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कोरोना संक्रमित होने के बाद सर्जरी से मृत्यु का जोखिम बढ़ सकता है: वैश्विक शोध
Sat, 30 May 2020 09:28 AM IST
Tanuja Yadav
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
Published by: Tanuja Yadav
Updated Sat, 30 May 2020 09:28 AM IST
सार
- कोरोना होने के बाद सर्जरी करने पर मौत का जोखिम ज्यादा - शोध
- बर्मिंघम विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने किया शोध
- 235 अस्पतालों के 1.128 मरीजों पर किया गया शोध
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कोरोना पॉजिटिव
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कोरोना की चपेट में आने वाले मरीजों की सर्जरी के बाद मौत का खतरा बढ़ सकता है। एशिया, अफ्रीका और उत्तरी अमेरिका के 235 अस्पतालों के 1,128 मरीजों के समूह पर शोध करने के बाद एक वैश्विक स्टडी ने ये बात सामने रखी है।
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ये शोध बर्मिंघम विश्वविद्यालय के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ रिसर्च के वैज्ञानिकों ने किया है जिसे लांसेट पेपर में छापा गया है। शोध के मुताबिक संक्रमित मरीजों में जिन मरीजों की सर्जरी हो रही है, उनमें मृत्युदर ज्यादा है। शोध के अनुसार 30 दिन में मृत्युदर 23.8 फीसदी थी।
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शोध की मानें तो महिलाओं की तुलना में पुरुषों में मृत्युदर ज्यादा है। शोध के मुताबिक पुरुषों में मृत्युदर 28.4 फीसदी तो महिलाओं में 18.2 फीसदी मृत्युदर है। यही नहीं 70 साल से ज्यादा उम्र वाले लोगों में मृत्युदर 33.7 फीसदी और 70 साल से कम उम्र वाले लोगों में ये दर 13.9 फीसदी है।
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इसके अलावा जिन लोगों में पहले से गंभीर बीमारी मौजूद हैं, जैसे कैंसर का इलाज या सर्जरी तो इन मरीजों में मृत्युदर ज्यादा होने की संभावना रहती है। ऐसे मरीजों में मृत्युदर इसलिए ज्यादा है क्योंकि इनकी रोगप्रतिरोधक क्षमता पहले से थोड़ी कमजोर हो जाती है।
शोध के सहलेखक अनिल भागनू का कहना है कि शोध से पहले यह अनुमान लगाया था कि छोटी और चुनिंदा सर्जरी करने वालों में मृत्युदर एक फीसद से भी कम रहेगी लेकिन अब पता चला है कि ये दर छोटी सर्जरी में 16.3 फीसदी और वैकल्पिक सर्जरी में 18.9 फीसदी हो सकती है।
अनिल भागनू का मानना है कि ये मृत्युदर उन मरीजों से भी ज्यादा है जो महामारी से पहले ज्यादा जोखिम में रहते थे। शोध का यह भी कहना है कि पूरी दुनिया में कोरोना वायरस की वजह से आई रुकावट के बाद 2.84 करोड़ वैकल्पिक सर्जरी को रद्द किया गया है।