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Spy Balloon: अब चीन ने अमेरिका पर लगाया गुब्बारे से जासूसी का आरोप, 20 दिन में दोनों देशों के बीच क्या हुआ?
Fri, 17 Feb 2023 07:04 PM IST
शिवेंद्र तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Fri, 17 Feb 2023 07:04 PM IST
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जासूसी गुब्बारा
- फोटो :
AMAR UJALA
विस्तार
अमेरिका और चीन में एक-दूसरे की कथित जासूसी को लेकर तकरार कम होने का नाम नहीं ले रही है। अब चीन ने दावा किया है कि अधिक ऊंचाई वाले अमेरिकी गुब्बारे उसके झिंजियांग और तिब्बत क्षेत्रों में उड़ रहे थे। इससे पहले 28 जनवरी को अमेरिकी सेना द्वारा दक्षिण कैरोलिना के तट पर एक चीनी जासूसी गुब्बारे को मार गिराया गया था।फिर क्यों चर्चा में आया जासूसी गुब्बारा? क्या होते हैं जासूसी गुब्बारे? अमेरिका ने चीन के आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया दी? इससे पहले अमेरिका ने क्या दावा किया था? इन विवादों का दोनों देशों के रिश्तों पर क्या प्रभाव पड़ा है? आइये जानते हैं...
वांग वेनबिन
- फोटो :
Social Media
फिर क्यों चर्चा में आया जासूसी गुब्बारा?
जनवरी के अंत में शुरू हुआ अमेरिका और चीन के बीच एक-दूसरे देश की कथित जासूसी का विवाद बढ़ता ही जा रहा है। अब नया आरोप चीन की ओर से लगाया गया है। दरअसल, बुधवार को एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने कहा कि मई 2022 से अमेरिका ने बड़ी संख्या में अधिक ऊंचाई वाले गुब्बारे छोड़े हैं। वांग की मानें तो ये गुब्बारे लगातार दुनिया का चक्कर लगा रहे हैं। दावा किया गया कि चीन के अत्यधिक सुरक्षित हवाई क्षेत्रों- तिब्बत और झिंजियांग में अवैध रूप से उड़ रहे अमेरिकी गुब्बारे देखे गए। हालांकि, चीन ने अपने दावों का कोई सबूत पेश नहीं किया है। वांग ने अमेरिका पर दुष्प्रचार फैलाने का भी आरोप लगाया है।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग ने कहा, 'अधिकृत चीनी अधिकारियों की मंजूरी के बिना, जासूसी गुब्बारा झिंजियांग, तिब्बत और अन्य प्रांतों सहित चीन के क्षेत्रीय हवाई क्षेत्र में कम से कम 10 बार अवैध रूप से उड़ान भर चुका है।'
जनवरी के अंत में शुरू हुआ अमेरिका और चीन के बीच एक-दूसरे देश की कथित जासूसी का विवाद बढ़ता ही जा रहा है। अब नया आरोप चीन की ओर से लगाया गया है। दरअसल, बुधवार को एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने कहा कि मई 2022 से अमेरिका ने बड़ी संख्या में अधिक ऊंचाई वाले गुब्बारे छोड़े हैं। वांग की मानें तो ये गुब्बारे लगातार दुनिया का चक्कर लगा रहे हैं। दावा किया गया कि चीन के अत्यधिक सुरक्षित हवाई क्षेत्रों- तिब्बत और झिंजियांग में अवैध रूप से उड़ रहे अमेरिकी गुब्बारे देखे गए। हालांकि, चीन ने अपने दावों का कोई सबूत पेश नहीं किया है। वांग ने अमेरिका पर दुष्प्रचार फैलाने का भी आरोप लगाया है।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग ने कहा, 'अधिकृत चीनी अधिकारियों की मंजूरी के बिना, जासूसी गुब्बारा झिंजियांग, तिब्बत और अन्य प्रांतों सहित चीन के क्षेत्रीय हवाई क्षेत्र में कम से कम 10 बार अवैध रूप से उड़ान भर चुका है।'
चीन का जासूसी जहाज
- फोटो :
Social Media
क्या होते हैं जासूसी गुब्बारे?
