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Sri Lanka Crisis: हिंसक प्रदर्शनों के बीच आठ की मौत, रक्षा मंत्रालय का तीनों सेनाओं को निर्देश- उपद्रवियों को सीधे गोली मार दी जाए

Tue, 10 May 2022 09:17 PM IST
शिव शरण शुक्ला वर्ल्ड न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Tue, 10 May 2022 09:17 PM IST
सार

स्पीकर महिंदा यापा अबेयवर्धने ने बताया कि उन्होंने राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को फोन करके इसके लिए अनुरोध किया था। इस बीच, बिगड़ते हालात को काबू में लाने के लिए रक्षा मंत्रालय ने सेना के तीनों अंग- थलसेना, वायुसेना और नौसेना को निर्देश दिए हैं कि अगर जरूरत पड़े तो उपद्रवियों को काबू करने के लिए उन पर खुलेआम फायरिंग कर दी जाए।

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Sri Lankan Parliament Speaker Mahinda Yapa Abeyawardene asks President Gotabaya Rajapaksa to reconvene Parliament this week
श्रीलंका में हालात बेकाबू - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

श्रीलंका में बिगड़ते हालातों के बीच रक्षा मंत्रालय ने सेना के तीनों अंग- थलसेना, वायुसेना और नौसेना को निर्देश दिए हैं कि अगर जरूरत पड़े तो उपद्रवियों को काबू करने के लिए उन पर खुलेआम फायरिंग कर दी जाए। आदेश के मुताबिक, अगर कहीं सार्वजनिक संपत्ति की लूट या किसी को चोट पहुंचाने की घटना सामने आती है, तो सेना के पास गोलीबारी की छूट होगी। गौरतलब है कि श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने आज ही देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा था कि हिंसक और बदला लेने वाली घटनाएं नहीं होनी चाहिए और इन्हें बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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आर्थिक संकटों का सामना कर रहे श्रीलंका में प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के पद से इस्तीफे के बाद राजनीतिक संकट और गहरा गया है। इस बीच, मंगलवार को स्पीकर महिंदा यापा अबेयवर्धने ने संकट में घिरे राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे से अनुरोध किया कि वे इस सप्ताह संसद का सत्र फिर से बुलाएं, ताकि देश में दशकों के सबसे खराब आर्थिक संकट को लेकर अभूतपूर्व हिंसा और सरकार के खिलाफ व्यापक विरोध के बीच मौजूदा स्थिति पर चर्चा की जा सके।
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वहीं, दूसरी ओर महिंदा राजपक्षे के खिलाफ लोगों का गुस्सा शांत नहीं हो रहा है। मंगलवार को भीड़ ने उनके आवास और त्रिंकोमाली में नौसेना मुख्यालय को घेर रखा है। इसके साथ ही सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों ने मंगलवार को राजपक्षे परिवार और उनके वफादारों को देश से भागने से रोकने के लिए कोलंबो में बंदरानाइक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की ओर जाने वाली सड़क पर चेक पोस्ट बना दिया है।
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लोगों के बड़े समूह ने हवाई अड्डे की ओर जाने वाली सड़क पर चेक पोस्ट बनाया है। प्रदर्शनकारी लोग सत्ताधारी गुट के वफादारों को देश से भागने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं। गौरतलब है कि कोलंबो में बंदरानाइक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को स्थानीय रूप से कटुनायके हवाई अड्डे के रूप में जाना जाता है।

स्पीकर महिंदा यापा अबेयवर्धने ने बताया कि उन्होंने राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को फोन करके इसके लिए अनुरोध किया था। संसदीय अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रपति गोतबाया को 17 मई की निर्धारित तिथि से पहले संसद को फिर से बुलाना होगा, क्योंकि वर्तमान में देश में कोई प्रधान मंत्री और सरकार नहीं है।

सूत्रों ने कहा कि राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को सरकार बनाने के लिए संसद में प्रतिनिधित्व करने वाले राजनीतिक दलों के नेताओं से मिलना है। अध्यक्ष अबेयवर्धने ने यह भी कहा कि उन्होंने खुद पार्टी नेताओं की एक बैठक की सूचना दी थी ताकि सदन के कामकाज पर चर्चा की जा सके।

इससे पहले देश में सोमवार को उनके समर्थकों द्वारा सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों पर हमला करने के कुछ घंटे बाद गंभीर आर्थिक संकट के बीच श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने इस्तीफा दे दिया था। बताया जा रहा है कि विपक्ष की अंतरिम सरकार बनाने की मांग के आगे झुकते हुए राजपक्षे ने यह कदम उठाया है। 

प्रधानमंत्री राजपक्षे ने कहा कि वह जनता के लिए 'कोई भी बलिदान' देने को तैयार हैं। उनके इस कथन से इन अटकलों को बल मिल गया था कि राजपक्षे आज इस्तीफा दे देंगे। उनके छोटे भाई और राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे की आर्थिक संकट से घिरी सरकार पर देश को उबारने के लिए अंतरिम सरकार बनाने का दबाव बढ़ गया है।

