसिला लगातार जारी रखना जरूरी है, क्योंकि प्रभावित लोगों की मुश्किलें कुछ हफ्तों या महीनों में खत्म नहीं होंगी। उन्होंने सभी से नेपाल के बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए आगे आने की अपील की।
मौतों का आंकड़ा 1,127 पहुंचा
नेपाल में बाढ़ की तबाही से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,127 हो गई है। आपदा के एक सप्ताह बाद भी हजारों लोग लापता हैं और सुरक्षा बल प्रभावित इलाकों में लगातार तलाशी और राहत अभियान चला रहे हैं। नेपाल पुलिस के मुताबिक, सबसे ज्यादा शव चितवन से 348, नवलपरासी ईस्ट से 217, नवलपरासी वेस्ट से 190 और नुवाकोट से 155 बरामद किए गए हैं। इसके अलावा गोरखा से 66, धादिंग से 59, रसुवा से 45 और तनहूं से 38 शव मिले हैं।पुलिस ने बताया कि अब तक 1,113 शवों का पोस्टमार्टम और कानूनी पहचान की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। इनमें से 95 शव उनके परिजनों को सौंपे जा चुके हैं। लापता लोगों के परिवारों की मदद के लिए नेपाल पुलिस ने 911 अज्ञात शवों की जानकारी अपनी वेबसाइट पर अपलोड की है, ताकि परिजन तस्वीरों और उपलब्ध विवरण के आधार पर अपने रिश्तेदारों की पहचान कर सकें। नेपाल पुलिस के अनुसार, सुरक्षा बलों ने अब तक बाढ़ प्रभावित इलाकों से 6,541 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है। वहीं, 4,858 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। उनकी तलाश के लिए प्रभावित क्षेत्रों में अभियान जारी है।
नेपाल के लिए भारत ने भेजी पांचवीं मदद
नेपाल में राहत और बचाव अभियान के लिए भारत ने मदद का सिलसिला जारी रखा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को बताया कि भारत का पांचवां विमान राहत सामग्री लेकर नेपाल के लिए रवाना हो गया है। जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस विमान में 11 सदस्यीय विशेष रेस्क्यू टीम मौजूद है। टीम के साथ बचाव कार्य में इस्तेमाल होने वाले जरूरी उपकरण भी भेजे गए हैं।The fifth Indian aircraft has departed for Nepal.
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) September 2, 2026
It is carrying an 11-member rescue team with specialised equipment, and 5.5 tonnes of essential medicines.
🇮🇳 🤝🇳🇵 pic.twitter.com/g7f4FqgPk8
इसके अलावा विमान में करीब 5.5 टन आवश्यक दवाएं भी भेजी गई हैं। भारत की ओर से यह सहायता नेपाल में जारी राहत एवं बचाव प्रयासों को मजबूत करने के उद्देश्य से भेजी गई है। विदेश मंत्री ने कहा कि पांचवां भारतीय विमान नेपाल के लिए रवाना हो चुका है और इसमें विशेष उपकरणों से लैस बचाव दल के साथ बड़ी मात्रा में जरूरी दवाएं भी शामिल हैं।