कैप्सूल के आकार के ये जासूसी गुब्बारे कई वर्ग फीट बड़े होते हैं। यह आमतौर पर जमीन से काफी ऊंचाई पर उड़ने की क्षमता रखते हैं, जिसकी वजह से ज्यादातर इनका इस्तेमाल मौसम से जुड़ी जानकारी जुटाने के लिए किया जाता रहा है। खासकर किसी एक तय क्षेत्र के मौसम को जानने के लिए। हालांकि, आसमान में जबरदस्त ऊंचाई पर उड़ने की अपनी इन्हीं क्षमताओं की वजह से इनका इस्तेमाल जासूसी के लिए भी किया जाने लगा।
यह गुब्बारे जमीन से 24 हजार से 37 हजार फीट की ऊंचाई पर आसानी से उड़ सकते हैं। इनके उड़ने की यह रेंज कमर्शियल विमानों से काफी ज्यादा है। अधिकतर वाणिज्यिक एयरक्राफ्ट्स 40 हजार फीट की ऊंचाई तक नहीं जाते। इतनी रेंज पर उड़ान भरने की क्षमता फाइटर जेट्स की ही होती है, जो कि 65 हजार फीट तक जा सकते हैं। हालांकि, यू-2 जैसे कुछ और जासूसी विमान 80 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकते हैं।
कैप्सूल के आकार के ये जासूसी गुब्बारे कई वर्ग फीट बड़े होते हैं। यह आमतौर पर जमीन से काफी ऊंचाई पर उड़ने की क्षमता रखते हैं, जिसकी वजह से ज्यादातर इनका इस्तेमाल मौसम से जुड़ी जानकारी जुटाने के लिए किया जाता रहा है। खासकर किसी एक तय क्षेत्र के मौसम को जानने के लिए। हालांकि, आसमान में जबरदस्त ऊंचाई पर उड़ने की अपनी इन्हीं क्षमताओं की वजह से इनका इस्तेमाल जासूसी के लिए भी किया जाने लगा।
यह गुब्बारे जमीन से 24 हजार से 37 हजार फीट की ऊंचाई पर आसानी से उड़ सकते हैं। इनके उड़ने की यह रेंज कमर्शियल विमानों से काफी ज्यादा है। अधिकतर वाणिज्यिक एयरक्राफ्ट्स 40 हजार फीट की ऊंचाई तक नहीं जाते। इतनी रेंज पर उड़ान भरने की क्षमता फाइटर जेट्स की ही होती है, जो कि 65 हजार फीट तक जा सकते हैं। हालांकि, यू-2 जैसे कुछ और जासूसी विमान 80 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकते हैं।
वेंडी शेरमेन, अमेरिका की उप विदेश मंत्री
- फोटो :
ANI
अमेरिका ने चीन के आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया दी?
चीन के आरोपों का अब अमेरिका ने भी जवाब दिया है। अमेरिका की उप-विदेश मंत्री वेंडी शेरमन ने कहा कि अमेरिकी गुब्बारों के बारे में चीन के दावे झूठे हैं। शेरमन ने वाशिंगटन में एक कार्यक्रम में कहा, 'उन्होंने अब कहा है कि चीन के ऊपर अमेरिका द्वारा जासूसी गुब्बारे उड़ाए जाने की बात बिल्कुल सच नहीं है। चीन के ऊपर अमेरिकी सरकार का एक भी गुब्बारा नहीं है।'
चीन के आरोपों का अब अमेरिका ने भी जवाब दिया है। अमेरिका की उप-विदेश मंत्री वेंडी शेरमन ने कहा कि अमेरिकी गुब्बारों के बारे में चीन के दावे झूठे हैं। शेरमन ने वाशिंगटन में एक कार्यक्रम में कहा, 'उन्होंने अब कहा है कि चीन के ऊपर अमेरिका द्वारा जासूसी गुब्बारे उड़ाए जाने की बात बिल्कुल सच नहीं है। चीन के ऊपर अमेरिकी सरकार का एक भी गुब्बारा नहीं है।'
चीनी गुब्बारा
- फोटो :
Agency
पहला मामला कब सामने आया?
कथित जासूसी का घटनाक्रम जनवरी के अंत में सामने आया था, तब अमेरिका के आसमान में तीन बस के बराबर का एक चीनी गुब्बारा दिखाई दिया था। इस गुब्बारे को अमेरिकी अधिकारियों ने एक चीनी जासूसी गुब्बारा बताया। चीन ने भी माना था कि यह गुब्बारा उसका था। चीन ने दावा किया था कि गुब्बारा मौसम अनुसंधान कर रहा था। हालांकि, चीन ने इसे गलती से अमेरिकी हवाई क्षेत्र में पहुंचने की बात कही।
गुब्बारा अमेरिकी आसमान में कई दिनों तक उड़ता रहा। काफी निगरानी के बाद दक्षिण कैरोलिना तट पर 4 फरवरी को एक F-22 जेट से गुब्बारे को मार गिराया गया। अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने कहा था कि गुब्बारे का वजन एक टन से अधिक था। यह कई एंटेना से लैस था और इसमें खुफिया जानकारी एकत्र करने में मदद करने वाले सौर पैनल थे।
चीनी गुब्बारे के गिराए जाने के छह दिन बाद यानी 10, 12 और 13 फरवरी को लगातार अज्ञात वस्तुएं अमेरिकी हवाई क्षेत्र में दिखीं थीं जिसे अमेरिकी सैन्य लड़ाकू विमानों ने मार गिराया था। अमेरिकी सीनेट में बहुमत के नेता चार्ल्स शूमर ने कहा था कि तीनों वस्तुएं गुब्बारे जैसी नहीं थीं। अब तक केवल पहले गुब्बारे का संबंध चीन से मिला है।