महिंदा राजपक्षे को शांतिपूर्ण तरीके से सरकार विरोधी प्रदर्शन कर रहे लोगों पर हमला करने के मामले में विपक्षी राजनेता उनकी गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। सोमवार को हुई हिंसा में कम से कम आठ लोगों की जान चली गई थी और 200 से अधिक लोग घायल हो गए थे। साथ ही कई राजनेताओं के घरों पर आगजनी हुई थी।

सोमवार को हुई हिंसा को लेकर पुलिस प्रमुख चंदना विक्रमरत्ने ने कहा कि उन्होंने क्राइम विभाग को राजपक्षे समर्थकों द्वारा शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर सोमवार को किए गए हमले की जांच करने का आदेश दिया है। अटॉर्नी जनरल ने भी पुलिस प्रमुख को भी इसकी जांच के लिए पत्र लिखा है।

इस बीच, सोमवार की रात गुस्साई भीड़ ने महिंदा राजपक्षे के अपने टेंपल ट्री आवास के परिसर में घुसने की कोशिश करते हुए उनके घर में आग लगा दी। इस दौरान भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी छोड़े। जिसके बाद महिंदा राजपक्षे और पूरे परिवार ने मंगलवार सुबह अपने टेंपल ट्री आवास से निकल गए।

ये सूचना मिलने के बाद भीड़ ने पूर्वी बंदरगाह वाले शहर त्रिंकोमाली में नौसेना मुख्यालय को घेर लिया है। यहां लोग महिंदा राजपक्षे को परिसर से बाहर करने की मांग की है। वहीं, राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने शुक्रवार आधी रात से देश में आपातकाल की स्थिति घोषित कर दी। 

संसद अध्यक्ष ने कहा, तत्काल सत्र बुलाएं राष्ट्रपति
श्रीलंकाई संसद के अध्यक्ष महिंदा यापा अभयवर्धना ने राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे से कहा कि वे अभूतपूर्व हिंसा और कई दशक में देश के सर्वाधिक खराब आर्थिक संकट को लेकर सरकार के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन के बीच मौजूदा स्थिति पर चर्चा करने के लिए जल्द से जल्द सदन का सत्र बुलाएं। सार्जेंट-एट आर्म्स नरेंदा फर्नांडो ने ‘डेली मिरर’ को बताया कि अध्यक्ष द्वारा सिर्फ मौजूदा संकट पर चर्चा के लिए सदन को बुलाने के प्रावधान हैं।

सरकार के क्रूर हमलों की मुख्य धर्माध्यक्षों ने की निंदा
श्रीलंका में जारी आर्थिक व सियासी संकट के बीच प्रमुख धर्माध्यक्षों और उच्च पदस्थ बौद्ध भिक्षुओं के एक समूह ने पुलिस द्वारा शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर किए गए हिंसक हमलों की निंदा की। तीन बौद्ध अध्यायों अमरपुरा, सियाम व रमन्ना संप्रदायों के महानायक थेरोस ने इन्हें क्रूर हमले बताया। मुख्य धर्माध्यक्षों ने इन हमलों को लोकतंत्र के साथ मानवता के लिए भी एक अपमान बताया।

श्रीलंका में हिंसक प्रदर्शन पर भारत ने जताई चिंता
गंभीर आर्थिक संकट के बाद श्रीलंका में बढ़ते हिंसक प्रदर्शन पर भारत ने गहरी चिंता जताई है। भारत ने पड़ोसी देश को हर संभव मदद देने का भरोसा दिया है। उसने कहा है कि पड़ोसी और ऐतिहासिक संबंध होने के नाते भारत श्रीलंका के लोकतंत्र, स्थिरता और आर्थिक स्थिति में सुधार को लेकर पूरी तरह उसके साथ है।

विदेश मंत्रालय ने आर्थिक संकट के दौरान भारत की ओर से श्रीलंका को दी गई मदद की याद दिलाई। भारत ने सिर्फ इसी साल श्रीलंका को 3.5 अरब डॉलर से अधिक मदद दी है। भारत ने कहा, वह समय भी पड़ोसियों को प्राथमिकता देने की अपनी नीति पर मजबूती से खड़ा है।

राजपक्षे के भारत भाग जाने की खबरें फर्जी : उच्चायोग
इसके साथ ही भारतीय उच्चायोग ने उन अटकलों को खारिज किया है, जिनमें कहा गया है कि सरकार विरोधी प्रदर्शन की वजह से डरकर पूर्व प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे अपने परिवार के साथ भागकर भारत आ गए हैं। दरअसल, श्रीलंका में मंगलवार को स्थानीय सोशल मीडिया पर ऐसी अटकलें लगाई जा रही थीं।


भारतीय उच्चायोग ने अपने बयान में कहा कि हाल में मीडिया और सोशल मीडिया के वर्गों में फैल रही अफवाहों पर ध्यान दिया गया है। इन अफवाहों में कहा गया है कि कुछ राजनीतिक व्यक्ति और उनके परिवार भारत भाग गए हैं। उच्चायोग ने कहा कि यह फर्जी और स्पष्ट रूप से झूठी रिपोर्ट है, इनमें कोई सच्चाई या सार नहीं है। उच्चायोग दृढ़ता से इनका खंडन करता है। राजपक्षे के सोमवार को इस्तीफे के बाद से ही उनके ठिकाने के बारे में कयास लगाए जा रहे हैं। 

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