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पाकिस्तान: सियासी बयानों से साख पर कीचड़, टूट रहा है पाक सेना का सब्र

Thu, 12 May 2022 05:52 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 12 May 2022 05:52 PM IST
सार

हाल में मरियम ने कहा था कि इमरान खान उतने ही समय सत्ता में रहे, जब तक उन्हें एक पूर्व खुफिया अधिकारी का समर्थन हासिल रहा। पाकिस्तान में खुफिया तंत्र सेना का अभिन्न हिस्सा है...

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Supporters of former Prime Minister Imran Khan are constantly targeting the pak army, which is annoying to army leadership
इमरान खान और सेनाध्यक्ष जनरल कमर जावेद बाजवा - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

पाकिस्तान में राजनेताओं के प्रति सेना का सब्र अब जवाब देता नजर आ रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के समर्थक सेना को लगातार निशाना बना रहे हैं। उधर सत्ताधारी गठबंधन के कुछ नेताओँ ने भी ऐसी बातें कहीं हैं, जो बताया जाता है कि सेना नेतृत्व को पसंद नहीं आई हैं। पाकिस्तानी सेना ने इस तरह के बयानों पर रविवार को एक बार फिर गहरा एतराज जताया। सेना के प्रवक्ता ने राजनीति में सेना को घसीटने के ‘गैर कानूनी और अनैतिक व्यवहार’ की निंदा की। प्रवक्ता ने चेतावनी दी कि बिना सबूतों के लगाए जा रहे ऐसे आरोप देश के लिए बेहद हानिकारक हैं।

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पिछले महीने देश में सरकार बदलने के बाद से इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के समर्थक सोशल मीडिया पर सेना के खिलाफ टिप्पणियां कर रहे हैं। इन टिप्पणियों में कभी सीधे, तो कभी परोक्ष रूप से कहा जाता है कि सेना नेतृत्व की भी इमरान खान सरकार को हटाने की साजिश में मिलीभगत रही। इमरान खान ने कई बार अपने समर्थकों से कहा है कि वे सेना के खिलाफ न बोलें। लेकिन उससे फर्क नहीं पड़ा है।

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सेना प्रमुख से हस्तेक्षप की गुजारिश

उधर हाल में पंजाब राज्य के गवर्नर उमर सरफराज चीमा ने सेनाध्यक्ष जनरल कमर जावेद बाजवा को पत्र लिख कर उनसे पंजाब की राजनीतिक गतिवधियों में हस्तक्षेप करने की गुजारिश की थी। इस बीच पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) की उपाध्यक्ष मरियम नवाज के कुछ बयान भी विवादित हुए हैं। मरियम पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की बेटी हैं। हाल में मरियम ने कहा था कि इमरान खान उतने ही समय सत्ता में रहे, जब तक उन्हें एक पूर्व खुफिया अधिकारी का समर्थन हासिल रहा। पाकिस्तान में खुफिया तंत्र सेना का अभिन्न हिस्सा है।

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बताया जाता है कि सेना इमरान खान की रैलियों में कही जा रही बातों और तेवर से भी खफा है। खान की रैलियों में जबरदस्त भीड़ जुट रही है। इसलिए ये अंदेशा गहरा गया है कि जनता के एक बड़े हिस्से में सेना विरोधी भावनाएं फैल रही हैं। रविवार को एबटाबाद में फिर एक विशाल रैली हुई, जिसे इमरान खान ने संबोधित किया। वहां उन्होंने अपना ये आरोप दोहराया कि उन्हें प्रधानमंत्री पद से अमेरिकी साजिश के तहत हटाया गया। उन्होंने इस घटनाक्रम में न्यायपालिका की भूमिका पर अपने सवाल भी दोहराए।

सेना ने जारी किया बयान

रविवार को जारी बयान में सेना के जन संपर्क विभाग इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) किसी राजनीतिक दल का जिक्र नहीं किया। लेकिन बयान में कहा गया- ‘हाल में पाकिस्तान की सशस्त्र सेनाओं और उनके नेतृत्व को राजनीति में घसीटने की जानबूझ कर की जा रही कोशिश में तेज हो गई है। इन कोशिश के तहत कुछ राजनेता, पत्रकार और विश्लेषक सीधे या इशारों में सेना और उसके वरिष्ठ नेतृत्व का उल्लेख कर रहे हैं।’



पर्यवेक्षकों का कहना है कि सेना हाल के वर्षों में लगातार कहती रही है कि वह राजनीति में हस्तक्षेप नहीं करती। लेकिन उसके हस्तक्षेप का इतिहास पुराना है। इसलिए उसके तमाम दावों के बजाय ये धारणा बनी रहती है कि देश में कोई बड़ी सियासी घटना बिना उसके दखल या सहमति के नहीं होती। यही धारणा अब सेना की परेशानी का कारण बन गई है।

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