कथित जासूसी का घटनाक्रम जनवरी के अंत में सामने आया था, तब अमेरिका के आसमान में तीन बस के बराबर का एक चीनी गुब्बारा दिखाई दिया था। इस गुब्बारे को अमेरिकी अधिकारियों ने एक चीनी जासूसी गुब्बारा बताया। चीन ने भी माना था कि यह गुब्बारा उसका था। चीन ने दावा किया था कि गुब्बारा मौसम अनुसंधान कर रहा था। हालांकि, चीन ने इसे गलती से अमेरिकी हवाई क्षेत्र में पहुंचने की बात कही।
गुब्बारा अमेरिकी आसमान में कई दिनों तक उड़ता रहा। काफी निगरानी के बाद दक्षिण कैरोलिना तट पर 4 फरवरी को एक F-22 जेट से गुब्बारे को मार गिराया गया। अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने कहा था कि गुब्बारे का वजन एक टन से अधिक था। यह कई एंटेना से लैस था और इसमें खुफिया जानकारी एकत्र करने में मदद करने वाले सौर पैनल थे।
चीनी गुब्बारे के गिराए जाने के छह दिन बाद यानी 10, 12 और 13 फरवरी को लगातार अज्ञात वस्तुएं अमेरिकी हवाई क्षेत्र में दिखीं थीं जिसे अमेरिकी सैन्य लड़ाकू विमानों ने मार गिराया था। अमेरिकी सीनेट में बहुमत के नेता चार्ल्स शूमर ने कहा था कि तीनों वस्तुएं गुब्बारे जैसी नहीं थीं। अब तक केवल पहले गुब्बारे का संबंध चीन से मिला है।
यूएस और चीन का झंडा
- फोटो :
पीटीआई
इन विवादों का दोनों देशों के रिश्तों पर क्या प्रभाव पड़ा है?
अमेरिका और चीन में कथित जासूसी की घटनाओं ने दोनों देशों के संबंधों को तनावपूर्ण कर दिया है। जासूसी गुब्बारा मिलने के बाद ही अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने अपनी चीन यात्रा को रद्द कर दिया। इसके अलावा उन्होंने सैन्य जासूसी गुब्बारों का समर्थन करने वाली छह चीनी संस्थाओं को भी ब्लैकलिस्ट कर दिया। जिन कंपनियों को अमेरिका ने ब्लैकलिस्ट किया, उनका संबंध चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी से बताया जाता है। अमेरिका का कहना है कि चीनी सेना अधिक ऊंचाई वाले गुब्बारों का इस्तेमाल कर खुफिया गतिविधियां कर रही है।
इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा है कि उन्हें विश्वास नहीं है कि दोनों देशों के बीच संबंध कमजोर हुए हैं। अमेरिका की उप-विदेश मंत्री वेंडी शेरमन ने बुधवार को कहा कि चीन के साथ संचार बंद नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, 'हम उम्मीद करते हैं कि जब स्थितियां समझ में आएंगी तो हम एक-दूसरे को फिर से आमने-सामने मिलेंगे।' उधर चीन ने पहले गुब्बारे को गिराए जाने की निंदा की थी। उसने कहा था कि यह अंतर्राष्ट्रीय नियमों का गंभीर उल्लंघन है।
अमेरिका और चीन में कथित जासूसी की घटनाओं ने दोनों देशों के संबंधों को तनावपूर्ण कर दिया है। जासूसी गुब्बारा मिलने के बाद ही अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने अपनी चीन यात्रा को रद्द कर दिया। इसके अलावा उन्होंने सैन्य जासूसी गुब्बारों का समर्थन करने वाली छह चीनी संस्थाओं को भी ब्लैकलिस्ट कर दिया। जिन कंपनियों को अमेरिका ने ब्लैकलिस्ट किया, उनका संबंध चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी से बताया जाता है। अमेरिका का कहना है कि चीनी सेना अधिक ऊंचाई वाले गुब्बारों का इस्तेमाल कर खुफिया गतिविधियां कर रही है।
इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा है कि उन्हें विश्वास नहीं है कि दोनों देशों के बीच संबंध कमजोर हुए हैं। अमेरिका की उप-विदेश मंत्री वेंडी शेरमन ने बुधवार को कहा कि चीन के साथ संचार बंद नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, 'हम उम्मीद करते हैं कि जब स्थितियां समझ में आएंगी तो हम एक-दूसरे को फिर से आमने-सामने मिलेंगे।' उधर चीन ने पहले गुब्बारे को गिराए जाने की निंदा की थी। उसने कहा था कि यह अंतर्राष्ट्रीय नियमों का गंभीर उल्लंघन है।